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Showing posts from June, 2020

Why Most Of The Intelligent Students Ends In Disaster ?

हम जानते हैं कि मानव मस्तिष्क के तीन प्रमुख तत्व हैं जो मनुष्य को नियंत्रित करते रहते हैं अर्थात एक कड़ी में बाँध कर रखते हैं।   ये तीनो ही आपस में मिश्रित हैं और  किसी भी तत्व की कमी अन्य दो को भी निकम्मा कर देती है या फिर अन्य दो मिलकर तीसरे की कमी को पूरा कर लेते हैं। गाडी के तीन प्रमुख तत्व  इंजन , ईंधन तथा चालक सभी अलग -अलग  हैं। परन्तु मानव मस्तिष्क के तीन प्रमुख तत्व भावना  , बुद्धि और संकल्प शक्ति इकठ्ठे हैं तथा क्रिया -प्रतिक्रिया करके एक -दूसरे को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। मानलो एक पुस्तक आप ने खरीदी और पढ़ने बैठ गए। यदि पुस्तक आपको पसंद है तो आप बड़े मजे से आनंद लेते हुए पुस्तक पढ़ेंगे।  सबकुछ समझ भी आएगा और याद भी रह जायेगा। क्योंकि आपकी पुस्तक के प्रति भावना बहुत प्रबल है तो आप सारी पुस्तक जल्दी ही पढ़ कर ,समझ कर बहुत खुश हो जायेंगे । इसके विपरीत अगर पुस्तक के प्रति भाव अच्छे नहीं हैं ,रूचि नहीं है तो हो सकता है मज़बूरी में आपकी नज़रें पुस्तक पे हों लेकिन मन वहां नहीं होगा। आप तीव्र बुद्धि हैं परन्तु उस पुस्तक का विषय आपको समझ ही नही...

Importance of भावना ( feeling ) या अन्तः क्षोभ (emotion ) in human life and in success

भावना ( feeling ) या अन्तः क्षोभ (emotion ) दोनों शब्दों का अर्थ लगभग एक जैसा है हम पर्यायबाची के रूप में प्रयोग कर सकते हैं । सभी जीवों में कुछ स्वाभाविक मनोवृत्तियां होती हैं लाभ -हानि , सुख -दुःख ,भय , घृणा , झगड़ालूपन , नकल करना , सीखना , हंसना , संग्रह करना आदि। परिस्थिति के अनुसार कोई भी मनोभाव मनुष्य में उत्तेजना भर सकता है जो उसे कर्म के लिए ज़रूरी स्फूर्ति तथा बल के संचार में सहायक हो जाता है। जंगल में भय उत्पन होने से टाँगे शक्ति शाली हो जाती है परिणामस्वरूप जीव आत्मरक्षा के लिए जी -जान से पूरी ताकत के साथ दौड़ पड़ता है।  क्रोध से जो शक्ति संचार होता है , उसका उपयोग दुश्मन पर आक्रमण के रूप में होता है। ऐसे ही कोतुहल , आश्चर्य तथा और जानने की इच्छा ने नए -नए आविष्कार करवा दिए।निर्भर करता है की कब हमारे पर कोन सी भावना अपना अधिकार जमाये बैठी है। "जा की रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखि तिन तैसी" अब ये दोहा समझने में कोई कष्ट नहीं होगा।  जिस समय हम जिस भी भाव में होंगे संसार हमें वैसा ही प्रतीत होने लगता है , एक पल में ही हम महसूस करते हैं की दुनिया बहुत बुरी है सब मतलब...

