एक दिन एक संत से उनके शिष्य ने पुछा "गुरुदेव आप जिस समाज की सेवा करने के लिए हमे भेजते हैं उसी समाज के लोग हमारा बिरोध करते हैं ,कई बार तो हमारे पीछे कुत्ते छोड़ देते हैं"। गुरु देव खूब हँसे और जबाब देते हुए बोले " बेटा सुआर को अगर तुम गन्दी नाली में से निकाल कर साफ़ पानी से धोओगे ,साबुन से नहलाओगे और बिलकुल साफ़ जगह रखोगे तो तुम्हें क्या लगता है सूअर को अच्छा लगेगा ? बेटा हमे समाज की सेवा इस लिए करनी है क्योंकि हमे लगता है समाज को सेवा की ज़रूरत है ठीक वैसे ही जैसे की सूअर को साफ़ करने का निर्णय हमारा अपना था ,सूअर को तो गन्दगी में बैठने का स्वभाव बन गया है। नेहला कर जैसे ही सूअर को छोड़ो वो सीधे नाली में -कीचड में जा कर लौटने लगेगा। इस वार्तालाप में आपको सीखने के लिए एक ही चीज़ है और वह है लगातार संघर्ष अच्छाई के लिए। जिस भी जगह आप काम कर रहे हैं आपको खूब मेहनत करनी पड़ेगी अगर आप अच्छा और ईमानदारी से काम करना चाहते है तो। असंभव नहीं है लेकिन आपको विश्वास होना चाहिए की आप सही रास्ते पर हैं। उदाहरण के लिए नरेंद्र मोदी को ही ले लो , मोदी सरकार ने अपने सभी बजटों में अभी तक लोक लुभावनी घोषणाएं कोई नहीं की। साधारण लोगों की साधारण जरूरतों को सामने रख कर उनके हल निकालने की कोशिश जारी है। देश पर बढ़ रहे कर्जे पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। सिस्टम को बदलना आसान नहीं है , अगर सरकारी कर्मचारी को सही टाइम पे दफ्तर पहुँचने की आदत डालने की कोशिश इस सरकार ने की है तो रिस्क भी है कहीं वोट बैंक खत्म न हो जाये, परन्तु ये रिस्क उठाया गया। ऐसे ही किसानो और काले धन के मुद्दे । कई कठिन फैसले उठाये गए। वन रैंक वन पेंशन सुबिधा फ़ौज को दे दी गयी, ये मोदी के एहसान नहीं हैं देश पर लेकिन हाँ हिम्मत तो करनी पड़ती है ऐसे सख्त फैसले लेने के लिए। लेकिन क्या मोदी को विरोध का सामना नहीं करना पड़ रहा ? जो दवाइयाँ पूरी दुनिया में वैन थीं सिर्फ मोदी सरकार ने उन खतरनाक दवाइयों में से कई को वैन कर दिया लेकिन न्यूज़ नहीं आई, चर्चा नहीं हुई।
ऐसे ही बाबा रामदेव जिसने आयुर्वेद पे पूरा का पूरा रिसर्च इंस्टिट्यूट बिना सरकार के सहयोग के साधारण जनता के लिए तैयार किया , कपाल भाति -अनुलोम बिलोम सारी दुनिया को सीखा दिया , सेहत का महत्व सारे भारत को बता दिया करोड़ों लोगों को रोज़गार के अबसर मुहैया करवाये उनके साथ मीडिया या समाज के एक पक्ष कैसा व्यवहार करता रहा है किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है।
श्री श्री रवि शंकर तो नए भुक्तभोगी हैं इस देश की सहिषुणता के। ऐसे ही बहुत से लोग जो देश -दुनिया या समाज की सेवा करना चाहते हैं उनके लिए रास्ते आसान नहीं हैं , ना ही समाज ना ही मीडिया सहयोग करता है लेकिन जिसे अपने निर्णंये पर विश्वास होता है वही तो अपनी चुनी हुई राह पर चल सकता है। याद रखिये अपनी एक आदत बदलने के लिए हमे कितना संघर्ष करना पड़ता है तो सोचिये समाज या देश को बदलने की सिर्फ सोच ही थका देती है और जब धरातल पर कुछ करना शुरू करोगे तब तो आसमान ही गिर जाएगा। लेकिन बिना रुके ,बिना थके बढ़ने वाले ही इतिहास लिखते हैं।
श्री श्री रवि शंकर तो नए भुक्तभोगी हैं इस देश की सहिषुणता के। ऐसे ही बहुत से लोग जो देश -दुनिया या समाज की सेवा करना चाहते हैं उनके लिए रास्ते आसान नहीं हैं , ना ही समाज ना ही मीडिया सहयोग करता है लेकिन जिसे अपने निर्णंये पर विश्वास होता है वही तो अपनी चुनी हुई राह पर चल सकता है। याद रखिये अपनी एक आदत बदलने के लिए हमे कितना संघर्ष करना पड़ता है तो सोचिये समाज या देश को बदलने की सिर्फ सोच ही थका देती है और जब धरातल पर कुछ करना शुरू करोगे तब तो आसमान ही गिर जाएगा। लेकिन बिना रुके ,बिना थके बढ़ने वाले ही इतिहास लिखते हैं।
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