Skip to main content

Posts

Showing posts with the label #rahulgandhi

JNU AZADI ऑपरेशन हुआ कन्हैया का -अच्छे दिन तो शुरू हो गए भाई !!

देश में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है।  J N U में कन्हैया बापिस आया और आरएसएस तथा मोदी की भाषा बोलते हुए देश भक्ति की ऊंची -ऊंची बातें कर रहा था।  आज तक , abp news , ndtv आदि के स्टूडियोज में तो जैसे रौनक ही लौट आई।  इन चेन्नल्स ने कन्हैया को मोदी के बराबर नहीं बल्कि बहुत ऊपर , बड़ा करके दिखाया।  खैर जितना मर्जी दिखाया लेकिन कन्हैया के विचारों में आया क्रांतिकारी बदलाव क्यों और कैसे आया ये किसी ने भी नहीं बताया।  कन्हैया खुद को भी 'बेचारा ' बताता रहा लेकिन उसके कड़वे और देश द्रोही विचारों पर राष्ट्र भक्ति की चाशनी का राज़ उसने भी नहीं बताया , बल्कि 'लाल-सलाम ' के बुर्के को ओढ़ कर जेल और कोर्ट में पिलाई गई  देश भक्ति की घुटी  को छुपाने की नाकाम कोशिशि तो की लेकिन गीदड़ तब  तक पहचाना नहीं जाता जब तक मुंह ना खोले और जैसे ही वह मुंह खोलता है हुआँ -हुआँ की आवाज़ सारे राज़ खोल देती है।  यहाँ भी ऐसा ही हुआ सभी नाटक और बातें एक तरफ, लेकिन देश भक्ति  लपलपाती चाशनी में एक गदार के देश भक्ति वाले भाषण ने सारा राज़ खोल दिया।  जेल में सेवा तो ...

नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस और खानदानी बहादुर कांग्रेस कार्यकर्ता

 किसी संगठन या राजनितिक दल के सम्पूर्ण काडर को  अगर बहादुरी का मेडल देने की बात चले तो मेरी पसंद कॉंग्रेसी होंगे। इस संगठन की नींव 1885 में भारतियों को राजनीतिक नेतृत्व दिलवाने की सोच से किया गया था।  संगठन के लिए देश और देश की जनता सर्वोपरि थी , महात्मा गांधी , सुभाष चन्द्र बॉस , सरदार बलभभाई पटेल , लाल बहादुर शास्त्री आदि  लिस्ट बहुत बड़ी है लगभग सभी महान बिभूतियाँ जो आज़ादी की जंग में शामिल  थे ,कांग्रेस से भी जुड़े थे। अच्छा आज़ादी मिलते ही महात्मा गांधी ने मांग कर दी के कांग्रेस को भंग करदो क्योंकि देश आज़ाद हो चुका है और अब कॉंग्रस्स की ज़रूरत नहीं है। खैर , ये मांग नहीं मानी गयी और वक़्त के करवट लेते ही नयी कांग्रेस देश के सामने आ गयी , इस कांग्रेस में देश के लिए कोई जगह नहीं है और ना ही देश सेवा के लिए , एक और बात यहाँ नागरिक भी "भारतीय" ना होकर जाति -धर्म से पहचाने जाने लगे।  देश के सभी महान सेवक कहीं गुम हो गए और सिर्फ एक ही  परिवार देश का खैरख्वा हो गया , जी हाँ राहुल गांधी उसी परिवार की खेती हैं। वक़्त का फेर देखिये अब कोंग्रेसियों को ...