स्वच्छ भारत अभियान तो फ्लॉप है जी , देखो हमारी गली ,मोहला, गाओं शहर कितने गंदे हैं। सरकार की नीतियां सिर्फ कागज़ों पर चल रही हैं। मेक इन इंडिया भी फ्लॉप है जी , कोई फायदा नही हो रहा देश को। बुलेट ट्रैन नहीं चाहिए हमें तो हमारे सैनिको के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट चाहिए। काल धन तो जुमला था जी, व्यपारिओं का टैक्स हटा कर सरकारी कर्मचारिओं पर लगा दिया जी। क्रूड तेल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में घट रही है लेकिन जनता को फायदा नहीं मिला। ऐसे कई मज़ाकिया आरोप बिपक्ष आज मोदी सरकार पर और उनकी नीतियों के बारे में लगाता है। J N U के देश द्रोहियों की महिमा मंडन और विपक्ष के तलवे चाटने वाले कई पत्रकार सरकार की नीतियों पर प्र्शन चिन्ह लगा देते हैं। खैर उनका ये अधिकार है , लेकिन क्या "भारत " सिर्फ मोदी ,बीजेपी या आरएसएस का देश है ? बाकी किसी का कोई फ़र्ज़ नहीं , अगर कोई काम देश के फायदे के लिए किया जाता है तो आरोप लगता है गुप्त अजेंडे पे काम कर रही है सरकार। पिछले दिनों तो हद हो गयी , एक गदार छात्र को पकड़ने की कवायद शुरू हुई तो सभी बोलने लगे सरकार जानबूझ कर दोषियों को पकड़ने में आनाकानी कर रही है और जब दोषियों को पकड़ा गया तो बही लोग मोदी सरकार को मजा चखाने की बात करने लगे। ये कोई घरेलू नाटक नहीं बल्कि भारत के नेताओं की कहानी लिखी जा रही थी। हैदराबाद में छात्र की मौत खूब सुर्ख़ियों में रही क्योंकि मरने वाले की जाती वोट से जुडी हुई थी लेकिन देश के कई हिस्सों में इस दौरान छात्रों की आत्महत्याएं इस लिए सुर्खी नहीं वनी क्योंकि वे जर्नल जातियों से सम्बंधित थे। हाहाहा जिस समाजिक कुरीति से देश के बुद्धिजीवी आज़ादी चाहते हैं उसी छुआ-छूत के कारन देश के कई आत्म हत्या करने वाले छात्र गुमनाम मौत मर गए क्योंकि उनकी जाती छोटी नहीं थी। अजब समाजबाद की मांग है , फ्री सुबिधायें चाहिए टैक्स भी नहीं देना चाहते। मुफ्त में jnu जैसी संस्था में पढ़ रहे हैं लेकिन कर दाताओं से -अमीरों से भेद-भाव की चाहत रखते हैं। देश स्वच्छ करेंगे नहीं बल्कि अगर कोई कोशिश कर रहा है तो उसका मज़ाक बनाते हैं। शहीद हुए सैनिकों की शाहदत इनको तुच्छ लगती है आतंकियों के अधिकारों की बात करते हैं लेकिन अगर एक रैंक एक पेंशन सरकार ने लागू की तो सांप सूंघ गया सभी को। किसानो को फसल बीमा सुबिधा , आसान ऋण , फसल बेचने में सहायता , अच्छी आमदनी के लिए नई तकनीक विकसित करना आदि सभी कुछ सरकार कर रही है परन्तु कोई चर्चा नहीं । तेल की कीमते मनमोहन सरकार से तो कम हैं लेकिन किसी भी ट्रांसपोर्टर ने कीमते/किराये नहीं गटायीं। जिन सरकारी कर्मचारियों को तेल की कीमत बढ़ने पर महंगाई भत्ता दिया गया था क्या किसी ने भी तेल की कीमत कम होने पर सरकार को उस भत्ते को बापिस देने की बात की ? जिसकी भी एक बार पगार बढ़ गयी कोई भी उसकी पगार कम नहीं कर सकता , ये बोलकर भी नहीं ' की भाई अब तेल सस्ता हो गया है आप भी पगार में कटौती करवा लो' . मोदी जब सरकार बनाने की तैयारी कर रहे थे तब एक बात देखि गयी थी लाखों निःस्वार्थ देश भक्त मोदी के समर्थन में आगे आ गए थे , उन सभी को एक बार फिर कमर कसनी होगी सरकार की नीतियों को धरातल पे उतारने के लिए। क्योंकि देश में दो धड़े बन रहे हैं एक देश भक्तों का दूसरा गद्दार प्रेमियों का या गद्दारों का , फैसला हमें ही करना है " देश का साथ या गद्दारों से प्यार ". चुनाब आते जाते रहेंगे लेकिन तभी जब ये देश रहेगा।
How to Learn New Things or Tough Subjects Successfully ?मतलब ये है कि आप अपने बचपन में लौट जाइये अर्थात बच्चे बन जाइये
Love Is The Only Medicine For This World जानवरों तथा मनुष्यों का सीखने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है। जीवों के सीखने की प्रक्रिया ,'कोशिश और गलती अर्थात trial and error ' नियम पर आधारित होती है । सीखने वाले के लिए शुरूआती प्रयत्न किसी विज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं होते। प्रारंभिक छोटी -छोटी कोशिशों से मनुष्य को सफलता के रास्ते की कठिनाइयों तथा अपनी कमियों का पता चलता है ,जिनको दूर करने के प्रयत्न वह आरम्भ कर देता है। शुरुआती प्रयत्न इतना तो समझा ही देते हैं कि वे कौन से तरीके हैं जिनसे लक्षित क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती और वह नए तरिके अपना कर अपनी कोशिशों को नए आयाम देना भी आरम्भ करदेता है। सीखना मानसिक दक्षता का आधार है। हर सीखने वाले की दक्षता अलग -अलग होती है अतः सीखने के लिए कितना समय लगता है यह भी हर किसी की दक्षता पर ही निर्भर करता है। कौरव तथा पांडव गुरु द्रोणाचार्य जी के आश्रम में शिक्षा के लिए गए। गुरु जी ने पहला पाठ पढ़ाया "सदा सच बोलो " | अगले दिन गुरु जी ने पाठ सुनाने को कहा तो सिवाए युधिष्ठिर के सभी ने पाठ रट कर सुना...
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