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Showing posts from 2017

Who Is Responsible ? / दोषी कौन ?

बच्चों का भविष्य सुरक्षित  करने की चाह में अधिकतर माता-पिता आजकल बच्चों का वर्तमान खराब कर रहे हैं।  बच्चों को स्थानीय भाषा में बात नहीं करने दी जाती क्योंकि देसी भाषा बोलने वाले को गंवार या अनपढ़ समझने लगता है समाज।  अधिकतर माता-पिता अंग्रेजी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भाषा मान कर या फिर घर में हिंदी बोल कर बच्चों को महान होने के तगमे पकड़ा रहे हैं। परिणाम स्वरुप भारत में सैकड़ों वर्षों से बोली जाने  वाली देसी भाषाएँ या बोलियां अब बिलुप्तता की और अग्रसर हो गयी हैं।  मैं हैरान हूँ ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश हैं जो अपने यहाँ बाहरी जानबरों को आने नहीं देते या कहें कि वैन है बाहरी जीव आप उस देश में ले कर नहीं जा सकते  परन्तु भारत की देसी नस्ल की गौ को वहां की सरकार बाहें खोल कर अपना रही है क्योंकि देसी गौ के गोबर -मूत्र और दूध में जो गुण हैं वो किसी और जीव से नहीं  मिलते लेकिन अपने यहाँ भारत में देसी नस्ल को तिरस्कार की दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि भारत का समाज इन्फेरियरिटी काम्प्लेक्स से ग्रस्त है।  भारत के लोगों को लगता है जो कुछ भी उनके पुरखो...

लिखो क्योंकि अपने को खोजना है / Why To Write ?

Love Is The Only Medicine For This World आपके विचार कोइ पढ़े  मत लिखो  , न ही प्रसिद्धि के  लिए।  किसी तरह की कोई सनसनी  के लिए भी नहीं और ना ही गुप्त अजेंडे  के लिए ,ना पैसा  और ना ही पुरस्कार की लालसा दिमाग में रखो तथा किसी भाषा के अध्यापक को खुश करने   लिए , इस लिए भी मत लिखो की किसी ने कहा है लिखने के लिए।  लिखो सिर्फ इस लिए कि आपको लिखना है अपने भाव और बिचारों को शब्द देने हैं लिखना है जिंदगी  के प्रति अपने नजरिये को शव्द देने के लिए के लिए।  और गलतियों कि चिंता ना करो सभी गलतियां करते हैं। लिखो क्योंकि अपने को खोजना है 

Gujarat Election - One Sided Battle

Love Is The Only Medicine For This World हमारे लिए शब्दों का महत्व आजकल बहुत अधिक होता है अगर वे नकारात्मक हैं , अगर शव्द सकारात्मक हैं तो अधिकतर लोग उनकी तरफ ध्यान भी नहीं देते।  यही हालात हमारे जीवन में भी हैं जो भी कुछ अच्छा है वो दिखता ही नहीं है लेकिन नकारात्मकता की मोटी चादर हमारे मन और चित को पूर्ण रूपेण ढके रहती है।  गुजरात चुनाव में भी यही हो रहा है , समाज को जाति के नाम पर बांटा गया और फिर धर्म के नाम की राजनीति मुख्य मुद्दा हो गयी।  गुजरात में विकास मुख्य मुद्दा पिछले चुनावों में था लेकिन इस बार पटेल आरक्षण मुहीम को इतना अधिक प्रचार मिला की चुनाव के मुद्दे सिमट कर जाति और धर्म तक ही सीमित हो गए।  दोष नेताओं को नहीं दे सकते समाज को जनता को जैसा चाहिए वही मुद्दा मुख्य हो जाता है। गुजरात के चनावों को काफी महत्व पूर्ण मन जा रहा है क्योंकि मोदी का राज्य है और इसके विकास मॉडल के  नाम पे ही मोदी सत्ता में आये थे।  कान्ग्रेस् ने आरक्षण तथा और कई बातों को जाति से जोड़ कर चुनावों से पहले ही विकास को पागल करार दे कर गुजरात को पिछड़ा राज्य घोषित कर दिया...

