Skip to main content

देश के युवा सार्थक प्रयास करने लगे है उन्हें प्रोत्साहन चाहिए मोदी जी / Youth Is Waiting - Modi ji

 पिछले वर्ष हनुमंतप्पा समेत मद्रास रजिमेंट के 10 सैनिक सियाचिन ग्लेशियर में अकस्मात हिमस्खलन का शिकार हो गए ,उनको ढूंढने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय लगा। बहुत दुःख की बेला थी लेकिन हमारे पास आधुनिक तकनीक ही उपलभ्ध नहीं थी। परम्परागत तरीके से खोजने में सबसे ज्यादा समय लगा हजारों टन बर्फ के नीचे दबे सैनिकों का पता लगाने में। प्रयोग में लाये जा रहे मेटल तथा थर्मल सेंसर्स वाले ग्राउंड राडार अच्छे परिणाम नहीं दे रहे थे। अगर तो दबने वाले के पास कोई मेटल /धातु है तब तो इसके प्रणाम सही आ जाते हैं वरना उम्मीद पूरी नहीं होती। अधिकतर भारतीय इस त्रासदी पे अफ़सोस करके तथा भगवान को दोष दे कर भूल गए लेकिन बेंगलुरु के सी एम् आर तकनिकी संस्था के कुछ छात्रों को इस घटना ने झकझोर दिया और उन्हें नया  तथा  बढ़िया उपकरण  ढूंढने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने ऐसी तकनीक खोजने की कोशिश की जिसे  काम करते समय मेटल या तापमान पर निर्भर न रहना पड़े। उनके द्वारा बनाये गए उपकरण मॉडल तैयार हो चूका है ,ये उपकरण बर्फ  के नीचे दवे जीव को डाइइलेक्ट्रिक कंस्टंट की सहायता  से ढूंढ लेगा। डाइइलेक्ट्रिक कांस्टन्ट किसी भी बस्तु के आवेश धारण करने की क्षमता पता कर लेता है ,आवेश जैसे ही उस बिंदु से अधिक होता है तो करंट बहने लगेगा। ये उपकरण उल्ट्रासॉनिक सेंसर का इस्तेमाल करता है तथा वर्फ के नीचे दवे किसी भी जीव को उसकी तरंगों के जरिये पहचान लेगा।
सागरिका टी.सामंता ,भवानी पुरोहित ,संध्या एस. तथा साक्षी रंजन इस उपकरण का मॉडल तैयार कर लिया है अब काम  है असली उपकरण के निर्माण का जो खर्चीला तथा उन्नत लेबोरेटरी में ही संभव होगा। देखना है की क्या सरकार या कोई सरकारी उपक्रम जैसे DRDO आदि देश के युवानो के सपनो को पंख लगाएंगे या कोई विदेश संस्थान ही पहले की तरह ये खोज अपने देश ले जाएंगे।

Comments

Popular posts from this blog

How to Learn New Things or Tough Subjects Successfully ?मतलब ये है कि आप अपने बचपन में लौट जाइये अर्थात बच्चे बन जाइये

Love Is The Only Medicine For This World जानवरों तथा मनुष्यों का सीखने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है।  जीवों के सीखने की प्रक्रिया ,'कोशिश और गलती अर्थात trial and error ' नियम पर आधारित होती है । सीखने वाले के लिए शुरूआती प्रयत्न किसी विज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं होते। प्रारंभिक छोटी -छोटी कोशिशों से मनुष्य को सफलता के रास्ते की कठिनाइयों तथा अपनी कमियों का पता चलता है ,जिनको दूर करने के प्रयत्न वह आरम्भ कर देता है। शुरुआती प्रयत्न इतना तो समझा ही देते हैं कि वे कौन  से  तरीके हैं जिनसे लक्षित क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती और वह नए तरिके अपना कर अपनी कोशिशों को नए आयाम देना भी आरम्भ करदेता है। सीखना मानसिक दक्षता का आधार है।  हर सीखने वाले की दक्षता अलग -अलग होती है अतः सीखने के लिए कितना समय लगता है यह भी हर किसी की दक्षता पर ही निर्भर करता है।  कौरव तथा पांडव गुरु द्रोणाचार्य जी के आश्रम में शिक्षा के लिए  गए।  गुरु जी ने पहला पाठ पढ़ाया "सदा सच बोलो " | अगले दिन गुरु जी ने पाठ सुनाने को कहा तो सिवाए युधिष्ठिर के सभी ने पाठ रट कर सुना...

बैसाखी मनाई स्वां नदी में फेंका कूड़ा जला कर

खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों पे हिमाचल प्रदेश अकैडमी है मेहरवान !