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डिप्रेशन से मुक्त जीवन आपका हक़ है इसे प्राप्त करने के लिए योग करे / Overcome Depression With Yog & Pranyaam

डिप्रेशन या मानसिक अबसाद , ये बिमारी पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी चनौती  बन कर उभरी है।  पूरी दुनिया में जहाँ ये रोग तेज़ी  से बढ़ रहा है तो भारत भी इस से अछूता नहीं है।  भारत में डिप्रेशन का बढ़ना बहुत खतरनाक है क्योंकि भारत में जनसँख्या बहुत अधिक है लेकिन मनोरोग विशेषज्ञों की संख्या बहुत कम है।  इस भयाभये स्थिति में 'योग -प्राणायाम ' पूरी दुनिया के लिए आशा की किरण बनके उभरा है।  सुबह -सवेरे शौच से निवृत हो कर सिर्फ साँसों का ही तो प्रयोग है।  हमारे शरीर में जीतनी अधिक ऑक्सीजन होगी सवास्थ्य उतना ही अच्छा होगा।  धर्म या जाति का बिमारी फरक नही करती फिर हम इलाज में फरक क्यों करें ? प्राणायाम तथा योग खुद तो करना ही है अपने परिवार तथा बच्चों को भी करवाना शुरू करें ,क्योंकि आजकल डिप्रेशन के शिकार होने वालों में महिलाएं तथा बच्चों की संख्या भी बहुत बढ़ रही है। भगवान् ने जिसकिसी को भी इस दुनिया में भेजा है उसे खुश रहने का सारा सामान साथ ही भेजता है चाहे इंसान हो या जानवर , फिर हम उदास या डिप्रेस क्यों रहें ? सच बात तो ये है कि उदासी बाहर से भीतर आती है  बरना हमारे अंदर तो सिर्फ आनंद का सागर ही भरा पड़ा है। अपने चारों और देखें तो ये बात आप महसूस  करेंगे कि दुःख ,परेशानी ,निराशा ,चिड़चिड़ापन ,बेचैनी ,हताशा ,थकान आदि का एक ही कारण है और वो है 'मन ' अगर सभी लोग ऐसे ही उदास और डिप्रेस रहेंगे तो प्रकृति भी पसोपेश में पड़ जाएगी। इस लिए योग को जीवन का अंग बनाएं। योग का उपयोग  किसी भी बर्तन के ढकन की तरह  करें। बर्तन में तब तक कुछ नहीं डाला जा सकता जब तक ढकन न हटाया जाये। योग करके आप अपने बर्तन रुपी मन का ढकन हटा दें ,खुशियां तो कुदरत हर समय बरसा रही है ,जरूरत है बरतन को सीधा रखने की वो भी बिना ढकन के ताकि प्र्सनता का अमृत उसमे इकठ्ठा हो सके। इस लिए प्राणयाम तथा योग द्वारा शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने दें फिर महसूस करिये "खुशियों से भरपूर दुनिया "   Overcome Depression With Yog & Pranyaam

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