Smog - The Killer Dust /स्टोन क्रेशरों की जानलेवा धूल हवा में

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है और जीना दूभर हो गया है दिल्ली वालों का लेकिन हैरानगी होती है जब वैज्ञानिक भी नेताओं की तरह बातें करने लगते हैं।  हमारे देश में खनन माफिया का कहर इतना अधिक है कि वैज्ञानिक भी जनता को बढ़ते प्रदूषण का पूरा सच बताने से डरते हैं। क्या कोर्ट क्या डॉक्टर सभी कहते हैं कि हवा में महीन धूलकण बहुत जेहरीले हैं और दिल्ली वालो के सांस उखाड़ने वाले ये धूलकण किसानो द्वारा जलाई जा रही प्रालि के कारण फ़ैल रहे हैं।  कोई पूछने वाला नहीं इनसे की जब आग से प्रालि जलाई जाती है है तब की किसान रेट-मिटटी मिलाकर हवा में मिला देते हैं या लोई और कारण है जिस के बारे में बोलने से सभी डरते हैं।  मतलब ये माफिया इतना बड़ा और ताकत वॉर है कि कोई भी जानकार इस के बारे में बात ही नहीं करता।  जी हाँ , खनन माफिया की ही बात कर रहा हूँ। स्टोन क्रेशरों द्वारा हवा में महीन जानलेवा धूल मिलाई जा रही है दिल्ली की धूल तो मीडिया दिखा रहा है लेकिन अधूरे सच के साथ।  भारत में इस समय वायु प्रदुषण के सबसे बड़े कारणों में स्टोन क्रेशर आते हैं परन्तु ये माफिया इतना ताकतवर है की कोई भी पर्यवरण ...

हम अपनी आने वाली नस्लों के लिए क्या संस्कार छोड़ कर जायेंगे ?

हमारे समाज में जो भी बुराई बढ़ी है उसका सीधा प्रभाव बच्चों पर पड़ा है,उनका संस्कार  बदल गया परिणाम स्वरुप व्यवहार बदल गया और सीधे सीधे कहें तो ये संसार बदल गया।  एक दिन यूँ ही सड़क के किनारे खड़ा था तो कुछ लोग आपस में बातें कर रहे थे - सबसे मुखर आवाज में बात करने वाले भाई साहेब दिल्ली में रहते थे और गांव में अपनी खानदानी ज़मीन ढूंढने आये हुए थे ताकि बेच कर पैसा कमा सकें।  उन भाई साहेब के बच्चे अच्छी नौकरियों पे हैं खुद भी अछि कमाई करते हैं लेकिन पुरखों की थोड़ी बहुत ज़मींन जो पैतृक गांव में थी उसे बेच कर अपने सुख में बृद्धि करने की कोशिश में थे।  दुसरे भाई साहेब होशियारपुर में रहते थे और उनका भी टारगेट दिल्ली वालों जैसा ही था , लेकिन उनका लॉजिक थोड़ा अलग था ,वे कह रहे थे मेरी दो बेटियां हैं , मेरे बाद पैतृक ज़मीन को कौन देखे गा और बड़ी बात है की गांव की ज़मीन बेच कर अपनी बेटिओं की शादी धूम धाम से करेंगे और कुछ पैसा अपने बुढ़ापे के लिए भी जोड़ कर रखेंगे।  तीसरे भाई साहेब चंडीगढ़  में रहने वाले थे वे भी पैतृक  जमीन की खोज में आये हुए थे लेकिन उनका विचार था की ज़मीन की...

And India Divided ! / बांटो और राज करो !

