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Karan Thapar Exposed / जेहादी मीडिया देश का दुश्मन बन गया है?

शब्दों का मोह पाश भी बड़ा अजीब है और अगर शब्द अंग्रेजी पत्रकार के हों तब तो शब्दों के प्रभाव में बजन अपने आप आ जाता है।  आज की पंजाब केसरी अखबार में एक लेख पढ़ा लेखक अंतर्राष्ट्रीय अंग्रेजी पत्रकार हैं नाम  'करण थापर ' . बहुत ही उत्कृष्ट पत्रकार रहे हैं ये , इनके शब्दों के चुनाब से बहुत से पाठक  इतने प्रभाभित होते हैं के इनके शव्दों को "भगवान के शब्द " माना जाता है। खैर , JNU प्रकरण ने बहुत कुछ साफ़ किया है।  आज़ादी के बाद से भारत की मीडिया पर एक विशेष विचारधारा का अधिपत्य रहा है , ये बात भी मुझे तथा आप सभी को JNU प्रकरण के बाद ही पता चली। जिन मीडिया वालों के प्रभाव और योग्यता के हम वर्षों  से कायल रहे, उनकी "गुप्त विचारधारा" का साक्षातकार हुआ।  कर्ण थापर भी उन छदम  ज़मात के निकले।   कन्हैया कुमार ने देश विरोधी नारे लगाये भी और लगवाए भी लेकिन करण थापर के शब्द कन्हैया के लिए जो प्रयुक्त हुए हैं ध्यान से पढियेगा - "वह छोटे से और गठीले कद का व्यक्ति है जो बिलकुल ही आपके लिए किसी प्रकार की चुनौती होने का आभास नहीं देता। उसके चेहर...

Change in American Attitude is Due to Modi Sarkar/ अमेरिका में भारत की बल्ले-बल्ले

"भारत अब खड़ा हो रहा है ,  देखा था कभी गिडगडाते हुए ,  अब दहाड़ने लगा है देश मेरा बड़ा हो रहा है , गरीबी -ग़ुरबत ही मुद्दा थी कभी , अब काज  और व्याज से  व्यपार हो रहा है ,  देश मेरा नहीं सो रहा है। कभी विदेशों के आगे चम्पी करते थे देश के नेता ,  आज आँख में आँख डालकर राज हो रहा है ,  सच्ची बात है भारत अब खड़ा हो रहा है। मेहनत करने वालों को रस्ते नहीं थे बढ़ने के ,  आज छोटा सा बच्चा भी जहाज ढूंढ रहा है , सच में देश विज्ञान मय हो रहा है , जन - जन का कल्याण हो रहा है ,  देश से कूड़ा साफ़  रहा है क्योंकि अब भारत महान हो रहा है। " एक बात तो माननी पड़ेगी के नरेंदर मोदी की मेहनत साफ़ दिखती है , साधारण जनता मुहं भर के मोदी की तारीफ़ कर रही है लेकिन एक कमी तो है 'भूमि बिल ' के बारे में सच जनता तक पहुंचाने में मोदी के इलावा कोई बीजेपी नेता आगे नहीं आया।  शत्रुघ्न सिन्हां सरीखे नेता जो नितीश और केजरीवाल तथा लल्लू यादव के तलवे चाटने में गुरेज़ नहीं करते   स्वयम ज़िमेदारी ले कर देश हित में भूमि बिल के फायदे बताने आगे नहीं आये...

