ग्रीन चाय की बात अब पुरानी हो गयी है क्योंकि अब नए ज़माने में रंग जमा चुकी है "ग्रीन कॉफ़ी" . ग्रीन कॉफ़ी वही पुरानी कॉफ़ी है परन्तु अपने प्राकृतिक रूप में। कॉफी के दानों का असली रंग हरा ही होता है लेकिन इसे भूनने पर इसका रंग हल्का भूरा या चॉकलेट जैसा हो जाता है निर्भर करता है कितने तापमान पर कितनी देर दाने भुने गए हैं। किसी भी दाने को अगर आप भूनते हैं तो उसके अघिकतर प्राकृतिक गुण नष्ट हो जाते हैं, यही कॉफ़ी के दानों के साथ भी हुआ। ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड नाम का एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। भुनी हुई कॉफी में इसकी मात्रा बहुत कम रह जाती है। क्लोरोजेनिक एसिड शरीर में पाचन प्रक्रिया को चुस्त - दरुस्त करता है परिणाम स्वरुप भोजन का पाचन सही ढंग से होता है और शरीर में से अपशिष्ट पदार्थ पूरी तरह से बाहर निकलते हैं और शरीर में चर्बी जमने ही नहीं देते। अनचाही चर्बी जब शरीर में नहीं होगी तो कोलेस्ट्रॉल भी नहीं बढ़ेगा अर्थात रक्त बाहिकाओं में रक्त परिवहन का मार्ग अव्रुद्ध नहीं होगा मतलब मोटापा , ब्लड प्रेशर , हिर्दय के रोग ,...