पिछले काफी समय से भारत में अलप संख्यक अपीजमेंट की राजनीति होती रही है । लेकिन हिन्दू बहुसंख्यक होने के बावजूद शांत रहे या बोला  जाए कि उदासीन रहे, उनको कभी भी एक सुर में किसी भी बात का विरोध करते नहीं देखा गया।  अभी भी ऐसा ही है हिन्दू एकता में कोई बिकास नहीं हुआ कुछ वर्ष पहले आमिर खान अभिनीत 'P.K " फिल्म में हिन्दू धर्म पर समूल रूप से कुठारा घात किया गया था ,मज़ाक उड़ाया गया था लेकिन कहीं भी हिन्दुओं में रोष उत्पन नहीं हुआ जबकि भगवान् भोले नाथ को हसीं का पात्र बनाया गया था।  फिल्म रिलीज़ ही नहीं हुई अपितु कीर्ति मानो के साथ कमायी करने वाली फिल्मो की लिस्ट में शामिल हो गयी।   उधर ताज़ा उदाहरण 'पद्मावती ' है जो राजपूत गरिमा के खिलाफ मानी जा रही है और चारों तरफ भारी बिरोध हो रहा है , वो बात अलग है कि फिल्म अभी रिलीज़ भी नहीं हुई है।  ऐसे कई उदाहरण हैं हमारे देश में जब हिन्दू धर्म से बढ़ कर जातियों ने देश और समाज को बाँट दिया।  सभी धर्मो में ,पूरी दुनिया में ऐसा ही तांडव है।  खैर बात भारत की करें तो पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा  हैं , अगर किसी...
युवा मन की उड़ान हिमालय से ऊंची हो सकती है और प्रशांत महासागर की गहराइयों से भी गहरी हो सकती वशर्ते युवा सेवा ,साधना और स्वाभिमान को जीवन में उतार चूका हो।  आजकल अधिकतर लोगों को कहते सुना जा सालता की 'इस सिस्टम का कुछ नहीं हो सकता ,सदियों से इंसान और समाज ऐसा ही रहा है कई लोगों ने कोशिश करि लेकिन समाज नहीं बदला।  हा हा  हा....... कितना भयंकर मज़ाक और नामसझी भरा नादान इंसान है , भाई जितने भी महान लोग हुए या समाज को सुधारने वाले हुए सभी ने अपने काम से , अपंने कर्म से ही शिक्षा दी है।  जिस भी इंसान की बात को समाज अनदेखा कर रहा है सच तो ये है की वो इंसान खुद अभी कच्चा है और कच्चे फल किसी को पसंद नहीं आते फिर ये तो बातें हैं।  जब तक आपके जीवन में ईमानदार कोशिश नहीं होगी आपको कोई नहीं सुनेगा।  अगर कोई अपवाद हो तो बात अलग है। आपको कर्म योग को जीवन में उतरना होगा , उसके परिणामस्वरूप आपके शब्दों में 'बज़न ' होगा और बजनयुक्त शब्द चाहे ए पी जे अब्दुलकलाम के हों या भगत सिंह के चाहे नरेंदर मोदी के हों या महात्मा गांधी के  सभी को एक जैसा सम्मान मिलेगा और प्रभाव भी हज़ा...

देश के युवा सार्थक प्रयास करने लगे है उन्हें प्रोत्साहन चाहिए मोदी जी / Youth Is Waiting - Modi ji

 पिछले वर्ष हनुमंतप्पा समेत मद्रास रजिमेंट के 10 सैनिक सियाचिन ग्लेशियर में अकस्मात हिमस्खलन का शिकार हो गए ,उनको ढूंढने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय लगा। बहुत दुःख की बेला थी लेकिन हमारे पास आधुनिक तकनीक ही उपलभ्ध नहीं थी। परम्परागत तरीके से खोजने में सबसे ज्यादा समय लगा हजारों टन बर्फ के नीचे दबे सैनिकों का पता लगाने में। प्रयोग में लाये जा रहे मेटल तथा थर्मल सेंसर्स वाले ग्राउंड राडार अच्छे परिणाम नहीं दे रहे थे। अगर तो दबने वाले के पास कोई मेटल /धातु है तब तो इसके प्रणाम सही आ जाते हैं वरना उम्मीद पूरी नहीं होती। अधिकतर भारतीय इस त्रासदी पे अफ़सोस करके तथा भगवान को दोष दे कर भूल गए लेकिन बेंगलुरु के सी एम् आर तकनिकी संस्था के कुछ छात्रों को इस घटना ने झकझोर दिया और उन्हें नया  तथा  बढ़िया उपकरण  ढूंढने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने ऐसी तकनीक खोजने की कोशिश की जिसे  काम करते समय मेटल या तापमान पर निर्भर न रहना पड़े। उनके द्वारा बनाये गए उपकरण मॉडल तैयार हो चूका है ,ये उपकरण बर्फ  के नीचे दवे जीव को डाइइलेक्ट्रिक कंस्टंट की सहायता ...

