Skip to main content

Posts

Showing posts with the label ##britishraj

Sahitya Academy Award and Secular / किसान की मौत साहित्य को संजीवनी लगती रही

आजकल साहित्य अकैडमी अवार्ड बापिस करने की होड़ लगी हुई है ,सेक्युलर साहित्यकार काफी मुस्तैदी के साथ कम्युनलिज्म का बिरोध कर रहे हैं , अख़लाक़ जैसा सेक्युलर अगर मरता है तो साहित्यकार दुखी होता है लेकिन जब संजीव कुमार नाम का कम्युनल लड़का ,बिहार में मुस्लिम समुदाय द्वारा मार दिया जाता है तो ना सेक्युलर मीडिया खबर दिखाता है और  ना ही किसी  साहित्यकार को कष्ट होता है। खैर, आज़ादी तो ज़रुर भारत को 1947 में मिली थी लेकिन अधिकतर पढ़ा लिखा वर्ग अंग्रेज़ों की मानसिक गुलामी आज भी करता रहा है उसमे विदेशों में पढ़े कांग्रेसी नेता जैसे खुर्शीद ,राहुल आदि तथा अधिकतर सेक्युलर साहित्यकार अब तो इनकी पहचान बड़ी आसान हो गयी है ! आज़ादी के बाद के अधिकतर भारतीय साहित्यकार अपराध बोध तथा हीन भावना से ग्रसित रहे हैं। पूरी दुनिया में  जितने भी महान प्रेरक हुए हैं वे एक ही बात कहते रहे हैं 'नज़र बदलो ,नज़ारे बदल जाएंगे ' ये छोटी सी बात अगर देश के सेक्युलर साहित्यकार नहीं समझ रहे हैं तो आम आदमी कैसे समझेगा।  एक साहित्यकार टी बी  बहस में कह रही थी "अख़लाक़ की मौत के बाद अब दम घुटता है इस...

1857 First War for Independence /काटजू -शोभा डे - फोटो खिंचवाने के लिए "गौ " क्या "गूँ " भी खा सकते हैं

भारत वही देश है  जहाँ गौ- चर्बी बाले कारतूस को लेकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ बिद्रोह का बिगुल बजा था.… और मंगल -मंगल -मंगल -मंगल हो.गयी थी  ………।   बड़ी वचित्र स्थिति है हमारे देश की एक तरफ देश तरक्की की राह खोज रहा है , दूसरी तरफ जाती - धर्म -मजहब की राजनीति उफान पर है।  बीजेपी द्वारा साफ-साफ़ दो टूक गौ-हत्या पर प्रतिबन्ध काफी कुछ व्यान करता है।  अगर आपने इतिहास पढ़ा हो तो 1857 की आज़ादी की पहली क्रांति का सबसे बड़ा कारण भी 'गौ-हत्या " ही रही।  जैसा के मैंने पहले भी लिखा था भारत के लोग या हिन्दू महाभारत के युद्ध से हुए विनाश के कारण लड़ाई -झगडे और हथियारों से दूर ही रहते थे , लेकिन जैसे ही "गौ -माता " पे बात आई अंग्रेज़ों की सत्ता के आखरी दिन शुरू हो गए।  मंगल पांडे ने सुप्त समाज को जाग्रत कर दिया सिर्फ यही नहीं सूअर की चर्बी बाले कारतूस मुसलमानो को अंग्रेज़ो के खिलाफ होने के लिए काफी थे।  हिन्दू और मुस्लिम दोनों एक साथ ब्रिटिश राज के खिलाफ खड़े हो  गए थे क्योंकि 'गौ-माता और सूअर' को मार कर उनकी चर्वी से कारतूस बना दिए यहां तक तो सब ठीक...