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Kindness is Quality of India/ रामदेव दुश्मनो की चालों से अनभिज्ञ नहीं हैं

पिछले दिनों में एक विचार ने मुझे काफी विचलित किया और परिणाम स्वरूप मैंने अपने लेखन में बदलाब करने का निर्णंये लिया।  सकारात्मकता को अब मैंने अपने लेखन की सर्वश्रेष्ठ पूँजी बनाने की शुरुआत की है। राजनितिक विचार और कटाक्ष भी होंगे लेकिन मूलतत्व "सकारात्मकता " अब मुख्य ध्ये होगा।  क्योंकि अपने लोगों तथा समाज की अगर तारीफ हम नहीं करेंगे ,अच्छे कामो की अगर रौशनी हमारे समाज में फैलानी है तो नकारात्मकता को छोड़ना होगा।  ओबैसी क्या कहता है क्या फरक पड़ता है , JNU में कुछ एक मूर्ख लोग देश तोड़ने की बात करें तो उनको महत्व क्यों दें ? बल्कि देश में हो रहे अच्छे काम तथा करने वालों के बारे में बात करेंगे तो कुछ सीखने को मिलता रहेगा।  शव्दों का असर बहुत  है ,ऐसे ही कर्मो का भी। हमारे देश में नकारात्मकता जानकर या अनजाने में फैलाई गयी है क्या फरक पड़ता है , मूलतत्व है  आज़ादी के बाद से हमारे हीरो और पहचान तथा इतिहास सभी पर परोक्ष रूप से प्रशन चिन्ह लगा दिए गए , पढ़ाई में इतना बदलाब हुआ के लोग भारतीयता का सही रूप ही भूल गए। एक युवा ने प्रशन किया "भारत हमारी माता कैसे हो सकता ह...

Modi Sarkar and Indian Politics

स्वच्छ भारत अभियान तो फ्लॉप है जी , देखो हमारी गली ,मोहला, गाओं शहर कितने गंदे हैं।  सरकार की नीतियां सिर्फ कागज़ों पर चल रही हैं।  मेक इन इंडिया भी फ्लॉप है जी , कोई फायदा नही हो रहा देश को।  बुलेट ट्रैन नहीं चाहिए हमें तो हमारे सैनिको के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट चाहिए।  काल धन तो जुमला था जी, व्यपारिओं का टैक्स हटा कर सरकारी कर्मचारिओं पर लगा दिया जी। क्रूड तेल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में घट रही है लेकिन जनता को फायदा नहीं मिला।  ऐसे कई मज़ाकिया आरोप बिपक्ष आज मोदी सरकार पर और उनकी नीतियों के बारे में  लगाता  है।  J N U के देश द्रोहियों की महिमा मंडन और विपक्ष के तलवे चाटने वाले कई पत्रकार सरकार की नीतियों पर  प्र्शन चिन्ह लगा देते हैं।  खैर उनका ये अधिकार  है , लेकिन क्या "भारत " सिर्फ मोदी ,बीजेपी या आरएसएस का देश है ? बाकी किसी का कोई फ़र्ज़ नहीं ,  अगर कोई काम देश के फायदे के लिए किया जाता है तो आरोप लगता है गुप्त अजेंडे पे काम कर रही है सरकार। पिछले दिनों तो हद हो गयी , एक गदार छात्र को पकड़ने की कवायद शुरू हुई तो सभी...

JNU- Hide out for Anti-nationals / मोदी सरकार की टँकार देखिये गद्दार जैसे ही जेल से छूटा..