डिप्रेशन से मुक्त जीवन आपका हक़ है इसे प्राप्त करने के लिए योग करे / Overcome Depression With Yog & Pranyaam

डिप्रेशन या मानसिक अबसाद , ये बिमारी पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी चनौती  बन कर उभरी है।  पूरी दुनिया में जहाँ ये रोग तेज़ी  से बढ़ रहा है तो भारत भी इस से अछूता नहीं है।  भारत में डिप्रेशन का बढ़ना बहुत खतरनाक है क्योंकि भारत में जनसँख्या बहुत अधिक है लेकिन मनोरोग विशेषज्ञों की संख्या बहुत कम है।  इस भयाभये स्थिति में 'योग -प्राणायाम ' पूरी दुनिया के लिए आशा की किरण बनके उभरा है।  सुबह -सवेरे शौच से निवृत हो कर सिर्फ साँसों का ही तो प्रयोग है।  हमारे शरीर में जीतनी अधिक ऑक्सीजन होगी सवास्थ्य उतना ही अच्छा होगा।  धर्म या जाति का बिमारी फरक नही करती फिर हम इलाज में फरक क्यों करें ? प्राणायाम तथा योग खुद तो करना ही है अपने परिवार तथा बच्चों को भी करवाना शुरू करें ,क्योंकि आजकल डिप्रेशन के शिकार होने वालों में महिलाएं तथा बच्चों की संख्या भी बहुत बढ़ रही है। भगवान् ने जिसकिसी को भी इस दुनिया में भेजा है उसे खुश रहने का सारा सामान साथ ही भेजता है चाहे इंसान हो या जानवर , फिर हम उदास या डिप्रेस क्यों रहें ? सच बात तो ये है कि उदासी बाहर से भीतर आत...

दुर्गुण मनुष्य को आत्मघाती हमलावर बना देते हैं

भगवान् ने जन्म और मरण का अधिकार अपने पास रखा है। अपने ढंग से सबके जीवन की शुरुआत तथा अंत करवाता है। ना तो हम जन्म चुन सकते हैं और ना ही मृत्यु ही अपने ढंग से प्राप्त कर सकते हैं। हम सिर्फ बीच के समय {जन्म और मृत्यु }पर अधिकार जता सकते हैं। जो लोग दूसरों के जीवन पर अकारण हस्तक्षेप या आक्रमण करते हैं फिर चाहे उग्रवादियों हों या कट्टरवादी उनको ये याद रखना चाहिए कि भगवान् को उनकी हरकते अच्छी नहीं लगाती।  आजकल आत्मघाती आतंकियों का ज़माना है। पूरी दुनिया को इन आतंकियों ने भयभीत किया हुआ है क्योंकि आतंकि लोग सही मायने में मानव जीवन का महत्व नहीं समझते।  उनका मस्तिष्क गलत विच्चारों से भर कर इतना  भयंकर बना दी जाती है कि वे अपने साथ कईयों को मार कर ही  रसंतुष्ट  होते हैं। बुरे विचारों का असर कितना भयानक होता है बस ऐसा समझें कि जीवन में दुर्गुणों का प्रवेश होते ही इंसान आत्मघाती हमलावर बनने की तैयारी शुरू कर देता है। इंसान के भीतर ही आत्मघाती हमलावर दुर्गुणों के सहारे से पता नहीं कितनी अदृश्य हत्याएं करता है। काम ,क्रोध ,लोभ ,मोह तथा अह...

लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता रहे -जीना इसी का नाम है

इंसान और जानवर सभी जीवो के बीच एक अदृश्य सेतु बना हुआ होता है इसका निर्माण तभी होता है जब दो लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता हो। ये फर्क नहीं पड़ता दोनों लोग किस परिवार ,जाति ,धर्म या प्रजाति के हैं।  इंसान भी हो सकते हैं जानवर भी। पुरानी फिल्म अनाड़ी का गाना जिसके लेखक शैलेन्द्र थे इन भावो को पुरणत्या व्यक्त करता है-किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार ,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार ,किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार जीना इसी का नाम है। इतने प्यारे भाव हों और घर में कलह या अशांति हो तो कमी विचारों की नहीं बल्कि कमी बिकल्पों की है। पुराने समय में घरों के फैसले परिवारों के बड़े बज़ुर्ग ही लेते थे ,उनके आगे कोई ना -नुकर नहीं  चलती थी किसी की हिम्मत ही नहीं होती थी। वक़्त बदला और परिवारों में कई शक्ति केंद्र हो गए। ऐसे विकट समय में अगर किसी से कोई फैसला देने के लिए कहे तो उनको अपना विचार बताते समय ऐसा कहना चाहिए कि मेरे विचार में तो ये काम ऐसे करलो बाकी और भी कई तरीके हैं जो ठीक समझो वही करो। जैसे ही आप विकल्प सामने रखते हैं, फैसला सुनने वालों को आज़ादी मिलती है कुछ...

Tour De France 2017 /टूर डि फ्रांस

1 जुलाई से दुनिया की सबसे प्रसिद्ध साइकिल रेस 'टूर डि फ्रांस ' फ्रांस में आयोजित हो रही है ,तीन सप्ताह चलने वाली ये साइकिल रेस 3500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी को समेटे हुए है। ये दूरी 21 भागों या चरणों में बांटी गयी है। हर दिन एक चरण पूरा करना होता है। कुल मिला कर बहुत ही कठिन और थका देने वाली ये रेस ऊँचे पहाड़ों से होकर गुज़रती है। इस रेस में उतार -चढ़ाव कितने जानलेवा होते हैं उसका एक उदाहरण है ब्रिटेन के सबसे सफल पेशेवर साइकिलिस्ट टॉमी सिम्पसन की मृत्यु हो गयी थी वर्ष 1967 में। उनकी उम्र उस समय 29 वर्ष थी और उन्होंने 12वा सत्र पूरा कर लिया था और 13 वें सत्र की तयारी कर रहे थे तभी मो वांटू पर्वत श्रृंखला पे टॉमी की मृत्यु हो गयी। वे जिस जगह गिरे थे अब वहां एक स्मारक बनाया गया है। हर बार टूर डि फ्रांस के प्रतियोगी इस स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा अपने प्रिय साइकिलिस्ट के लिए गिफ्ट चढ़ाते हैं जिनमे प्रमुख रूप से पानी की बोतले ,हेलमेट आदि होते हैं। ये प्रतियोगिता 1903 में पहली बार आयोजित हुई थी।  इसका पहला आयोजन एक अखबार की बिक्री बढ़ाने के लिए अर्थात विज्ञापन के तोर प...

संवेदनशील नेता और सरकार - शुभ संकेत है देश की जनता के लिए !

