शब्दों का मोह पाश भी बड़ा अजीब है और अगर शब्द अंग्रेजी पत्रकार के हों तब तो शब्दों के प्रभाव में बजन अपने आप आ जाता है। आज की पंजाब केसरी अखबार में एक लेख पढ़ा लेखक अंतर्राष्ट्रीय अंग्रेजी पत्रकार हैं नाम 'करण थापर ' . बहुत ही उत्कृष्ट पत्रकार रहे हैं ये , इनके शब्दों के चुनाब से बहुत से पाठक इतने प्रभाभित होते हैं के इनके शव्दों को "भगवान के शब्द " माना जाता है। खैर , JNU प्रकरण ने बहुत कुछ साफ़ किया है। आज़ादी के बाद से भारत की मीडिया पर एक विशेष विचारधारा का अधिपत्य रहा है , ये बात भी मुझे तथा आप सभी को JNU प्रकरण के बाद ही पता चली। जिन मीडिया वालों के प्रभाव और योग्यता के हम वर्षों से कायल रहे, उनकी "गुप्त विचारधारा" का साक्षातकार हुआ। कर्ण थापर भी उन छदम ज़मात के निकले। कन्हैया कुमार ने देश विरोधी नारे लगाये भी और लगवाए भी लेकिन करण थापर के शब्द कन्हैया के लिए जो प्रयुक्त हुए हैं ध्यान से पढियेगा -
"वह छोटे से और गठीले कद का व्यक्ति है जो बिलकुल ही आपके लिए किसी प्रकार की चुनौती होने का आभास नहीं देता। उसके चेहरे पर मासूमियत और सोहार्द्य की भावना अठखेलियां लेती हैं ,जबकि उसकी आँखों में शरारती बच्चे जैसी चमक होती है। वह खुल कर मुस्कुराता है और बहुत सुखद ढंग से अपनी स्नेहपूर्णनता तथा साफगोई का सन्देश देता है। इनमे से अकेला -अकेला गुण भी दूसरों का दिल जीत लेता है लेकिन जब ये सभी गुण एक साथ मौजूद होते हैं तो इनके आगे आपके हाथ खड़े हो जाते हैं।
इन बातों के साथ ही अब कन्हैया के भाषण की शक्ति और लयबद्धता को भी जोड़ लें। .... इन सब बातों से बढ़ कर है उसकी तेजोमय बुद्धिमता ,जो उसके छोटे -छोटे मुहावरों और उक्तिओ के रूप में बहुत बढ़िया ढंग से हमारे सामने आती है - जैसे कि 'हम भारत से नहीं भारत में आज़ादी चाहते हैं '. ........ सपष्ट है कन्हैया जन्मजात से ही ऐसी प्रतिभा का स्वामी है जिसकी एक - एक बात को लाखों लोग मंत्रमुग्ध हो मौन और ध्यान से सुनते हैं। यह किसी रंक के राजा बनने की कहानी नहीं , बल्कि ये धुल के कण की सितारा बनने की कहानी है। ... ये कहानी बिलकुल लौकिक प्रतीत नहीं होती। ......... बहुत कम लोग इस बात से इंकार करेंगे की ये सितारा अवश्य ही चमकेगा। ...... कुछ लोग तो यहाँ तक मानने लगे हैं की वह एक दिन प्रधानमंत्री बनेगा। "
अब दूसरा हिस्सा " फिर भी विडंबना यह है कि (इसे आप कहीं मेरा व्यंग तो नहीं समझेंगे ?)उसके सबसे बड़े विरोधी यानी पुलिस और भाजपा और वास्तव में खुद मिस्टर मोदी ने एन शाब्दिक अर्थों में उसका निर्माण किया है। 9 फरबरी तक वह एक अज्ञात सा छात्र था - जे एन यु के कई छात्र एक्टिविस्टों में से एक। वह शायद इस स्थिति में बना रहता यदि बेसमझिपूर्ण और अत्याचारी सरकार ने बिना सोचे समझे और मूर्खों की तरह कार्यवाई न की होती। प्यारे इसे कहते हैं भाग्य और ऐसे ही कई लोगों की किस्मत खुल जाती है।
अंत में मैं कहना चाहूंगा :"थैंक्यू मिस्टर मोदी !आपने हमें एक सितारा दिया है जो क्षितिज पर तेज प्रकाश बिखेरेगा और इसकी रोशनी में करोड़ों लोग अब आपकी सरकार और खुद आपकी कारगुज़ारी का आंकलन करेंगे। आपका ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था। आप इस बात से इंकार कैसे कर सकते हैं कि इस सब कुछ का श्रेय आप को जाता है ?"
