पढिये गा जरूर , कोई फोटो इस के साथ नहीं लगा रहा हूँ क्योंकी शब्द आज जादा महत्वपूर्ण लगे :- अपने विचार भी लिखिए गा
एक लड़का अविंदर प्रताप पाण्डेय जिसने आधुनिक भारत में दोस्ती का महान उदाहरण पेश किया था १६ दिसम्बर को उसके साथ उसकी दोस्त भी घूम रही थी दिल्ली में , जब अचानक दोनों का एक बस में सवार गुंडों ने अपहरन कर लिया ,पाण्डेय की आँखों के सामने उसकी दोस्त का बेरहमी से बलात्कार किया गया चलती बस में , उसने पूरी कोशिश करी दोस्त को बचाने की लेकिन लोहे की रोड से पाण्डेय को इतना मारा गया की वो चाह के भी अपनी दोस्त को गुंडों के चंगुल से बचा न पाया , उसका सारा सामान तथा कपड़े गुंडों ने छीन लिए फिर चलती बस से बिना कपड़ो के दोनों को ( पाण्डेय व् उनकी दोस्त ) फैंक दिया गया दोनों निवस्त्र थे , बुरी तरह घायल थे , दोनों के शरीर से खून बह रहा था कुल मिला कर दिसम्बर की सर्दी ये हालत ऐसी नहीं थी के कोई इंसान हिम्मत रख सके , लेकिन पाण्डेय ने हार नहीं मानी , घिसटते हुई सडक पे जाते लोगो से सहायता मांगी लेकिन ४० मिनट बाद सहयता के नाम पर एक शाल मिली जिस से उसने अपनी दोस्त को ढका किसी तरह दोस्त को हस्पताल पहुँचाया , पुलिस बुलाई लडकी के माँ- बाप को बताया मतलब जो कुछ वो कर सकता था किया उस समय जब उसकी दोस्त को उसकी बहुत जादा ज़रुरत थी
वह बस छोड़ के भाग सकता था ,लडकी को खून से लथपथ हालत में छोड़ क्र भाग सकता था ,उसके पास मौक़ा था टी.बी.- अखवार -पत्रिकाओं में दोस्ती के नाम पर छा जाने का , पैसे इक्कठे करने का मीडिया से ,सरकार से , रोज़ टीबी पर आकर चर्चाओं में शामिल होकर प्रसिद्ध होने का - लेकिन उस दोस्त ने ऐसा कुछ नहीं किया किस्सी भी तरह से उसने अपनी दोस्त निर्भया के साथ रिश्ते का व्यापार नहीं किया ,आज भी वो शक्स गोरखपुर उत्तरप्रदेश में साधारण गुमनाम जीवन जी रहा है बिना किसी को अपना दुःख अपनी बेदना बताय आज दुनिया के फ्रेंडशिप डे के दिन इस महान दोस्त को याद करना ज़रूरी हो जाता है चाहता तो ये हूँ के १६ दिसम्बर को हम भारत में फ्रेंडशिप डे मनाये ताकी हमारे देश के युवाओ को फ्रेंडशिप की जिमेदारी व रिश्ते की पवित्रता याद रहे , लेकिन आज ३ अगस्त को भी अगर इस दोस्ताने की कहानी आपको पढने को मिले तब भी असर कम नहीं होगा
एक लड़का अविंदर प्रताप पाण्डेय जिसने आधुनिक भारत में दोस्ती का महान उदाहरण पेश किया था १६ दिसम्बर को उसके साथ उसकी दोस्त भी घूम रही थी दिल्ली में , जब अचानक दोनों का एक बस में सवार गुंडों ने अपहरन कर लिया ,पाण्डेय की आँखों के सामने उसकी दोस्त का बेरहमी से बलात्कार किया गया चलती बस में , उसने पूरी कोशिश करी दोस्त को बचाने की लेकिन लोहे की रोड से पाण्डेय को इतना मारा गया की वो चाह के भी अपनी दोस्त को गुंडों के चंगुल से बचा न पाया , उसका सारा सामान तथा कपड़े गुंडों ने छीन लिए फिर चलती बस से बिना कपड़ो के दोनों को ( पाण्डेय व् उनकी दोस्त ) फैंक दिया गया दोनों निवस्त्र थे , बुरी तरह घायल थे , दोनों के शरीर से खून बह रहा था कुल मिला कर दिसम्बर की सर्दी ये हालत ऐसी नहीं थी के कोई इंसान हिम्मत रख सके , लेकिन पाण्डेय ने हार नहीं मानी , घिसटते हुई सडक पे जाते लोगो से सहायता मांगी लेकिन ४० मिनट बाद सहयता के नाम पर एक शाल मिली जिस से उसने अपनी दोस्त को ढका किसी तरह दोस्त को हस्पताल पहुँचाया , पुलिस बुलाई लडकी के माँ- बाप को बताया मतलब जो कुछ वो कर सकता था किया उस समय जब उसकी दोस्त को उसकी बहुत जादा ज़रुरत थी
वह बस छोड़ के भाग सकता था ,लडकी को खून से लथपथ हालत में छोड़ क्र भाग सकता था ,उसके पास मौक़ा था टी.बी.- अखवार -पत्रिकाओं में दोस्ती के नाम पर छा जाने का , पैसे इक्कठे करने का मीडिया से ,सरकार से , रोज़ टीबी पर आकर चर्चाओं में शामिल होकर प्रसिद्ध होने का - लेकिन उस दोस्त ने ऐसा कुछ नहीं किया किस्सी भी तरह से उसने अपनी दोस्त निर्भया के साथ रिश्ते का व्यापार नहीं किया ,आज भी वो शक्स गोरखपुर उत्तरप्रदेश में साधारण गुमनाम जीवन जी रहा है बिना किसी को अपना दुःख अपनी बेदना बताय आज दुनिया के फ्रेंडशिप डे के दिन इस महान दोस्त को याद करना ज़रूरी हो जाता है चाहता तो ये हूँ के १६ दिसम्बर को हम भारत में फ्रेंडशिप डे मनाये ताकी हमारे देश के युवाओ को फ्रेंडशिप की जिमेदारी व रिश्ते की पवित्रता याद रहे , लेकिन आज ३ अगस्त को भी अगर इस दोस्ताने की कहानी आपको पढने को मिले तब भी असर कम नहीं होगा
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