बात पिछले वर्ष बरसात की है जगह महाराष्ट्र का मुंबई -पुणे एक्सप्रेसवे था।  बारिश से डर कर जहाँ अधिकतर लोग घरों में दुबक जाते हैं , कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो उस सुहाने मौसम को महसूस करने निकल पड़ते हैं।  ऐसी ही ठेठ मुम्बईकर महिला उषा प्रताप अकेले अपनी कार  में सवार होकर घाट की सुंदरता को निहारने निकल पड़ीं।  धीरे -धीरे चलती गाडी को एकाएक पीछे से आती हुई तेज रफ़्तार राज्य परिवहन की बस ने ओवरटेक कियापरिणाम स्वरुप सड़क पे इकठ्ठा पानी कार के अंदर भी घुस गया। उषा प्रताप को ये कोई कष्ट देने वाली अनुभूति नहीं थी , बारिश में अक्सर ऐसा हो जाता है और अगर पानी से इतनी नफरत होती तो घर से ही ना निकलती।  लेकिन जो बात महिला को चिंतित कर गयी वो थी बस की चाल।  बस तेज गति से हिचकोले खाते जा रही थी और ज़रा सी चूक बस के यात्रियों को मौत की आगोश में भेज सकती थी।  खुशनुमा मौसम बोझिल हो गया और महिला गाडी में बैठे -बैठे यात्रियों की कुशलता की प्रार्थना करने लगी।  फिर ना जाने क्या सोचा और अपनी कार की स्पीड बढाकर बस के नंबर नोट कर लिया और अपनी कार सड़क किनारे पार्क करदी। ...

What is Metaphysical poetry as John Donne's Poetry is called? by Amit Vashist

Ans.  In order to understand John Donne ‘s poetry , first of all we have to  understand the basics of his poetry , the nature of his poetry.  As per literary world “Donne’s poetry is of metaphysical nature”.  This word is very important to understand  because by understanding this one word ‘Metaphysical” we will be able to understand John’s poetry without confusion. So What is “metaphysical”? Metaphysics- In modern philosophical terminology, metaphysics refers to the studies of what cannot be reached through objective studies of material reality. Metaphysical – This word has been in use from very long time . In history , philosophy begins with the Pre-Socratics is considered as Metaphysical Philosophy . It is because Plotinus  the philosopher  has said at that time that human mind is only reflection of a more universal and perfect reality , which he named as ”GOD” the ordering power in the universe. Areas of ...

किराये की माँ -एक सस्ता सौदा !

मैं  एक दिन अपने छात्रों के साथ बात कर रहा था और साधारण बातचीत कैसे गंभीर होती चली गयी पता ही नहीं चला।  बातचीत की शुरुआत बच्चों को देख कर या उनसे सीख कर हम बड़े लोग कैसे सुखी रह सकते हैं इस मुद्दे पर हुई।  सारा माहौल बोझिल हो गया , दुःख से भर गया जब एक छात्रा (रीना) ने अपने पड़ोस में रह रही एक वर्ष की बच्ची की दास्तान सुनाई।   लगभग 5 महीने पहले अर्थात जब छुटकी सिर्फ 7 महीने की थी तब उसकी माता और पिता उसे दादा -दादी के पास छोड़ कर न्यूज़ीलैंड चले गए हैं।  7 महीने की बच्ची सभी को ढूँटति थी, अपनी माँ को सबसे अधिक। नम आँखों और उदास चेहरे से कुछ दिन निरीह गुड़िया हर तरफ टकटकी लगा कर देखती रहती , फिर एक दिन रीना ( मेरी छात्रा जिसने ये घटना सुनायी) उनके घर गयी किसी काम से , रीना ने गुड़िया को जैसे ही गोदी में उठाया, उस नन्ही परी ने जोर से किलकारी मारकर 'माँ ' कहा और उसके सीने से लिपट गयी। किसी भी ज़िंदा इंसान के लिए दुधमुँहे बच्चे का ऐसा निःस्वार्थ प्रेम आनंदित करने वाला होता है लेकिन आज रीना बहुत ही दुखी और उदास हो गयी उस नन्ही राज कुमा...

खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों पे हिमाचल प्रदेश अकैडमी है मेहरवान !

H.P. Academy Una Himachal Pradesh- Teacher's Day Celebrations

Guggu And Golu

Guggu And Golu

GUGGU AND BABY

Guggu And Golu As Artists

ये है घोटाले का उदाहरण / This is a type of Corruption

Plastic Pollution - The Biggest Threat For Environment

Kids Are Kids Always.............