Will Power/संकल्प शक्ति से सिद्धि / बहुत महीन अंतर है इच्छा और इच्छा शक्ति में।

संकल्प शक्ति से सिद्धि  या इच्छा शक्ति मन के क्रियात्मक उपयोग का तीसरा सबसे प्रमुख तत्व है। इसी के सहयोग से मनुष्य फैसला ले पाता है कि दिखाई दे रहे  इतने रास्तों में से किसे अपना कर्म पथ बनाना है , मन को एक लक्ष्य की और अभिकेंद्रित कर पाता है। संकल्प के आधार पर ही मनुष्य अपनी शक्ति तथा स्फूर्ति को कार्य रूप में बदल पाता है। मेहनत इसका स्वरुप तथा क्रिया इसका फल कही गयी है। मन रूपी घोड़े पर सवार के रूप में संकल्प ही बैठा होता है। जब कठिनाइयां रास्ते रोक लेती हैं , हताशा मन मोह लेती है और उत्साह की आग मंद होने लगती है , तब संकल्प ही तो मनुष्य को झूझने के लिए प्रेरित करता है। दृढ संकल्प मनुष्य को उत्साह से भर देता है ओर मन रूपी घोड़े को कर्म पथ पर बढ़ने की प्रेरणा दे कर उद्योग करने के लिए अग्रसर करवाता है। इस संसार के अधिकतर लोग जो परमात्मा से अच्छा मस्तिष्क ले कर आये हैं और संसार में कुछ कर गुजरने की इच्छा भी रखते हैं केवल संकल्प शक्ति के अभाव के कारण मन के लड्डू ही कहते रहते हैं या फिर बातों का हलवा बांटते रहते हैं लेकिन यथार्थ जीवन में कुछ भी कर नहीं पाते। बहुत महीन अंतर है इच्छा...

Mind Power- Intelligence,Recreational Mind , Meritorious And Imagination Above All Strong Will Power

जब हम मानसिक दक्षता की बात करते हैं तो सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है 'मन के बारे  में ज्ञान' अर्थात    मन रूपी  यंत्र विज्ञान की  जानकारी , उसके कलपुर्जों का ज्ञान और उनको उपयोग की बिधि सब पता होनी चाहिए । मन की क्रिया के  मुख्य तत्व क्या हैं उनको कैसे  काम में लाते  हैं इन प्रश्नों पर  विचार ज़रूरी हो जाता है।   कई विज्ञानिक मन को गाडी की उपमा देते हैं , उनके अनुसार जैसे गाडी को  चलाने में  कुछ प्रमुख तत्व महत्वपूर्ण हैं।   गाडी का रंग ,मखमली सीटें ,बैठने के लिए आरमदायक बड़ी जगह ये सब गाडी को चलाने में महत्व पूर्ण नहीं हैं , फिर क्या है जो सबसे अधिक ज़रूरी है ?  विचार करने पर तीन प्रमुख चीज़ें सामने आती हैं :-   1 इंजन 2 ईंधन 3 चालक  जितना शक्तिशाली इंजन उतनी उपयोगी गाडी , लेकिन सिर्फ इंजन से बात नहीं बनेगी ,इंजन चलाने के लिए ईंधन भी चाहिए होगा। दोनों हैं लेकिन चालक नहीं है तो सब बेकार।  चालक योग्य हो जो गाडी को नियंत्रित कर पाए। चालक हो तभी तो बड़ी गाडी का उपयोग कर पाएंगे।  ऐसे ही...