मोदी सरकार के लिए बदलाब कठिन है नामुमकिन नहीं

पर्यावरण के विषय में   काफी बातें और योजनाएं तैयार हो रही हैं।  सुनने में आ रहा है केंद्र सरकार अब जंगलों की देख रेख प्राइवेट कंपनियों या संस्थाओं के हाथ देने वाली है ,ऐसी सुगबुगाहट सुनने को मिल रही है। देखा जाए तो सरकार के पास बिकल्प हैं भी नहीं।  वन विभाग जो वनों को बचाने की सोच के साथ बनाया गया था , वनों को काटने या यूँ कहें लूटने का सबसे बड़ा विभाग बन गया है।  हम देश के किसी भी हिस्से में चले जाएँ आज लोग अपने निजी फायदे को ही सर्वोपरि रख रहे हैं , यही हाल सरकारी अधिकारियों का भी है तो उनको भी गलत नहीं कहा जा सकता क्योंकि समाज का प्रभाव ही तो उन पर पड़ा है। कल ही एक सेवा निवृत मुख्याध्यापक जी से बात हो रही थी उन्होंने बताया के शिमला हाई कोर्ट में किसी केस के सिल सिले में गया हुआ था तो वकीलों के साथ बात चल पड़ी , शाम का समय  था महफ़िल में नशे का सुरूर चढ़ने लगा था , एक वकील साहेब मेरे मुरीद हो गए और नज़दीक आकर बोले "हेडमास्टर साहेब आप केस जीत सकते हैं , आजकल जो जज हाई कोर्ट में है उसे लड़कियों का शौक है इधर उसके पास लड़की पहुंची उधर आप केस जीत गए।  एक...

क्या ये हिम्मत बीजेपी के कार्यकर्ता दिखाएँगे ?

मोदी सरकार देश की सुरक्षा को लेकर बहुत ही संजीदा है , इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी बात को और पुख्ता करता है  हेरान टीपी ड्रोन खरीदने के प्रस्ताब को गुपचुप ढंग से पास करना।  40 करोड़ डॉलर की ये डील भारत की सेनाओं को बहुत सहायक होने वाली है।  अच्छा ये भी खूब रही हम सभी ये भी चाहते हैं के ऐसे और हथियार भारत सरकार ख़रीदे जिससे सेना ताकतवर बने लेकिन दूसरी तरफ मुफ्त में सुबिधायें चाहियें, पेंशने भी बढ़ा दी जाएँ , सैलरी भी बढाई  जाये , टैक्स भी कम हो जाए , सड़कें भी बने ,नए काम हों आदि आदि। लेकिन क्या ये सब इतना आसान है ? क्या हर किसी को देश हित के लिए कुछ त्याग नहीं करना चाहिए ? अब पेट्रोल -डीज़ल के दाम काफी नीचे आये हैं लेकिन ट्रकों -बसों -टैक्सियों के किराए कम नहीं हुए ,क्यों ? क्या ये भी मोदी के डंडे से ही सम्भव है क्या? अगर सरकार डंडे का उपयोग करेगी इन छोटी-छोटी चीज़ों के लिए तो फिर और काम कब होंगे। सिर्फ बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता ही अगर ईमानदारी से अपना काम देश हित में दो साल के लिए करें तो भारत सफलता की आवरत लिख सकता है , अब ...

मोदी सरकार की सुरक्षा योजनाएं मुस्लिम भी ले सकते हैं फायदा

प्रधान मंत्री जनधन योजना  28 अगस्त 2014 को शुरू हुई थी और इस  का पहला चरण 14 अगस्त 2015 को समापत हो   चूका है।   जिसने भी इस योजना के तहत बैंक में खाता खुलवाया है उसको डेबिटकार्ड के साथ ही 1 लाख रूपय का दुर्घटना बीमा मिला है और जिन  26 जनवरी 2015 से पहले खाता खुलवाया था उनका  30  हज़ार का जीवन बीमा भी हुआ बिलकुल मुफ्त में।  अब दूसरा चरण शुरू हो चुका है इस योजना का 14 अगस्त 2015 से 14 अगस्त 2018 तक ये दूसरा चरण चलेगा।  आप सोच रहे होंगे के सिर्फ बैंक खाते ही तो खोलने हैं फिर इतना टाइम क्यों , तो मित्रो ज़रा रुकिए जब आप जनधन योजना के बारे में बिस्तार से समझेंगे तो आप कहेंगे इतने काम समय में इतना कुछ सम्भव नहीं हो सकता ,लेकिन मोदी है के मानता नहीं, मोदी को सारा काम इस थोड़े सेव समय में ही पूरा करना है।  आज़ादी से बाद हमारे मज़दूर या धियाड़ी दार या असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले भाई बहनो के परिवारों के लिए   कोई सुरक्षा चक्र नहीं बन पाया था , लेकिन अब सरकार ने देश करोड़ों मज़दूरों तथा उनके परिवारों को वित्तीय सुरक...