खनन माफिया ने स्वां नदी में को भी मौत की सज़ा सुना दी है

खनन माफिया ने स्वां नदी में को भी मौत की सज़ा सुना दी है

खनन माफिया ने स्वां नदी में को भी मौत की सज़ा सुना दी है

खनन माफिया ने स्वां नदी में को भी मौत की सज़ा सुना दी है

खनन माफिया से हार रही है पहाड़ियां ,पेड़ और हिमाचल प्रदेश

वो पैसे के लिए मौत बाँटते हैं

मौत बांटते स्टोन क्रेशर

बैसाखी मनाई स्वां नदी में फेंका कूड़ा जला कर

स्वां पूजन किया बैसाखी के दिन

स्वां बचाओ अभियान -3

स्वां बचाओ अभियान -3

स्वां बचाओ अभियान 3

स्वां बचाओ अभियान -3

स्वां बचाओ अभियान -3

JCB मशीन से स्वां नदी में क्रेशर बालों ने बनाये खड्डे

सरकारी स्कूल के बच्चे आत्मबिश्वाश से भरपूर

सरकारी स्कूल के बच्चे आत्मबिश्वाश से भरपूर

Rangoli --Gagret Dist Una See Confidence of Kids From Govt. Primary Schools

Daffali Waale ....................Dance

Bullet Taan Rakhiye .........................

हम इतने निर्दयी क्यों हो गए हैं ?

Team SatyaKaam Cleaning River Som Bhadra स्वां नदी की सफाई की दास्तान

सत्यकाम के स्वयँ सेवक स्वां नदी की सफाई में

सभी मूर्तियां या तस्वीरें और पुस्तकें जो कूड़े में फैंकी थी हमने जला दीं

स्वां बचाओ अभियान के तहत सेवा कार्य

मरे हुआ सांप भी मिला नदी में

नदी में पानी के अंदर गन्दगी फैंकी हुई है

हुशियारपुर -चिंतपूर्णी रोड पे स्वां नदी में भगवान भी मिले कूड़े में

हिमाचल प्रदेश की सुंदरता को कूड़े ने ख़तम कर दिया है

एक तालाब इस लिए मार दिया क्योंकि वहां डंगा देना है

Hazrat Sachal Sarmast

आपके बच्चों को शुद्ध हवा मिले इसलिए पेड़ लगाएं

पेड़ लगाओ सांस बचाओ अभियान

बज़ुर्ग अध्यापकों ने खुद निकाले पेड़ों के लिए खड्डे

बज़ुर्ग अध्यापकों ने खुद निकाले पेड़ों के लिए खड्डे

पेड़ लगाओ सांस बचाओ

पौधों को क़त्ल न करो उखाड़ कर दूसरी जगह लगा दो

Shah Latif

आर्मी चीफ के साथ देश का हाथ

Sufism 6

घोडे दी सवारी

जंगल के तालाब भी सूख रहे हैं और आबादी वाले तालाब भी

हिमाचल के जिला ऊना में तालाब भी मर रहे हैं

सरकारी हैंडपंप लाखों में लगते हैं लेकिन पानी नहीं देते

सरकारी हैंडपंप लाखों में लगते हैं लेकिन पानी नहीं देते

कटते पहाड़ करें पुकार बंद करो ये हत्याचार

गौशाला में गौ नहीं पैसा बनाते हैं अब हिमाचली भी

Swan River A Glimpse From Ghaluwal -Una Bridge

जंगली जीव कहाँ जाएँ पानी पीने

स्वां बचाओ साँस बचाओ अभियान

स्वां बचाओ साँस बचाओ अभियान

ispur--स्वां बचाओ साँस बचाओ अभियान

panjawar

loharli2

loharli2

Sufism 3

गर्मियां अभी शुरू नहीं हुई लेकिन जंगल के तालाब सूख गए हैं