Mental Efficiency - Understand the Meaning and Steps To Improve

मानसिक दक्षता का अर्थ क्या है यह समझ लेना ही लक्ष्य प्राप्ति का सबसे पहला , सबसे बड़ा तथा सबसे कठिन कदम माना जाता है।  किसी भी काम में निपुणता के कम से कम चार   महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं :- 1 . शुद्धता / काम में पूर्णता / Perfectness :- काम सुचारु ढंग से किया जाये , काम करते समय भूल-चूक बहुत कम हो या बिलकुल ही न हो।  2 . समयाब्धि / काम करने की गति / Speed :- दिया गया काम कम से कम समय में पूरा हो।  3 . कम परिश्रम /थकाबट कम हो /Minimum Exhaustion :- काम करने के बाद कर्त्ता को बहुत कम थकाबट महसूस हो , उसे और काम करना पड़े तो कष्ट महसूस न करे। 4 . मौलिकता / Originality :- मौलिक मानसिक निपुणता आज के कॉपी पेस्ट संसार में भगवान् की नियामत है , निपुणता से  काम करने के साथ साथ कार्यकर्ता को नए विचार , नई युक्तियाँ आदि का प्रयोग करते रहना चाहिए।  हर प्रकार के काम में शुद्धता (Perfectness) तथा समय /चाल (Time ) दोनों ही परस्पर विरोधी जान पड़ते हैं  , बिना थके मौलकता के साथ काम सम्पूर्ण करना ये सभी अंग  कम लागत के विरुद्ध महसूस होते ह...

Stream Lining Of Energy Is Must / शक्ति के रास्ते के अबरोध हटाते रहो

अमेरिका के मनोचकित्सक विलियम जेम्स कहते थे " जितना होना चाहिए उसकी तुलना में हम केवल अर्ध जागृत हैं।  हम अपनी शारीरिक तथा मानसिक शक्तियों का बहुत थोड़ा भाग ही उपयोग में ला रहे हैं। मनुष्य की प्रगति जिस चरम सीमा तक पहुँच  सकती है उससे पहले ही रुक जाती है।  मनुष्य के पास भांति - भांति की शक्तियां होती हैं जिनका वह कभी उपयोग ही नहीं कर पाता। "                                                  इसको जरा अलग तरिके से समझिये , ध्यान दीजिये आधुनिक काल में इंजन चलित गाड़ियों , जहाजों आदि का प्रचलन पिछले 200 वर्षों में ही हुआ है , कारखानों की शुरुआत लगभग 200 वर्ष और पहले हुई थी।  भाप , कोयला , पैट्रोल ,डीजल , बिजली , हायड्रोजन आदि ईंधन के रूप में प्रयोग होते रहे हैं।  रोज नए शक्ति स्त्रोत खोजे जा रहे हैं लेकिन पुराने शक्ति स्त्रोतों का किफायती प्रयोग कैसे हो इसकी भी प्रतिदिन खोज जारी रहती है। नित्य प्रति प्रयोग होते हैं तांकि प्राप्त ऊर्जा भण्डार ...

सुनो सुनो सुनो ........ Improvement In Mantle Ability Is Possible

सुनो सुनो सुनो ........ मानसिक दक्षता में उन्नति संभव है !  मन में ये दुविधा या प्रश्न उठ सकता है कि ' क्या ईश्वर की प्रदान की हुई मानसिक शक्तियों की सम्पति  को बढ़ाना सम्भव है ?  सीधा सा साधारण सा उत्तर है - हाँ , सम्भव है ।  वैज्ञानिक अनुसन्धान तथा आध्यात्मिक अनुभव ये सिद्ध कर चुके हैं।  केवल सही तरिके से मस्तिष्क का प्रयोग करने से ही बहुत बढ़िया परिणाम मिल जाते हैं और कुछ तो  बाद में करने की आवश्यकता पड़ेगी । ये दक्षता और परिपक्वता प्राप्त करने के लिए कई आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक तरिके हैं।  देखिये मनोविज्ञान की तो शुरुआत ही इस संभावना को देखते हुए हुई है कि "मानसिक दक्षता बढ़ाना संभव है " अर्थात मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढाई जा सकती है यह तो विज्ञान भी डंके की चोट पे कहता है।   अधिकतर लोग अपनी मानसिक शक्तियों का पूरी उम्र उपयोग ही नहीं कर पाते परिणामस्वरूप वे शक्तियां सुषुप्त अवस्था में पड़ी रहती हैं।  अगर मनुष्य थोड़ी सी  सजगता का प्रयोग करे तो उन शक्तियों के भण्डार अपने लिए खोल सकता है। मनुष्य अगर अपनी ...