एक गधी को पुलिस उठा कर ले गयी , उसपर देश द्रोह का केस था।  कुछ दिनों बाद वो गधी ज़मानत पे छूट कर बाहर आई तो अपनी साथी गधियों से अलग-अलग रहे।  किसी ने पुछा ये व्यबहार में बदलाब कैसे आया तो जवाव मिला ' जब से जेल जा कर आई है इनकी अलग जान पहचान और रुतवा हो गया है ' दुनिया भर के देश द्रोही और गद्दार इनका जेल अनुभव जानने के लिए आ रहे हैं। अब तो ये सेलिब्रिटी हो गई है।  पिछले तीन दिनों में दिल्ली का नज़ारा ऐसी ही तस्वीर दिखा रहा है। एक के बाद एक गद्दार लोग मीडिया में हीरो की तरह बात कर रहे हैं।  माहोल ऐसा हो गया है जैसे हिजड़ों के घर बेटे ने जनम ले लिया हो और अब बेटे को चूम -चूम के ही मार देंगे।  मीडिया में "गद्दार हीरो और देश सेवा करने वाले शहीद सैनिक जीरो " हो गए।  सुकमा में तीन जवानो की शहादत गौण हो गयी मीडिया के लिए। दुःख तो बहुत है लेकिन क्या करें ? शहीद के नाम पर वोट नहीं मिलती और गदार को वोट मांगने के लिए आर्डर भी मिल गए।  हमारे संबिधान की सुंदरता देखिये गदार राजनीति कर सकता है लेकिन सैनिक गद्दारों को मार नहीं सकता अगर सैनिक ऐसा करेगा तो गद्दारों के अधि...

Secular Artist and Communal Artist/ धर्म निरपेक्ष गुलाम अली साम्प्रदायिक रहमान

"अपनों पे सितम ,गैरों पे कर्म , ऐ जाने वफ़ा ये ज़ुल्म ना कर , ये ज़ुल्म ना कर " केजरीवाल ने ग़ुलाम अली को दिल्ली में शो करने के लिए न्योता भेजा है क्योंकि मुंबई में गुलाम अली का शो शिव सेना ने रद्द करवा  दिया है।  ये  है विश्व व्यापी सोच और जीतनी तारीफ़ केजरी सरकार की करी जाए  कम है। मुझे याद है केजू बाबा ने एकबार कहा था "हम नयी  प्रकार की राजनीति करने आये हैं "  . गुलाम अली का शो दिल्ली सरकार के लिए आमदनी का स्रोत भी बन सकता है, क्योंकि दिल्ली में करोड़ों आम आदमी गुलाम अली को चाहते हैं।  चाहे ना भी हों  लेकिन अंतर्राष्ट्रीय सोच इसे ही कहा जाएगा।   पिछले दिनों दादरी काण्ड पे केजरी का सेक्युलर विडिओ काफी प्रसिद्ध हुआ , धर्म निरपेक्षता का सशक्त उदाहरण और सन्देश उसमें केजरीवाल ने आम आदमी को दिया।  गुलाम अली साहेव पाकिस्तान नहीं वल्कि भारत के महान कलाकार हैं और आम आदमी की ज़िन्दगी से सीधे-सीधे जुड़े हुए  हैं।  नितीश कुमार और केजरीवाल की सोच यहीं आकर एक होती है और ममता बेनर्जी तो धर्मनिरपेक्षता की नींव है ही। जी हाँ , म...

Secular Death and Communal Death/ हिन्दू शहीद के दरवाजे पर कोई सांत्वना देने भी नहीं आया !

शहीद दरोगा मनोज मिश्रा के घरवालों का दर्द फिर हरा हुआ जब  अखलाक के परिजनों को 45 लाख और  मिले 2 नौकरियां मिली  बड़ा घर मिला , हवाई जहाज की यात्रा और मिश्रा जी के दरवाज़े पर  पर कोई सांत्वना तक देने नहीं पहुंचा  ॥   लेकिन गौहत्या के आरोपों से घिरे अखलाक के परिवार को अखिलेश सरकार 45 लाख का मुआवजा दे रही है. मनोज के पिता रोते हुए कहते हैं कि बेटे की मौत की  जांच हो और दो बच्चों को नौकरी दी जाए.  एक  बेटा खोने का दर्द तो सिर्फ मुस्लिम परिवार का ही होता है मिश्रा साहेब और उत्तरप्रदेश  सरकार आपके बेटे की जाति    हिन्दू  ब्राह्मण  होने के कारण  सांत्वना  देने  कैसे आ  जाती  ?   मनोज मिश्रा के  पिता    ने कहा कि अगर जाति-बिरादरी देखकर सरकार मुआवजा देती है तो ऐसा लगता है कि ब्राह्मण होकर हमने गुनाह कर दिया.  यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के हरदासपुर गांव के रहने वाले सब इंस्पेक्टर मनोज मिश्रा बरेली क...

