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Showing posts from July, 2017

देश के युवा सार्थक प्रयास करने लगे है उन्हें प्रोत्साहन चाहिए मोदी जी / Youth Is Waiting - Modi ji

 पिछले वर्ष हनुमंतप्पा समेत मद्रास रजिमेंट के 10 सैनिक सियाचिन ग्लेशियर में अकस्मात हिमस्खलन का शिकार हो गए ,उनको ढूंढने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय लगा। बहुत दुःख की बेला थी लेकिन हमारे पास आधुनिक तकनीक ही उपलभ्ध नहीं थी। परम्परागत तरीके से खोजने में सबसे ज्यादा समय लगा हजारों टन बर्फ के नीचे दबे सैनिकों का पता लगाने में। प्रयोग में लाये जा रहे मेटल तथा थर्मल सेंसर्स वाले ग्राउंड राडार अच्छे परिणाम नहीं दे रहे थे। अगर तो दबने वाले के पास कोई मेटल /धातु है तब तो इसके प्रणाम सही आ जाते हैं वरना उम्मीद पूरी नहीं होती। अधिकतर भारतीय इस त्रासदी पे अफ़सोस करके तथा भगवान को दोष दे कर भूल गए लेकिन बेंगलुरु के सी एम् आर तकनिकी संस्था के कुछ छात्रों को इस घटना ने झकझोर दिया और उन्हें नया  तथा  बढ़िया उपकरण  ढूंढने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने ऐसी तकनीक खोजने की कोशिश की जिसे  काम करते समय मेटल या तापमान पर निर्भर न रहना पड़े। उनके द्वारा बनाये गए उपकरण मॉडल तैयार हो चूका है ,ये उपकरण बर्फ  के नीचे दवे जीव को डाइइलेक्ट्रिक कंस्टंट की सहायता ...

डिप्रेशन से मुक्त जीवन आपका हक़ है इसे प्राप्त करने के लिए योग करे / Overcome Depression With Yog & Pranyaam

डिप्रेशन या मानसिक अबसाद , ये बिमारी पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी चनौती  बन कर उभरी है।  पूरी दुनिया में जहाँ ये रोग तेज़ी  से बढ़ रहा है तो भारत भी इस से अछूता नहीं है।  भारत में डिप्रेशन का बढ़ना बहुत खतरनाक है क्योंकि भारत में जनसँख्या बहुत अधिक है लेकिन मनोरोग विशेषज्ञों की संख्या बहुत कम है।  इस भयाभये स्थिति में 'योग -प्राणायाम ' पूरी दुनिया के लिए आशा की किरण बनके उभरा है।  सुबह -सवेरे शौच से निवृत हो कर सिर्फ साँसों का ही तो प्रयोग है।  हमारे शरीर में जीतनी अधिक ऑक्सीजन होगी सवास्थ्य उतना ही अच्छा होगा।  धर्म या जाति का बिमारी फरक नही करती फिर हम इलाज में फरक क्यों करें ? प्राणायाम तथा योग खुद तो करना ही है अपने परिवार तथा बच्चों को भी करवाना शुरू करें ,क्योंकि आजकल डिप्रेशन के शिकार होने वालों में महिलाएं तथा बच्चों की संख्या भी बहुत बढ़ रही है। भगवान् ने जिसकिसी को भी इस दुनिया में भेजा है उसे खुश रहने का सारा सामान साथ ही भेजता है चाहे इंसान हो या जानवर , फिर हम उदास या डिप्रेस क्यों रहें ? सच बात तो ये है कि उदासी बाहर से भीतर आत...