विचार खतरनाक हो सकते हैं ! Thoughts Can Be Destructive

विचार खतरनाक हो सकते हैं अनजाने में आपके विचार आपको ही आपके लक्ष्य से दूर कर सकते हैं।  बड़े ध्यान से विचारों की खेती करिये तांकि आप लक्ष्य प्राप्त कर सकें।   आपके विचार सकारात्मकता से भरे होने चाहिए , कुछ एक उदाहरण आपके लिए लिख रहे हैं 1 . आप बहुत अच्छे हो सकते है , कोई फर्क नहीं पड़ता आज आपकी स्थिति क्या है। 2 . आज ही शुरुआत करें और फिर कभी न रुकें। 3 . आपके अंदर महान योग्यताएं हैं , जिनका आपको खुद को भी ज्ञान नहीं है तो उनके प्रयोग से भी आप बंचित हैं इसलिए उनको पहचान कर उनको निखारने की शुरुआत करें।   4 . अपने-आप से ईमानदार रहें अगर यह कर पाए तो भविष्य में कभी पछताना नहीं पड़ेगा। 5 . अपने अंदर की आवाज़ पर विश्वास करें , अगर आपका अन्तःकरण आपको किसी से दूर रहने के लिए कहता है तो वैसा ही करें। 6 . अपने सपनों पर विश्वास रखें , यही तो वे ताकतवर विचार हैं जो आपको भाग्य निर्माण की और ले जा रहे हैं। 7 . अपने दैनिक काम में नियमितता रखें , अपने लक्ष्य को उनके साथ संजोयें यहीं से रास्ते बनेंगे। 8 . आपके भूतकाल का ...

साधारण मनुष्य असाधारण योग्यतांए प्राप्त कर सकता है

प्रत्येक कार्य आरम्भ में सिर्फ एक अदृश्य विचार ही होता है मतलब अगर सोचने  भी  हो तो बुद्धिमानी से ही सोचो , अर्थात ऐसे ही कुछ भी नहीं सोचना , सोचना भी कला है क्योंकि जैसा हम सोचते हैं हम वैसे ही हो जाते हैं और हमारे साथ वैसा ही हो जाता है।  याद रखो हर काम सबसे पहले मन में उत्पन्न होता है , इसलिए मन को विकसित करने का सीधा सा अर्थ है उत्तम फल या परिणाम को निश्चय करके प्राप्त करना।  मानसिक कार्यक्षमता बढ़ाना या बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील होना हर मनुष्य का कर्तव्य भी है और अधिकार भी। याद रखो संसार में मनुष्य का अस्तित्व सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि उसने अपने मस्तिष्क के विकास के लिए क्या किया।  सभी महांपुरषों , व्यापार , राजनीति ,खेल जगत के  सफलतम लोगों तथा साधारण मनुष्य में बस यही तो फर्क है और अटल सत्य है ,कि ये फर्क जितना मर्जी बड़ा हो इसे दूर किया जा सकता है इसे मिटाया जा सकता है।  साधारण मनुष्य असाधारण योग्यतांए प्राप्त कर सकता है केवल एक ही शर्त है " अपने मस्तिष्क को अच्छे ढंग से काम में लगाने का गुर सीख ले  "   . इस आर्टिक...

Uses of Tulsi, Tulasi, Holy Basil

Name - Tulsi, Tulasi, Holy Basil. Latin Name - Ocimum Sactum Linn Pennel  In Ayurved and in Indian Spiritual World Tulsi is known as Holy Herb. Tulsi grows through out India. Even as an indoor sacred plant and in kitchen gardens as well. It is holy herb but also the first option for the treatment of respiratory problems, skin diseases and digestive problems. Along with these ordinary diseases Tulsi is known as Immunol modulator i.e. helps to improve immune system ,anticancer and Cytoprotective i.e. it protects cells from noxious chemicals.    Following are the medicinal uses of Tulsi  Keeps Heart Healthy Tulsi contains antioxidants like eugenol  which reduces cholesterol level in blood. It also protects heart from harmful free radicals. Skin Tulsi contains Vitamin C,phytonutrients and Vitamin A . These protects skin damage by free radicals and plays s an  anti-aging agent. Uric Acid Treatment Tulsi acts as a diuretic agent and de...