ये है हमारे वक़्त के श्रेष्ठ पत्रकार के विचार। इन्होने जिस तरह से एक देश द्रोही को मासूम बताया और उसका सीधा दुश्मन पुलिस ,भाजपा तथा मोदी को बताया, सीधा सन्देश है करण थापर ने विपक्ष के प्रबक्ता की कुर्सी पे बैठ कर यह ओजपूर्ण लेख लिखा है। मोदी के साथ कन्हैया का नाम जोड़ना और उसे प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताना भी बड़ा सन्देश देता है के आज भी विपक्ष के पास सशक्त नेता नहीं है और कन्हैया उनका नेता हो सकता है। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस और जिहादी पत्रकारों ने देशद्रोही को हीरो बांया किया है और देश के प्रधानमंत्री , भाजपा तथा पुलिस को उसका नंबर वन दुश्मन दिखाया है, आनेवाले दिनों में यही लोग इसे मरवाकर राजनितिक फायदा लेने की फिराक में होंगे। क्योंकि "देशद्रोहियों के खिलाफ कार्यबाही को दमन कारी बता कर राजनीती करने वाले जब देश के नहीं हुए तो कन्हैया जैसे गद्दारों के कैसे हो जाएंगे "? उनके लिए चस्का सत्ता का है और सत्ता के लिय वे कुछ भी कर सकते हैं , राजीव गांधी की बलि ले चुके लोग कन्हैया को शहीद बना कर आरोप मोदी पर लगवा देंगे और सत्ता पर काबिज होने की कोशिश भी करेंगे। लेकिन JNU में सत्ता नहीं देश द्रोह हुआ है और ये विलायती टट्टू देश द्रोह को सत्ता द्रोह कह कर साधारण जनता को भ्रमित कर रहे हैं।
गुड न्यूज़ है के देश के कई हिस्सों में आज़ादी के इतने सालों बाद बिद्युत का आगमन हुआ है और भी कई खबरे हैं लेकिन देश के मीडिया ने नकारत्मकता इतनी अधिक फैला दी है के उस धुंध में बदलाब आसानी नज़र नहीं आ रहे। जेहादी मीडिया देश का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है , पाकिस्तान तो अब आतंकबादीयों के सुराग भारत को देने लगा है , लेकिन इन छदम देश द्रोहियों से बचना होगा।
"वह छोटे से और गठीले कद का व्यक्ति है जो बिलकुल ही आपके लिए किसी प्रकार की चुनौती होने का आभास नहीं देता। उसके चेहरे पर मासूमियत और सोहार्द्य की भावना अठखेलियां लेती हैं ,जबकि उसकी आँखों में शरारती बच्चे जैसी चमक होती है। वह खुल कर मुस्कुराता है और बहुत सुखद ढंग से अपनी स्नेहपूर्णनता तथा साफगोई का सन्देश देता है। इनमे से अकेला -अकेला गुण भी दूसरों का दिल जीत लेता है लेकिन जब ये सभी गुण एक साथ मौजूद होते हैं तो इनके आगे आपके हाथ खड़े हो जाते हैं।
इन बातों के साथ ही अब कन्हैया के भाषण की शक्ति और लयबद्धता को भी जोड़ लें। .... इन सब बातों से बढ़ कर है उसकी तेजोमय बुद्धिमता ,जो उसके छोटे -छोटे मुहावरों और उक्तिओ के रूप में बहुत बढ़िया ढंग से हमारे सामने आती है - जैसे कि 'हम भारत से नहीं भारत में आज़ादी चाहते हैं '. ........ सपष्ट है कन्हैया जन्मजात से ही ऐसी प्रतिभा का स्वामी है जिसकी एक - एक बात को लाखों लोग मंत्रमुग्ध हो मौन और ध्यान से सुनते हैं। यह किसी रंक के राजा बनने की कहानी नहीं , बल्कि ये धुल के कण की सितारा बनने की कहानी है। ... ये कहानी बिलकुल लौकिक प्रतीत नहीं होती। ......... बहुत कम लोग इस बात से इंकार करेंगे की ये सितारा अवश्य ही चमकेगा। ...... कुछ लोग तो यहाँ तक मानने लगे हैं की वह एक दिन प्रधानमंत्री बनेगा। "