Hindu Teachings/निश्चित ही सेकुलरिज्म खतरे में पड जाएगा........

चुन अपने लिए फूल या खार तू ,कि नेकी -बदी का है  मुख़तार तू ,जो दिल चाहे इस ज़िंदगी को सँबार ,बहार इसकी देख और उजाला निखार , जो दिल चाहे यह बाग बीरान  कर ,खुद अपनी तबाही के सामान कर,जो दिल चाहे ले राह -ए अक्लो स्वाब ,जो दिल  चाहे कर अपनी मिट्टी ख़राब।  हिन्दू धर्म पे कुठार घात सदियों से होते रहे  हैं , लेकिन  कभी भी सख्त शब्दों का या ऐसा कहें कोई भी कठोर विरोध नहीं किया गया , क्यों ?? क्योंकि हिन्दू धर्म में दुसरे धर्म के  विरोध में  कभी कुछ कहा  ही नहीं गया।  स्वामी गीतानन्द जी ने ख्वाज़ा दिल मुहम्मद साहिब के शब्दों का तर्जुमा हिंदी में किया क्योंकि इन शब्दों में मनुष्य मात्र के लिए सन्देश है।   कोई भी हिन्दू संत इस्लाम या क्रिश्चियन धर्म के ग्रंथों में से नकारात्मक सन्देश कभी हिंदी में अनुबादित  ही नहीं करता  , कारण सिर्फ यही था "दूसरों की निंदा का अर्थ है उन अबगुणो को अपने जीवन में समाहित करना"।  खैर हम क्यों नकारात्मकता को अपनाएँ , चलो एक दिया जलाएं। जिंदगी रूप में हमे एक बगीचा मिला है...

Lal Bahadur Shastri - story of a Great Leader

जन्म - 2  अक्तुबर 1904 , मृत्यु - 10  जनवरी 1966 .  भारत के द्वितिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म  मुगलसराय (वराणसी) उत्तर प्रदेश के एक सामान्य परिवार में हुआ था। आपके बचपन का नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था। आपके पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एक  प्राइवेट स्कूल में शिक्षक रहे और बाद में इलाहाबाद में सरकारी विभाग में  क्लर्क भी रहे , लेकिन जब लाल बहादुर एक बर्ष के थे तभी उनके पिता जी की मृत्यु हो गयी। लाल का बचपन का जीवन  संघर्ष पूर्ण  रहा। गरीवी में  परवरिश काफी कठिनाई से हुई।  इनको नदी पार करके स्कूल जाना होता था और नाव वाला नदी पार करवाने के पैसे लेता था , लाल बहादुर नाव द्वारा  नहीं बल्कि तैर कर नदी पार करते थे। एक और वाक्या जिसने इनका  जीवन बदल दिया था , एक बार लाल बहादुर दोस्तों सहित किसी के बगीचे से फल चुराने गए , वहां बगीचे के रक्षक द्वारा लाल पकड़ लिए गए , जब बगीचा रक्षक इनको पीटने लगा तो इन्होने बगीचा रक्षक से मुआफ़ी की गुहार करी , के मेरे पिता नहीं है कृपया मुझे छोड़ दो ,...

Modi and Digital India - आँख में आँख डाल कर हाथ मिलाएंगे - मोदी

"ना डरेंगे ना डराएंगे , ना झुकेंगे ना झुकाएँगे , आँख में आँख डाल कर हाथ मिलाएंगे - मोदी " ये बात पहले सिर्फ भाषण बाज़ी  ही लगते थे लेकिन मार्क ज़ुकरबर्ग की बॉडी लैंग्वेज देख कर महसूस हुआ के मोदी के शव्द सिर्फ भाषणो तक ही सीमित नहीं थे , मोदी ने अपने एक-एक शब्द को सच करके दिखाया है। यहाँ मै ये कते   नहीं कह रहा के मार्क या अमेरिका को मोदी ने डरा दिया ,नहीं ,बल्कि मेरा बस इतना कहना है  "भारत को भारत का असली गौरव दिलवा दिया" ।  मैं देख रहा था कैसे मार्क ज़ुकरबर्ग बार-बार पानी पी कर अपने स्ट्रेस को दवा रहा था। गूगल -फेसबुक -एप्पल आदि जितनी  भी अमेरिकन कम्पनीज हैं ऐसा नहीं है के अब एक दम से भारत में पैसे की बरसात कर देंगे। लेकिन अब वे लोग भारत में आ कर मोदी की कथनी और करनी को ज़रूर देख सकेंगे।  कांग्रेस एंड पार्टी ने भारत के प्रति पूरे विश्व में एक नकरात्मक छवि जो बना राखी थी , इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाली।  पुरानी छवि ही क्यों ,जिस तरह की आज भी राजनीति के नए ढंग जो कांग्रेस अपना रही है उससे साफ़ हो रहा है के विदेशियों को तो मोदी खींच लाएंगे ले...

