"ना डरेंगे ना डराएंगे , ना झुकेंगे ना झुकाएँगे , आँख में आँख डाल कर हाथ मिलाएंगे - मोदी "
ये बात पहले सिर्फ भाषण बाज़ी ही लगते थे लेकिन मार्क ज़ुकरबर्ग की बॉडी लैंग्वेज देख कर महसूस हुआ के मोदी के शव्द सिर्फ भाषणो तक ही सीमित नहीं थे , मोदी ने अपने एक-एक शब्द को सच करके दिखाया है। यहाँ मै ये कते नहीं कह रहा के मार्क या अमेरिका को मोदी ने डरा दिया ,नहीं ,बल्कि मेरा बस इतना कहना है "भारत को भारत का असली गौरव दिलवा दिया" । मैं देख रहा था कैसे मार्क ज़ुकरबर्ग बार-बार पानी पी कर अपने स्ट्रेस को दवा रहा था। गूगल -फेसबुक -एप्पल आदि जितनी भी अमेरिकन कम्पनीज हैं ऐसा नहीं है के अब एक दम से भारत में पैसे की बरसात कर देंगे। लेकिन अब वे लोग भारत में आ कर मोदी की कथनी और करनी को ज़रूर देख सकेंगे। कांग्रेस एंड पार्टी ने भारत के प्रति पूरे विश्व में एक नकरात्मक छवि जो बना राखी थी , इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाली। पुरानी छवि ही क्यों ,जिस तरह की आज भी राजनीति के नए ढंग जो कांग्रेस अपना रही है उससे साफ़ हो रहा है के विदेशियों को तो मोदी खींच लाएंगे लेकिन कांग्रेस , केजरीवाल और शत्रुघ्न सिन्हां सरीके घर के भेदियों से मोदी को अच्छे ढंग से निपटना होगा ताकि भारत आनेवाले को एक भारत -नेक भारत ही दिखे ना के तेरा भारत या मेरा भारत।
मोदी के इस दौरे ने अमेरिकी समाज तथा व्यापारी वर्ग में खलबली मचा दी है , मानसिक रूप से तो ओबामा की नींद भी उड़ सकती है लेकिन मुझे मोदी की टैग लाइन याद है "सबका साथ सबका विकास " इस के अनुसार मोदी की उपस्थिति ओबामा को डराएगी नहीं , मोदी ने सभी देशों को भारत के सहयोगी के रूप में आह्वान किया है , प्रतिद्वंदी के रूप में नहीं। मोदी का अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों से रुवरु होना ,उन सभी प्रबासी भारतीओं को देश के प्रति उनके फ़र्ज़ याद दिलवाने का सबसे नायाब तरिका है। ये नए तरह की राजनीति है और कांग्रेस , केजरीवाल और लालू यादव को इतनी जल्दी ये समझ में नहीं आएगी। भारत के लोग अमेरिका में कमाल कर रहे हैं वहां पर कम्पनीज बनाते हैं और अमेरिका की इकॉनमी को सहायता करते हैं , अगर वे लोग भारत में अमेरिका जैसी सुबिधायें प्राप्त कर के अपना काम अपने देश में ही शुरू करें तो देश को बहुत फायदा होगा।
आतंकबाद पे दुनिया के दोहरे मापदंड को भी मोदी ने गलत करारा दिया और ओबामा को बोलना पड़ा है के अमेरिका आतंकबाद के खिलाफ दोस्तों के साथ खड़ा है। उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अमेरिका ने दो टूक शब्दों में पाकिस्तान से लश्कर तथा हक्कानी जैसे आतंकी संगठनो पे कार्यबाही की नसीहत दी है। ये छोटी-छोटी चीज़े ही मोदी की बड़ी कामयाबी का रास्ता बना देगी।
चाहे विरोधी माने या ना माने एक बात तो पकी है के मोदी ने देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने के लिए जान लड़ा दी है और विरोधियों की नींद चुरा ली है ,
कांग्रेसी पहले भारत में मोदी की रैल्लिओं में भीड़ पर जांच की मांग करते थे लेकिन अब तो आनंद शर्मा जैसे बूढ़े नेता अमेरिका में मोदी को सुनने आये हज़ारों लोगों की भीड़ पे भी प्रश्न करने लगे हैं हताशा और निराशा साफ़ झलकती है , लेकिन कुछ कर नहीं सकते अब रोने के सिवा।
भारत में विपक्ष का रोल एहम नहीं रह गया है , बीजेपी ने भी विपक्ष में रहते हुए गलतियां की थीं , लेकिन कॉंग्रेस्स आज अपने सबसे निचले स्तर पर आ गयी। "माँ ' पे राजनीति करके बेटा -दामाद पार्टी ने बिहार चुनावों में हार का रास्ता साफ़ कर लिया है। बटला हाउस में आतंकियों के मरने पे फुट -फुट कर रोने वाली सोनिया गांधी के नेता मोदी की "माँ " के लिए भाभुक्ता को ढोंग बता रहे हैं, यही लोकतंत्र की सुंदरता है।
