ये खबर भारत के मीडिया ने दवा दी , देश में कोई भी मुस्लिम जब देश प्रेम और भाई चारे की बात करता है तो उसे सम्पूर्ण उत्साह के साथ पूरा समर्थन और सम्मान मिलना चाहिए। भारत का दुर्भाग्य है के जनता को खवर पहुंचाने वाले खवर नफीस या तो कम्युनिस्ट माईंड / सोच के हैं या फिर बिकाऊ किसम के पत्रकार हैं , दोष इन लोगों का नहीं है , पत्रकारिता में इम्मान्दारी से काम करने वाले को तो गुज़ारे लायक पगार भी नहीं मिलती। अधिकतर लोग टी वी में चमकती हसीनाओं को खबरें देते देख कर सोच लेते हैं के पत्रकारों की तो बल्ले-बल्ले होती है लेकिन सच बहुत भयाभय और कड़वा है ,खैर इस मुद्दे पे कभी फिर बात करेंगे , तो मुसलमान अगर isis का झंडा उठाते हैं तब तो टी वी पर खूब बहस और खबर कई दिनों तक दिखाई जाती है ,लेकिन जब मुस्लिम लोग isis के खिलाफ झंडा उठाते हैं तो ये खबर , खबर ही नहीं बनती। इससे सिर्फ एक ही सन्देश जाता है के भारत का मीडिया खाता भारत का है लेकिन उस ही थाली में छेद भी कर रहा है जिसमे खता है। दुःख दायक है , परन्तु एक बात तो साफ़ हो गयी है के सोशल मीडिया ने पारम्परिक मीडिया की नाक में दम कर दिया है। लेकिन जो भी हो वो मुस्लिम संत -महात्मा बधाई योग्य हैं जिन्होंने बुराई को बुराई कहने की हिम्मत ही नहीं की बल्कि मुस्लिम समाज को उस बुराई से बचने की अपील भी की।
मुंबई इस्लामिक डिफेन्स साइबर सेल के अध्यक्ष अब्दुल रेहमान अनजारिया ने बताया है के 1050 से अधिक इस्लामिक विद्वान और धर्मगुरु आई एस
के खिलाफ फतवे ज़ारी किये हैं। देखना ये होगा के भारत के मुस्लिमो में isis के प्रति नफरत कितनी तेज़ी से फैलती है. लेकिन भारत के मीडिया द्वारा इस खबर को नज़रअंदाज़ करना गले नहीं उत्तर रहा।

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