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JNU- Hide out for Anti-nationals / मोदी सरकार की टँकार देखिये गद्दार जैसे ही जेल से छूटा..

एक गधी को पुलिस उठा कर ले गयी , उसपर देश द्रोह का केस था।  कुछ दिनों बाद वो गधी ज़मानत पे छूट कर बाहर आई तो अपनी साथी गधियों से अलग-अलग रहे।  किसी ने पुछा ये व्यबहार में बदलाब कैसे आया तो जवाव मिला ' जब से जेल जा कर आई है इनकी अलग जान पहचान और रुतवा हो गया है ' दुनिया भर के देश द्रोही और गद्दार इनका जेल अनुभव जानने के लिए आ रहे हैं। अब तो ये सेलिब्रिटी हो गई है।  पिछले तीन दिनों में दिल्ली का नज़ारा ऐसी ही तस्वीर दिखा रहा है। एक के बाद एक गद्दार लोग मीडिया में हीरो की तरह बात कर रहे हैं।  माहोल ऐसा हो गया है जैसे हिजड़ों के घर बेटे ने जनम ले लिया हो और अब बेटे को चूम -चूम के ही मार देंगे।  मीडिया में "गद्दार हीरो और देश सेवा करने वाले शहीद सैनिक जीरो " हो गए।  सुकमा में तीन जवानो की शहादत गौण हो गयी मीडिया के लिए। दुःख तो बहुत है लेकिन क्या करें ? शहीद के नाम पर वोट नहीं मिलती और गदार को वोट मांगने के लिए आर्डर भी मिल गए।  हमारे संबिधान की सुंदरता देखिये गदार राजनीति कर सकता है लेकिन सैनिक गद्दारों को मार नहीं सकता अगर सैनिक ऐसा करेगा तो गद्दारों के अधि...

नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस और खानदानी बहादुर कांग्रेस कार्यकर्ता

 किसी संगठन या राजनितिक दल के सम्पूर्ण काडर को  अगर बहादुरी का मेडल देने की बात चले तो मेरी पसंद कॉंग्रेसी होंगे। इस संगठन की नींव 1885 में भारतियों को राजनीतिक नेतृत्व दिलवाने की सोच से किया गया था।  संगठन के लिए देश और देश की जनता सर्वोपरि थी , महात्मा गांधी , सुभाष चन्द्र बॉस , सरदार बलभभाई पटेल , लाल बहादुर शास्त्री आदि  लिस्ट बहुत बड़ी है लगभग सभी महान बिभूतियाँ जो आज़ादी की जंग में शामिल  थे ,कांग्रेस से भी जुड़े थे। अच्छा आज़ादी मिलते ही महात्मा गांधी ने मांग कर दी के कांग्रेस को भंग करदो क्योंकि देश आज़ाद हो चुका है और अब कॉंग्रस्स की ज़रूरत नहीं है। खैर , ये मांग नहीं मानी गयी और वक़्त के करवट लेते ही नयी कांग्रेस देश के सामने आ गयी , इस कांग्रेस में देश के लिए कोई जगह नहीं है और ना ही देश सेवा के लिए , एक और बात यहाँ नागरिक भी "भारतीय" ना होकर जाति -धर्म से पहचाने जाने लगे।  देश के सभी महान सेवक कहीं गुम हो गए और सिर्फ एक ही  परिवार देश का खैरख्वा हो गया , जी हाँ राहुल गांधी उसी परिवार की खेती हैं। वक़्त का फेर देखिये अब कोंग्रेसियों को ...