क्या विदेशों में लोग पांच गुणों से पार पा गए हैं ?

पिछले कई दिनों से एक विचार पर मंथन चल रहा था , आज विचारों को शव्दों में पिरोने का मन किया है। आजकल हमारे आसपास विदेश जा कर बसने  की इच्छा रखने वालों की तादाद काफी बढ़ गयी है।  युवाओं में एक होड़ सी लगी हुई है विदेश प्रेम की।  बात करने पे पता चला के अधिकतर लोगों का मानना है के विदेशों में सुख-सुबिधायें बहुत हैं , सुरक्षा बहुत होती है , बच्चों का ख्याल विदेशों में सरकारें रखती हैं ,वहां पर्यावरण बहुत अच्छा है , वहां के लोग -समाज बहुत अच्छे होते हैं।  चिंता मुक्त जीवन होता है आदि आदि।  हमारे एक मित्र  अमेरिका में गुरुद्वारे में पाठ करते हैं वो भी अमेरिका और वहां के लोगों के बारे में खूब तारीफ़ करते है। एक मित्र कैनेडा रहता है और वहां की बहुत तारीफ करता है।  ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में भी जो जानकार रहते हैं उनका भी वहां के  बारे में सकारात्मक सोचना है। खैर , मेरा  उनकी तारीफ़ से विरोध नहीं है बल्कि मुझे ख़ुशी है जिसे सुख और चैन  से  जीवन जीने का सपना जीते जी पूरा हो गया वर्ना यहाँ तो मौत के बाद  स्वर्ग की कल्पना है। ल...

क्या ये हिम्मत बीजेपी के कार्यकर्ता दिखाएँगे ?

मोदी सरकार देश की सुरक्षा को लेकर बहुत ही संजीदा है , इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी बात को और पुख्ता करता है  हेरान टीपी ड्रोन खरीदने के प्रस्ताब को गुपचुप ढंग से पास करना।  40 करोड़ डॉलर की ये डील भारत की सेनाओं को बहुत सहायक होने वाली है।  अच्छा ये भी खूब रही हम सभी ये भी चाहते हैं के ऐसे और हथियार भारत सरकार ख़रीदे जिससे सेना ताकतवर बने लेकिन दूसरी तरफ मुफ्त में सुबिधायें चाहियें, पेंशने भी बढ़ा दी जाएँ , सैलरी भी बढाई  जाये , टैक्स भी कम हो जाए , सड़कें भी बने ,नए काम हों आदि आदि। लेकिन क्या ये सब इतना आसान है ? क्या हर किसी को देश हित के लिए कुछ त्याग नहीं करना चाहिए ? अब पेट्रोल -डीज़ल के दाम काफी नीचे आये हैं लेकिन ट्रकों -बसों -टैक्सियों के किराए कम नहीं हुए ,क्यों ? क्या ये भी मोदी के डंडे से ही सम्भव है क्या? अगर सरकार डंडे का उपयोग करेगी इन छोटी-छोटी चीज़ों के लिए तो फिर और काम कब होंगे। सिर्फ बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता ही अगर ईमानदारी से अपना काम देश हित में दो साल के लिए करें तो भारत सफलता की आवरत लिख सकता है , अब ...

