सबसे अधिक महत्वपूर्ण है इच्छा तथा दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति का सही अनुमान तथा सही अर्थ समझ में आना। सीखने की इच्छा या सीखने के लिए दृढ संकल्प में बहुत बड़ा अंतर् है। पहली तो एक साधारण अभिलाषा है और दूसरा अभिलाषा को पूरा करने का साहसपूर्ण तथा सक्रिय प्रयत्न है। सीखने की इच्छा बिखरी हुई तथा साधारण होती है , परन्तु दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति केंद्रित तथा निश्चित वस्तु है। सीखने की इच्छा का अर्थ है हम काम या क्रिया को बार -बार दोहराते हैं और आशा करते हैं कि कोई फायदा हो। लेकिन दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति दोहराने से भी आगे ले जाती है , हर कदम पर विश्लेषण करना और असफलता के कारणों को ढूँढना विवेचना करना फिर सुधार की गुंजाईश तथा सुधार के उपयुक्त तरीके अपनाना शामिल हो जाता है। दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति का तातपर्य है दृढ़ता से मन तथा प्रयत्न को केंद्रित करना।
इच्छा तथा दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति में बहुत बड़ा अंतर् आवश्यक है परन्तु 'इच्छा ' परम् आवश्यक है। साधारण इच्छा /शौक /रूचि नींब है 'दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति' की। अगर साधारण इच्छा /शौक /रूचि ही नहीं है तो संकल्प या उत्साह का तो प्रश्न ही नहीं उठता। साधारण इच्छा मनुष्य में बल का संचार करती है , मानसिक शक्तियों को एकागर्ता की तरफ जाने को उत्साहित करती है ,सफलता की कल्पना का मूलाधार इच्छा ही तो होती है। दुनियां के अधिकतर लोगों की सीखने की या आगे बढ़ने की इच्छा ही नहीं रहती , अगर किसी में हो तो वह भी अस्थिर सी होती है हाँ और ना में ही समय निकाल देते हैं अर्थात पानी में तरंग की तरह होती है इच्छा। उन्हें जीवन में कुछ -कुछ सुख प्राप्त हैं ,थोड़ी सी सफलता प्राप्त है और वे उसी में संतुष्ट हैं। ऐसे लोगों की उन्नति ना के बराबर ही होती है , क्योंकि वे अपने में या अपने काम में सुधार की इच्छा ही नहीं रखते। हाँ , कोई कोई होता है जिसे थोड़ा सीखने की इच्छा हो आगे बढ़ने की रुचि हो , कुछ पुस्तकें या विडिओ आदि देख कर ही वे संतुष्ट हो जाते हैं , कुछ सार्थक वे भी नहीं करते हैं। उनमे अपने प्रति असंतोष होता है लेकिन सकारात्मक बदलाब के लिए उनका भी संकल्प नहीं होता।
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