ग्रीन कॉफ़ी / green coffee

ग्रीन चाय की बात अब पुरानी हो गयी है क्योंकि अब नए ज़माने में रंग जमा चुकी है "ग्रीन कॉफ़ी" .  ग्रीन कॉफ़ी वही पुरानी कॉफ़ी है परन्तु  अपने प्राकृतिक रूप में। कॉफी के दानों का असली रंग हरा ही होता है लेकिन इसे भूनने पर इसका रंग हल्का भूरा  या चॉकलेट जैसा हो जाता है निर्भर करता है कितने तापमान पर कितनी देर दाने भुने गए हैं। किसी भी दाने को अगर आप भूनते हैं तो उसके अघिकतर प्राकृतिक गुण नष्ट हो जाते हैं, यही कॉफ़ी के दानों के साथ भी हुआ।  ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड नाम का  एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। भुनी हुई कॉफी में इसकी मात्रा बहुत कम रह जाती है।  क्लोरोजेनिक एसिड  शरीर में पाचन प्रक्रिया को चुस्त - दरुस्त करता है परिणाम स्वरुप भोजन का पाचन सही ढंग से होता है और शरीर में से अपशिष्ट पदार्थ पूरी तरह से बाहर निकलते हैं और शरीर में चर्बी  जमने ही नहीं देते।  अनचाही चर्बी जब शरीर में नहीं होगी तो कोलेस्ट्रॉल भी नहीं बढ़ेगा अर्थात रक्त बाहिकाओं में रक्त परिवहन का मार्ग अव्रुद्ध नहीं होगा मतलब मोटापा , ब्लड प्रेशर , हिर्दय के रोग ,...

वीर्य और बल में वृद्धि के देसी नुस्खे

गेहूं के आटे का हलवा :- गेहूं का आटा ,घी ,चीनी तथा गऊ दूध के प्रयोग से बनाया गया हलवा वीर्यबर्धक होता है। ध्यान रहे जिस गऊ के बछड़े बड़े हो गए हों उसके दूध के प्रयोग का असर ज्यादा होता है शतावर्यादि चूर्ण :- शतावर ,नागबला ,विदारीकंद ,गोखरू ,आम्बले के सूखे फल इन पाँचों को अलग -अलग चूर्ण करके घी में पका कर चीनी डाल कर रोज सेवन करने से वीर्य और बल में वृद्धि होगी। मुसलयादि चूर्ण :- सफेद मूसली  ,मखाने  ,गोखरू  सम भाग लेकर चूर्ण बनाएं। दूध में पका कर चीनी डाल कर रख लें।  प्रतिदिन सवेरे सेवन करें। शतावरआदि योग :- शतावर ,गोखरू,अश्वगंध, पुनर्नवा ,नागबला तथा सफेद मूसली के चूर्ण को गौ घृत में पका कर चीनी मिला कर योग त्यार कर लें। इसके सेवन से वीर्य दुर्बलता ख़त्म होती हो। विदारिकन्द चूर्ण :- विदारिकन्द चूर्ण को उदुंबर फल /गूलर के फल जितनी मात्रा में घी में मिला कर दूध के साथ खाने से किसी भी तरह की कमज़ोरी दूर होती  है तथा वीर्य में वृद्धि होती है। गोक्षरु चूर्ण :- गोक्षरु चूर्ण को बकरी के दूध में पका करके ठंडा करके शहद मिला कर पीने से नपुंसकता भी नष्ट हो जा...