ISIS के खिलाफ फतवे ज़ारी

ये खबर भारत के मीडिया ने दवा दी , देश में कोई भी मुस्लिम जब देश प्रेम और भाई चारे की बात करता है तो उसे सम्पूर्ण उत्साह के साथ पूरा समर्थन और सम्मान मिलना चाहिए।  भारत का दुर्भाग्य है के जनता को खवर पहुंचाने वाले खवर नफीस या तो कम्युनिस्ट माईंड / सोच के हैं या फिर बिकाऊ किसम के पत्रकार हैं ,  दोष इन लोगों का नहीं है , पत्रकारिता में इम्मान्दारी से काम करने वाले को तो गुज़ारे लायक पगार भी नहीं मिलती।  अधिकतर लोग टी वी में चमकती हसीनाओं को खबरें देते देख कर सोच लेते हैं के पत्रकारों की तो बल्ले-बल्ले होती है लेकिन सच बहुत भयाभय और कड़वा है ,खैर इस मुद्दे पे कभी फिर बात करेंगे , तो मुसलमान अगर isis का झंडा उठाते हैं तब तो टी वी पर खूब बहस  और खबर कई दिनों तक दिखाई जाती है ,लेकिन जब मुस्लिम लोग isis के खिलाफ झंडा उठाते हैं तो ये खबर , खबर ही नहीं बनती।  इससे सिर्फ एक ही सन्देश जाता है के भारत का मीडिया खाता भारत का है लेकिन उस ही थाली में छेद भी कर रहा है जिसमे खता है।  दुःख दायक है , परन्तु एक बात तो साफ़ हो गयी है के सोशल मीडिया ने पारम्परिक मीडिया की नाक में ...

भारत बनेगा मिसाइल प्रूफ, मोदी सरकार का 'काली कवच '

भारत को दुनिया मे पहला "मिसाईल प्रुफ" देश बनाने की तैयारी में मोदी सरकार ! अब बहुत जल्द पाकिस्तान समेत सभी हथियार पसंद देश हो जाएंगे भारत के आगे ढेर ! काली के वार से सभी को मिलेगी मात ,अटलबिहारी बाजपाई के शासन के दौरान अमेरिका से लाई गयी थी गुप्त तकनीक। काली रोकेगी दुश्मन की मिसाइलों को , भारत बनेगा मिसाइल प्रूफ देश , मोदी सरकार को मिलेगा 'काली कवच ' विज्ञानिक भाषा में KALI का अर्थ है 'किलो एम्पेयर  लीनियर इंजेक्टर 'Kilo Ampere Linear Injector'. ये तकनीक इस तरह काम करती है के अगर कोई भी मिसाइल भारत का रुख करती है तो सेकण्ड्स से भी पहले 'इलेक्ट्रॉनिक बीम्स Relativistic Electrons Beams' उसको जला देगी। ये लेजर बीम की तरह छेद ही नहीं करती हैं पर उस जगह पर इलेक्टिक सिस्टम को भी खत्म कर देती है। काली , लेजर हथियारों से बहुत अधिक कारगर और खतरनाक है। ये एक बहुत अधिक शक्ति वाली माइक्रोवेव तोप के रूप में काम करेगी। जल्दी ही साधारण जनता और तकनीक की दुनिया के तुर्रम खान माने जा रहे बिकसित देश भी मुहं और आँखें खोल कर देखेंगे 'काली  का जाल '

मोदी सरकार के तलख तेवरों ने पाकिस्तान समेत पूरे विश्व में हाहाकार मचा दिया है

भारतीय सेना अध्यक्ष द्वारा भारतीय सेना को पाकिस्तान के साथ युद्ध के लिए तैयार रहने की हिदायत ने पाकिस्तान समेत पूरे विश्व में हाहाकार मचा दिया है। मोदी सरकार की सुलह की सारी कोशिशें लगभग नाकामयाब रही हैं।  पाकिस्तान की गलत हरकतें रुक नहीं रही हैं , मोदी भी ये जानते हैं के लड़ाई से देश की तरक्की में बांधा आती है ,लेकिन युद्ध इस समय ज़रुरत बनता  जा रहा है। अच्छा ,ये जो मूर्खता पूर्ण रवैया पाकिस्तान दिखा रहा है , अगर ध्यान से देखें तो ये उसका अपना नहीं है , कई देश पाकिस्तान को मोहरा बना रहे हैं और पाकिस्तान के पास सिवाए उन देशों की जी हजुरी के दूसरा रास्ता भी नहीं है।  कंगाल देश ,गरीब जनता, अमीर नेता और ताकतवर अफसर ऐसे देश की हालत बद से बदतर होती ही जा  रही है इसमें कोई अचम्भा नहीं है।  लेकिन मोदी सरकार की तरक्की की दुहाई भी पाक सरकार के कानों में नहीं पड़ी तो  मतलब  साफ़  हैं वहाँ अब तर्रक्की या शान्ति से कुछ नहीं होने वाला।  लेकिन भारत की तरक्की के लिए शान्ति का बहुत महतब है इसीलिए  मोदी सरकार हथियारों से अधिक कूटनीत...

