एयरफोर्स सैनिक का जोरदार लेटर बम ... !! ... पढें -------------- . ____ "कल जेल से छूटने के बाद छात्र संघ के कन्हैया के भाषण को सुन कर मुझे कुत्तों की प्रवृति य ाद आ गयी.. भौंकते हैं … जब कोई ठोकता है तो कुंकाते हैं यानि कैं कैं करते हैं और फिर कुछ दूरी पर जाकर भौंकने लगते हैं.. जिस न्याय व्यवस्था को मानते नही उसी से न्याय मांगने लगते हैं । याद किजिये भाषण के अगले दिन ये महाशय चैनल पर पूरे जोश के साथ नज़र आये—- जब गिरफ़्तारी हुई तो इनके तेवर ढीले पड़ गये– और जब अदालत में ठुकाई हुई तो ये दीन हीन हो गये । वैसे जेल में रहने का कुछ तो प्रभाव हुआ ही जो इनकी ग्रामर थोड़ी ठीक हो गयी पहले इन्हे “भारत से आज़ादी” चाहिये थी लेक़िन जेल से छूटने के बाद “भारत में” आज़ादी चाहिये हो गयी । इसका श्रेय में पूरा पूरा सरकार को देना चाहुंगा । . मैं इन महोदय को 'कुत्ता' कह कर संबोधित करना चाहता था लेक़िन मुझे कुत्तों की 'वफ़ादारी और इज़्ज़त' का ख़्याल आ गया । कुत्ते जिसका खाते हैं उस पर गुर्राते नही हैं । ये महोदय अमीरों के 'टैक्स के टुकड़ों' पर पलते हैं, शिक्षा अर्जित करते हैं और 'आरक्ष...