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लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता रहे -जीना इसी का नाम है

इंसान और जानवर सभी जीवो के बीच एक अदृश्य सेतु बना हुआ होता है इसका निर्माण तभी होता है जब दो लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता हो। ये फर्क नहीं पड़ता दोनों लोग किस परिवार ,जाति ,धर्म या प्रजाति के हैं।  इंसान भी हो सकते हैं जानवर भी। पुरानी फिल्म अनाड़ी का गाना जिसके लेखक शैलेन्द्र थे इन भावो को पुरणत्या व्यक्त करता है-किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार ,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार ,किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार जीना इसी का नाम है। इतने प्यारे भाव हों और घर में कलह या अशांति हो तो कमी विचारों की नहीं बल्कि कमी बिकल्पों की है। पुराने समय में घरों के फैसले परिवारों के बड़े बज़ुर्ग ही लेते थे ,उनके आगे कोई ना -नुकर नहीं  चलती थी किसी की हिम्मत ही नहीं होती थी। वक़्त बदला और परिवारों में कई शक्ति केंद्र हो गए। ऐसे विकट समय में अगर किसी से कोई फैसला देने के लिए कहे तो उनको अपना विचार बताते समय ऐसा कहना चाहिए कि मेरे विचार में तो ये काम ऐसे करलो बाकी और भी कई तरीके हैं जो ठीक समझो वही करो। जैसे ही आप विकल्प सामने रखते हैं, फैसला सुनने वालों को आज़ादी मिलती है कुछ...

Lal Bahadur Shastri - story of a Great Leader

जन्म - 2  अक्तुबर 1904 , मृत्यु - 10  जनवरी 1966 .  भारत के द्वितिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म  मुगलसराय (वराणसी) उत्तर प्रदेश के एक सामान्य परिवार में हुआ था। आपके बचपन का नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था। आपके पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एक  प्राइवेट स्कूल में शिक्षक रहे और बाद में इलाहाबाद में सरकारी विभाग में  क्लर्क भी रहे , लेकिन जब लाल बहादुर एक बर्ष के थे तभी उनके पिता जी की मृत्यु हो गयी। लाल का बचपन का जीवन  संघर्ष पूर्ण  रहा। गरीवी में  परवरिश काफी कठिनाई से हुई।  इनको नदी पार करके स्कूल जाना होता था और नाव वाला नदी पार करवाने के पैसे लेता था , लाल बहादुर नाव द्वारा  नहीं बल्कि तैर कर नदी पार करते थे। एक और वाक्या जिसने इनका  जीवन बदल दिया था , एक बार लाल बहादुर दोस्तों सहित किसी के बगीचे से फल चुराने गए , वहां बगीचे के रक्षक द्वारा लाल पकड़ लिए गए , जब बगीचा रक्षक इनको पीटने लगा तो इन्होने बगीचा रक्षक से मुआफ़ी की गुहार करी , के मेरे पिता नहीं है कृपया मुझे छोड़ दो ,...