जब हम मानसिक दक्षता की बात करते हैं तो सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है 'मन के बारे में ज्ञान' अर्थात मन रूपी यंत्र विज्ञान की जानकारी , उसके कलपुर्जों का ज्ञान और उनको उपयोग की बिधि सब पता होनी चाहिए। मन की क्रिया के मुख्य तत्व क्या हैं उनको कैसे काम में लाते हैं इन प्रश्नों पर विचार ज़रूरी हो जाता है।
कई विज्ञानिक मन को गाडी की उपमा देते हैं , उनके अनुसार जैसे गाडी को चलाने में कुछ प्रमुख तत्व महत्वपूर्ण हैं। गाडी का रंग ,मखमली सीटें ,बैठने के लिए आरमदायक बड़ी जगह ये सब गाडी को चलाने में महत्व पूर्ण नहीं हैं , फिर क्या है जो सबसे अधिक ज़रूरी है ?
विचार करने पर तीन प्रमुख चीज़ें सामने आती हैं :-
1 इंजन
2 ईंधन
3 चालक
जितना शक्तिशाली इंजन उतनी उपयोगी गाडी , लेकिन सिर्फ इंजन से बात नहीं बनेगी ,इंजन चलाने के लिए ईंधन भी चाहिए होगा। दोनों हैं लेकिन चालक नहीं है तो सब बेकार। चालक योग्य हो जो गाडी को नियंत्रित कर पाए। चालक हो तभी तो बड़ी गाडी का उपयोग कर पाएंगे।
ऐसे ही मन रूपी यंत्र को चलाने के लिए भी तीन प्रमुख तत्व जो ईंधन रूप माने जाते हैं :-
1 जन्म से प्राप्त मानसिक योग्यता /शक्ति या कहें मानसिक प्रकृति।
2 मानसिक शक्ति से काम लेने की उत्साह से भरपूर भावना
3 संकप्ल शक्ति / इच्छा शक्ति या कहें कि काम करने का दृढ़निश्चय।
ये तीन चीज़ें मनुष्य की सफलता और असफलता का निर्माण करती हैं। यही मनुष्य के जीवन का सफर तय करते हैं और फिर अंजाम तक पहुंचाते हैं।
इन तीनों में सबसे पहला स्थान है मन की प्राकृतिक शक्ति का है जो हमें जन्म से मिलती है इसे स्वाभाव भी कह देते हैं , यह गाडी के इंजन की तरह है। कई गाड़ियां बड़े इंजन वाली होती हैं तो कई छोटे , ऐसे ही जन्मजात मानसिक योग्यता या गुण सभी मनुष्यों की शक्ति को एक- दूसरे से अलग कर देती है। मन की प्राकृतिक या जन्मजात शक्तियों में प्रमुख होती हैं
1 समझने की शक्ति जिसे बुद्धि / intelligence भी कह देते हैं
2 नए विचार पैदा करने की शक्ति REWORKING/Recreational Mind
3 मेधा शक्ति ( meritorious) जिसे धारणा-शक्ति बातें याद रखने की शक्ति भी कह देते हैं
4 कल्पना शक्ति जिसे imagination भी कहते हैं
प्रकृति का नियम देखिए किसी पास भी ये शक्तियां बराबर मात्रा में नहीं रहती , खुद जांच करेंगे तो इस सत्य को जान लेंगे। हर मनुष्य अलग -अलग मात्रा में इन गुणों को ले कर जी रहा है और जिसके पास जन्मजात गुण अधिक होंगे मानसिक शक्तियां ज़्यादा होंगी वह जीवन में आसानी से सफल भी हो जायेगा।
अब प्रश्न उठता है - क्या मानसिक दक्षता का सर्वस्व दारोमदार सिर्फ प्राकृतिक शक्तियों पर ही निर्भर है ?
क्या मानव का सफल और असफल होना सिर्फ इन जन्म से प्राप्त शक्तियों पर ही निर्भर है ?
उत्तर में बस एक ही शब्द जो सटीक बैठता है - नहीं।
संसारिक अनुभव बताते हैं कि दृढ संकल्प वाले कम बुद्धि के लोग भी संसार में अपार सफलता और यश पा लेते हैं और कई जन्मजात बुद्धिमान अपनी शक्ति का उपयोग नहीं कर पाते परिणाम स्वरुप जीवन की दौड़ में पीछे रह जाते है, अर्थात बिना दृढ इच्छा शक्ति के प्राकृतिक शक्तियां भी मनुष्य को सफलता नहीं दिलवा पाती।
https://youtu.be/Z7mrUIy3Vfs
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