मोदी सरकार की सुरक्षा योजनाएं मुस्लिम भी ले सकते हैं फायदा

प्रधान मंत्री जनधन योजना  28 अगस्त 2014 को शुरू हुई थी और इस  का पहला चरण 14 अगस्त 2015 को समापत हो   चूका है।   जिसने भी इस योजना के तहत बैंक में खाता खुलवाया है उसको डेबिटकार्ड के साथ ही 1 लाख रूपय का दुर्घटना बीमा मिला है और जिन  26 जनवरी 2015 से पहले खाता खुलवाया था उनका  30  हज़ार का जीवन बीमा भी हुआ बिलकुल मुफ्त में।  अब दूसरा चरण शुरू हो चुका है इस योजना का 14 अगस्त 2015 से 14 अगस्त 2018 तक ये दूसरा चरण चलेगा।  आप सोच रहे होंगे के सिर्फ बैंक खाते ही तो खोलने हैं फिर इतना टाइम क्यों , तो मित्रो ज़रा रुकिए जब आप जनधन योजना के बारे में बिस्तार से समझेंगे तो आप कहेंगे इतने काम समय में इतना कुछ सम्भव नहीं हो सकता ,लेकिन मोदी है के मानता नहीं, मोदी को सारा काम इस थोड़े सेव समय में ही पूरा करना है।  आज़ादी से बाद हमारे मज़दूर या धियाड़ी दार या असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले भाई बहनो के परिवारों के लिए   कोई सुरक्षा चक्र नहीं बन पाया था , लेकिन अब सरकार ने देश करोड़ों मज़दूरों तथा उनके परिवारों को वित्तीय सुरक...

एक तरफ पाकिस्तान -लालू परसाद -नितीश -सोनीया -केजरी का महाठगबन्दन - दूसरी तरफ मोदी !

देश के अंदर किसी भी तरह से अस्थिरता लाना और बाहर पाकिस्तान का एटम बॉम्ब से धमकाना एक ही सिक्के के दो पहलु लगते हैं।  जिस तरह की भाषा नितीश -लल्लू -सोनिया -केजरी बोल रहे हैं उससे एक बात तो साफ़  है के मोदी सरकार को चारो तरफ से घेरने की तैयारी पूरी प्लानिंग के साथ हो रही है. आरक्षण का भूत जो पटेलों ,जाटों,गुज्जरों के सर चढ़ रहा है  उसमे घी/तेल डालने वाले महाठगबंधन की चांदी दिख  रही है। उधर रिटायर फौजियों का देश सेवा के बदले देश की आमदनी में हिस्सा मांगना या यूँ कहें माँ की सेवा का मुआबजा मांगना और फिर 1965 के युद्ध के 50 जीत उत्सव का बहिष्कार बताता है के देश के हालात बदतर बनाने की पूरी साजिश की गयी है। ये जो भी बारदातें  हो  रही हैं एक -दूसरे से बिलकुल  जुडी हुई हैं।  मोदी के प्रधान मंत्री बनने से सिवाये देश भक्तों के सभी दुखी थे और अमेरिका से लेकर चीन - पाकिस्तान आदि देश तो एक दम सदमे में पहुँच गए थे। मोदी सरकार द्वारा भूमि अधग्रहण बिल रोकना सही वक्त पर लिया गया सही फैसला है।  मोदी का  विधयक मुझे पसंद था लेकिन ...