ये बात पहले सिर्फ भाषण बाज़ी ही लगते थे लेकिन मार्क ज़ुकरबर्ग की बॉडी लैंग्वेज देख कर महसूस हुआ के मोदी के शव्द सिर्फ भाषणो तक ही सीमित नहीं थे , मोदी ने अपने एक-एक शब्द को सच करके दिखाया है। यहाँ मै ये कते नहीं कह रहा के मार्क या अमेरिका को मोदी ने डरा दिया ,नहीं ,बल्कि मेरा बस इतना कहना है "भारत को भारत का असली गौरव दिलवा दिया" । मैं देख रहा था कैसे मार्क ज़ुकरबर्ग बार-बार पानी पी कर अपने स्ट्रेस को दवा रहा था। गूगल -फेसबुक -एप्पल आदि जितनी भी अमेरिकन कम्पनीज हैं ऐसा नहीं है के अब एक दम से भारत में पैसे की बरसात कर देंगे। लेकिन अब वे लोग भारत में आ कर मोदी की कथनी और करनी को ज़रूर देख सकेंगे। कांग्रेस एंड पार्टी ने भारत के प्रति पूरे विश्व में एक नकरात्मक छवि जो बना राखी थी , इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाली। पुरानी छवि ही क्यों ,जिस तरह की आज भी राजनीति के नए ढंग जो कांग्रेस अपना रही है उससे साफ़ हो रहा है के विदेशियों को तो मोदी खींच लाएंगे लेकिन कांग्रेस , केजरीवाल और शत्रुघ्न सिन्हां सरीके घर के भेदियों से मोदी को अच्छे ढंग से निपटना होगा ताकि भारत आनेवाले को एक भारत -नेक भारत ही दिखे ना के तेरा भारत या मेरा भारत।
मोदी के इस दौरे ने अमेरिकी समाज तथा व्यापारी वर्ग में खलबली मचा दी है , मानसिक रूप से तो ओबामा की नींद भी उड़ सकती है लेकिन मुझे मोदी की टैग लाइन याद है "सबका साथ सबका विकास " इस के अनुसार मोदी की उपस्थिति ओबामा को डराएगी नहीं , मोदी ने सभी देशों को भारत के सहयोगी के रूप में आह्वान किया है , प्रतिद्वंदी के रूप में नहीं। मोदी का अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों से रुवरु होना ,उन सभी प्रबासी भारतीओं को देश के प्रति उनके फ़र्ज़ याद दिलवाने का सबसे नायाब तरिका है। ये नए तरह की राजनीति है और कांग्रेस , केजरीवाल और लालू यादव को इतनी जल्दी ये समझ में नहीं आएगी। भारत के लोग अमेरिका में कमाल कर रहे हैं वहां पर कम्पनीज बनाते हैं और अमेरिका की इकॉनमी को सहायता करते हैं , अगर वे लोग भारत में अमेरिका जैसी सुबिधायें प्राप्त कर के अपना काम अपने देश में ही शुरू करें तो देश को बहुत फायदा होगा।
आतंकबाद पे दुनिया के दोहरे मापदंड को भी मोदी ने गलत करारा दिया और ओबामा को बोलना पड़ा है के अमेरिका आतंकबाद के खिलाफ दोस्तों के साथ खड़ा है। उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अमेरिका ने दो टूक शब्दों में पाकिस्तान से लश्कर तथा हक्कानी जैसे आतंकी संगठनो पे कार्यबाही की नसीहत दी है। ये छोटी-छोटी चीज़े ही मोदी की बड़ी कामयाबी का रास्ता बना देगी।
चाहे विरोधी माने या ना माने एक बात तो पकी है के मोदी ने देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने के लिए जान लड़ा दी है और विरोधियों की नींद चुरा ली है ,
कांग्रेसी पहले भारत में मोदी की रैल्लिओं में भीड़ पर जांच की मांग करते थे लेकिन अब तो आनंद शर्मा जैसे बूढ़े नेता अमेरिका में मोदी को सुनने आये हज़ारों लोगों की भीड़ पे भी प्रश्न करने लगे हैं हताशा और निराशा साफ़ झलकती है , लेकिन कुछ कर नहीं सकते अब रोने के सिवा।
भारत में विपक्ष का रोल एहम नहीं रह गया है , बीजेपी ने भी विपक्ष में रहते हुए गलतियां की थीं , लेकिन कॉंग्रेस्स आज अपने सबसे निचले स्तर पर आ गयी। "माँ ' पे राजनीति करके बेटा -दामाद पार्टी ने बिहार चुनावों में हार का रास्ता साफ़ कर लिया है। बटला हाउस में आतंकियों के मरने पे फुट -फुट कर रोने वाली सोनिया गांधी के नेता मोदी की "माँ " के लिए भाभुक्ता को ढोंग बता रहे हैं, यही लोकतंत्र की सुंदरता है।

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