मानसिक दक्षता का अर्थ क्या है यह समझ लेना ही लक्ष्य प्राप्ति का सबसे पहला , सबसे बड़ा तथा सबसे कठिन कदम माना जाता है। किसी भी काम में निपुणता के कम से कम चार महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं :-
1 . शुद्धता / काम में पूर्णता / Perfectness :- काम सुचारु ढंग से किया जाये , काम करते समय भूल-चूक बहुत कम हो या बिलकुल ही न हो।
2 . समयाब्धि / काम करने की गति / Speed :- दिया गया काम कम से कम समय में पूरा हो।
3 . कम परिश्रम /थकाबट कम हो /Minimum Exhaustion :- काम करने के बाद कर्त्ता को बहुत कम थकाबट महसूस हो , उसे और काम करना पड़े तो कष्ट महसूस न करे।
4 . मौलिकता / Originality :- मौलिक मानसिक निपुणता आज के कॉपी पेस्ट संसार में भगवान् की नियामत है , निपुणता से काम करने के साथ साथ कार्यकर्ता को नए विचार , नई युक्तियाँ आदि का प्रयोग करते रहना चाहिए।
हर प्रकार के काम में शुद्धता (Perfectness) तथा समय /चाल (Time ) दोनों ही परस्पर विरोधी जान पड़ते हैं , बिना थके मौलकता के साथ काम सम्पूर्ण करना ये सभी अंग कम लागत के विरुद्ध महसूस होते हैं परन्तु ये सभी एक दूसरे के सहायक हैं।
एक व्यक्ति जो 10 वीं कक्षा पास है लेकिन उसे कक्षा 5 का गणित नहीं आता है , हिंदी अच्छे ढंग से पढ़ और समझ नहीं सकता तो वह अपनी अर्जित शिक्षा का जीवन में उपयोग ही नहीं कर पायेगा , दूसरी और एकव्यक्ति 5 वीं कक्षा तक ही पढ़ा है लेकिन 5 वीं तक की सारी पढ़ाई उसे समझ आई है भाषा का अच्छा ज्ञान है तथा गणित भी बिलकुल समझा है , वह आसानी से शिक्षा का प्रयोग जीवन में कर पायेगा। ऊपर लिखित चारों गुण जाने -अनजाने किसी के भी जीवन में हो कभी भी जीवन में उतरें हो उसकी सफलता निश्चित ही है।
मानसिक दक्षता बढ़ाना सभी का लक्ष्य होना चाहिए या फिर कहें कि परम कर्तव्य मानना चाहिए। जीवन में सुख- समृद्धि ,सफलता तथा सम्मान प्राप्त करने का यही श्रेष्ठ मार्ग है। मानसिक दक्षता के प्रयासों से मानसिक शक्तियों का विस्तार तो होगा ही साथ ही शरीर को भी स्वस्थ बनाये रखने में सहायता होगी।
सामाजिक , पारिवारिक तथा नैतिक दवाबों के बीच हमे तारतम्य बिठाते हुए यह काम करना है। हम सिर्फ अपनी मानसिक दक्षता को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं न तो दिन लम्बा कर सकते हैं न ही रात , समय सभी के पास उतना ही होगा। अतः ये हमारे लिए और भी आवश्यक है की एक एक क्षण का सदुपयोग करें। विज्ञानिक मानते हैं कि हम अपने सामर्थ्य का बहुत बड़ा अंश बिना बजह ही व्यर्थ गंवा देते हैं। उपरोक्त गुणों को आत्म सात करके हम अपने मस्तिष्क की शक्ति को और बढ़ा सकते हैं काम करने की शक्ति को और फल दाई बना सकते हैं
सामाजिक , पारिवारिक तथा नैतिक दवाबों के बीच हमे तारतम्य बिठाते हुए यह काम करना है। हम सिर्फ अपनी मानसिक दक्षता को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं न तो दिन लम्बा कर सकते हैं न ही रात , समय सभी के पास उतना ही होगा। अतः ये हमारे लिए और भी आवश्यक है की एक एक क्षण का सदुपयोग करें। विज्ञानिक मानते हैं कि हम अपने सामर्थ्य का बहुत बड़ा अंश बिना बजह ही व्यर्थ गंवा देते हैं। उपरोक्त गुणों को आत्म सात करके हम अपने मस्तिष्क की शक्ति को और बढ़ा सकते हैं काम करने की शक्ति को और फल दाई बना सकते हैं
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