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क्या आप उसके सहायक बनेंगे ?

देवा पाना दे ,देवा पेचकस देना ,आइल साफ़ कर देवा, ,देवा, देवा..........  नहीं ये सन्नी दयोल की किसी फिल्म का डायलॉग नहीं है बल्कि एक गरीव परिवार के एकमात्र सहारे की घटित कहानी है। दुनिया में दो तरह की सरकारें हैं एक सरकार लोगों पर शासन करती है दूसरी लोगों के दिलों पर। जनता पर राज करने वाली सरकार खुद डरी हुई होती है और जनता को भी डराया ही करती है। लेकिन दिलों पर राज करने वाली इलाही सरकार खुद भी निर्भय और जनता को भी निर्भय बनाती है। जनता पर शासन करने वाले पहले चढ़ा देते हैं फिर कहते हैं कूद जा संभाल लेंगे और खुद हट जाती है परिणाम, धड़ाम की आवाज से गिरा देते हैं। यही खेल चलता रहा है ,परन्तु ऊपर वाली सरकार(इलाही /भगवान् ) का सहारा जिसने भी लिया उसे सभी सेवा और सहारा देने की कोशिश करते हैं। जिसका प्रतीक दिवस गुरु पूनम के रूप में मनाया जाता है। अब आते हैं देवा कि कहानी पर ,बूढी मां तथा पोलियो ग्रस्त भाई की ज़िम्मेदारी को अपने कंधों पर लेने के लिए 10 वीं कक्षा पास करके ज़िन्दगी के मैदान में उतरा ही था कि जीवन ने एक और करवट ली देवा मानसिक रूप से बीमार हो गया। छत्तीसगढ़ के बिलासपु...