अब दूसरा हिस्सा " फिर भी विडंबना यह है कि (इसे आप कहीं मेरा व्यंग तो नहीं समझेंगे ?)उसके सबसे बड़े विरोधी यानी पुलिस और भाजपा और वास्तव में खुद मिस्टर मोदी ने एन शाब्दिक अर्थों में उसका निर्माण किया है। 9 फरबरी तक वह एक अज्ञात सा छात्र था - जे एन यु के कई छात्र एक्टिविस्टों में से एक। वह शायद इस स्थिति में बना रहता यदि बेसमझिपूर्ण और अत्याचारी सरकार ने बिना सोचे समझे और मूर्खों की तरह कार्यवाई न की होती। प्यारे इसे कहते हैं भाग्य और ऐसे ही कई लोगों की किस्मत खुल जाती है।
अंत में मैं कहना चाहूंगा :"थैंक्यू मिस्टर मोदी !आपने हमें एक सितारा दिया है जो क्षितिज पर तेज प्रकाश बिखेरेगा और इसकी रोशनी में करोड़ों लोग अब आपकी सरकार और खुद आपकी कारगुज़ारी का आंकलन करेंगे। आपका ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था। आप इस बात से इंकार कैसे कर सकते हैं कि इस सब कुछ का श्रेय आप को जाता है ?"
ये है हमारे वक़्त के श्रेष्ठ पत्रकार के विचार। इन्होने जिस तरह से एक देश द्रोही को मासूम बताया और उसका सीधा दुश्मन पुलिस ,भाजपा तथा मोदी को बताया, सीधा सन्देश है करण थापर ने विपक्ष के प्रबक्ता की कुर्सी पे बैठ कर यह ओजपूर्ण लेख लिखा है। मोदी के साथ कन्हैया का नाम जोड़ना और उसे प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताना भी बड़ा सन्देश देता है के आज भी विपक्ष के पास सशक्त नेता नहीं है और कन्हैया उनका नेता हो सकता है। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस और जिहादी पत्रकारों ने देशद्रोही को हीरो बांया किया है और देश के प्रधानमंत्री , भाजपा तथा पुलिस को उसका नंबर वन दुश्मन दिखाया है, आनेवाले दिनों में यही लोग इसे मरवाकर राजनितिक फायदा लेने की फिराक में होंगे। क्योंकि "देशद्रोहियों के खिलाफ कार्यबाही को दमन कारी बता कर राजनीती करने वाले जब देश के नहीं हुए तो कन्हैया जैसे गद्दारों के कैसे हो जाएंगे "? उनके लिए चस्का सत्ता का है और सत्ता के लिय वे कुछ भी कर सकते हैं , राजीव गांधी की बलि ले चुके लोग कन्हैया को शहीद बना कर आरोप मोदी पर लगवा देंगे और सत्ता पर काबिज होने की कोशिश भी करेंगे। लेकिन JNU में सत्ता नहीं देश द्रोह हुआ है और ये विलायती टट्टू देश द्रोह को सत्ता द्रोह कह कर साधारण जनता को भ्रमित कर रहे हैं।
गुड न्यूज़ है के देश के कई हिस्सों में आज़ादी के इतने सालों बाद बिद्युत का आगमन हुआ है और भी कई खबरे हैं लेकिन देश के मीडिया ने नकारत्मकता इतनी अधिक फैला दी है के उस धुंध में बदलाब आसानी नज़र नहीं आ रहे। जेहादी मीडिया देश का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है , पाकिस्तान तो अब आतंकबादीयों के सुराग भारत को देने लगा है , लेकिन इन छदम देश द्रोहियों से बचना होगा।

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