एक तरफ पाकिस्तान -लालू परसाद -नितीश -सोनीया -केजरी का महाठगबन्दन - दूसरी तरफ मोदी !

देश के अंदर किसी भी तरह से अस्थिरता लाना और बाहर पाकिस्तान का एटम बॉम्ब से धमकाना एक ही सिक्के के दो पहलु लगते हैं।  जिस तरह की भाषा नितीश -लल्लू -सोनिया -केजरी बोल रहे हैं उससे एक बात तो साफ़  है के मोदी सरकार को चारो तरफ से घेरने की तैयारी पूरी प्लानिंग के साथ हो रही है. आरक्षण का भूत जो पटेलों ,जाटों,गुज्जरों के सर चढ़ रहा है  उसमे घी/तेल डालने वाले महाठगबंधन की चांदी दिख  रही है। उधर रिटायर फौजियों का देश सेवा के बदले देश की आमदनी में हिस्सा मांगना या यूँ कहें माँ की सेवा का मुआबजा मांगना और फिर 1965 के युद्ध के 50 जीत उत्सव का बहिष्कार बताता है के देश के हालात बदतर बनाने की पूरी साजिश की गयी है। ये जो भी बारदातें  हो  रही हैं एक -दूसरे से बिलकुल  जुडी हुई हैं।  मोदी के प्रधान मंत्री बनने से सिवाये देश भक्तों के सभी दुखी थे और अमेरिका से लेकर चीन - पाकिस्तान आदि देश तो एक दम सदमे में पहुँच गए थे। मोदी सरकार द्वारा भूमि अधग्रहण बिल रोकना सही वक्त पर लिया गया सही फैसला है।  मोदी का  विधयक मुझे पसंद था लेकिन ...

Modi Sarkar Under Attack / मोदी सरकार घिर गयी है चक्रवूह में

आरक्षण के नाम पर देश में अस्थिरता लाने का माहोल बनता दिख रहा है।  उधर आज लालूयादव ने बता भी दिया के  बिहार  का महगढ़बंधन 'मंडळ -2 ' है , जी हाँ एक मंडल कमीशन  1990 में वी पी सिंह लेकर आये थे और दूसरा मंडल अब लालू लेकर आ रहे हैं  बिहार मे। दिल्ली की जनता को मुफ्त सामान चाहिए था केजरीवाल जीत कर मुख्यमंत्री बना दिए और अब बिहार में भी कमोवेश बही माहोल बनाया जा रहा है के मुफ्त और अफवाह फैलाओ , साथ ही हार्दिक पटेल के रूप में एक नया नेता बिपक्ष का पक्ष रखने के लिए आ गया है।  आरक्षण से पटेलों का रक्षण करने की बात करने वाले ने जाट और गुज्जर जातियों को अपने साथ आने का न्योता दिया है क्योंकि ये दोनों जातियां भी गरीब हैं और आरक्षण का रक्षण ही इन दोनो जातियों के अस्तितब को बचा  सकता है।  अच्छा ये भी मज़ेदार बात है के जो सैनिक देश पर मरने मिटने की बात करते थे आज पैसे के लिए इतने अंधे हो गए हैं के 1965 युद्ध की 50 वीं बर्षगांठ भी नहीं मनाना चाहते।  भूतपूर्व सैनिको का ये व्यबहार भी देश से गदारी के बराबर ही माना जाना चाहिए।  और जब देश का फौजी ही पैसे...