Skip to main content

Modi Connection with Art of Living / इस तरह के विरोध तो अब होंगे ही।

आज सलमान रश्दी की पुरानी बीबी 'पद्मालक्ष्मी ' की पुस्तक के बारे में पढ़ रहा था।  उसने रश्दी के बारे में काफी कुछ लिखा है।  नहीं , मै समीक्षा नहीं कर रहा हूँ , मै तो अपने आप को ही समझा रहा हूँ इस दुनिया में जितने भी सेलिब्रिटी हैं सभी इंसान ही हैं इससे अधिक कुछ नहीं।  काम ,क्रोध ,लोभ ,मोह और अहंकार ये पांच गुण हैं जो पूरी दुनिया को नचा रहे हैं।  कोई भी जीव इन पांच गुणो से बाहर नहीं है , फिर वो हिन्दू हो या हो मुस्लिम ,सिख हो या हो ईसाई , पुरुष ,स्त्री ,शेर-कुत्ता ,पक्षी दानब या मानव् सभी। मै भी इसी श्रेणी में आता हूँ और आप भी।  श्री -श्री रवि शंकर कहते हैं लोगों के बारे में कोई फैसले मत लिया करो , इंसान गुणो के अनुसार बदलता रहता है , कभी बहुत अच्छा कभी बहुत बुरा। लेकिन दिक्कत हम संसारियों की ये है के हम एक ही अनुभव के आधार पर एक दुसरे को अलग -अलग श्रेणिओं में बाँट देते हैं।
पिछले दिनों सुभाष चन्द्र बॉस से सम्बंधित फाइलों से बहुत गुप्त बातों का पता चला।  कई लोग महात्मा गांधी से राष्ट्र पिता की उपाधि छीन कर सुभाष चन्द्र बॉस को देने की बात भी करने लगे , उन लोगों को शायद ये पता नहीं था के मोहनदास करम चंद गांधी को पहली बार 'राष्ट्रपिता कह कर पुकारने वाला और कोई नहीं बल्कि सुभाष चन्द्र बॉस ही थे' 1944 में सिंगापुर रेडिओ से अपने सम्बोधन में उन्होंने गांधी जी को राष्ट्रपिता कह कर सम्बोधित किया था।
खैर , ये तो पुरानी बाते हैं नई चीज़ जो आजकल भारत में सुर्खियां बटोर रही है   वो है दिल्ली में आर्ट ऑफ़ लिविंग द्वारा आयोजित किया जाने वाला कार्यक्रम और उसके आयोजन पे उठाये जाने वाले सवाल।  जिस संस्था ने पिछले 35 वर्षों से पूरी दुनिया में जीने की भारतीय कला का डंका बजाती रही है , जो संस्था प्रकृतिक संसाधनो के लिए पूरे  विश्व में मुहीम चला रही हो ,सिर्फ मुहीम ही नहीं धरातल पे काम भी करती हो ,यमुना की सफाई के लिए जिस संस्था ने जोर-शोर से मेहनत की हो ,वो संस्था यमुना के किनारे एक विश्व सम्मलेन आयोजित करवाने जा रही है  , यही सारे बवाल की  जड़ है। 'आर्ट ऑफ़ लिविंग ' अगर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं तो होने से पहले ही दिक्कत क्यों ? भाई, कार्यक्रम के बाद अगर यमुना में प्रदूषण बढ़ता है तो श्री श्री सहित सभी को जेल में डाल दो लेकिन 'नेशनल ग्रीन ट्रिव्यूनल' बड़ी गर्मी में है , इतने वर्षों से यमुना जहरीली होती रही तब किसी को आप्पति हुई लेकिन अब हो रही।
हमारे जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश में  क्रैशरों की फ़ौज ने वातावरण साँस लेने लायक नहीं छोड़ा , एक ही नदी है स्वां /सोमभद्र नदी जो क्रेशरों ने मरणासन पर भेज दी और रही सही कसर फैक्टरियों के प्रदूषण ने पूरी कर दी। अब हमारी नदी यमुना जैसी ही नाले की तरह होती जा रही है।  जंगलों को तरक्की के नाम पे काटा जा रहा है लेकिन कोई हरकत नहीं हुई NGT की।  ठीक है आपको प्रदुषण से कष्ट है लेकिन आपको अंदाज़ा कैसे की वहां प्रदुषण होगा ही?  राजनीती कहीं तो रुकनी चाहिए , करोड़ों -अरवो रुपए खर्च करके कॉमनवेल्थ गेम्स करवाई गयीं क्या तब पर्यावरण को नुक्सान नहीं हुआ ?  यहां तो संस्था खुद कह रही है के ज़िमेदारी ले रहे हैं प्रदुषण न हो इस बात की।
लेकिन  भी याद रखना होगा के श्री श्री और आर्ट ऑफ़ लिविंग ने चुनावों में मोदी को खुला समर्थन दिया था , इस तरह के विरोध तो अब होंगे ही। 

Comments

Popular posts from this blog

How to Learn New Things or Tough Subjects Successfully ?मतलब ये है कि आप अपने बचपन में लौट जाइये अर्थात बच्चे बन जाइये

Love Is The Only Medicine For This World जानवरों तथा मनुष्यों का सीखने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है।  जीवों के सीखने की प्रक्रिया ,'कोशिश और गलती अर्थात trial and error ' नियम पर आधारित होती है । सीखने वाले के लिए शुरूआती प्रयत्न किसी विज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं होते। प्रारंभिक छोटी -छोटी कोशिशों से मनुष्य को सफलता के रास्ते की कठिनाइयों तथा अपनी कमियों का पता चलता है ,जिनको दूर करने के प्रयत्न वह आरम्भ कर देता है। शुरुआती प्रयत्न इतना तो समझा ही देते हैं कि वे कौन  से  तरीके हैं जिनसे लक्षित क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती और वह नए तरिके अपना कर अपनी कोशिशों को नए आयाम देना भी आरम्भ करदेता है। सीखना मानसिक दक्षता का आधार है।  हर सीखने वाले की दक्षता अलग -अलग होती है अतः सीखने के लिए कितना समय लगता है यह भी हर किसी की दक्षता पर ही निर्भर करता है।  कौरव तथा पांडव गुरु द्रोणाचार्य जी के आश्रम में शिक्षा के लिए  गए।  गुरु जी ने पहला पाठ पढ़ाया "सदा सच बोलो " | अगले दिन गुरु जी ने पाठ सुनाने को कहा तो सिवाए युधिष्ठिर के सभी ने पाठ रट कर सुना...

बैसाखी मनाई स्वां नदी में फेंका कूड़ा जला कर

खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों पे हिमाचल प्रदेश अकैडमी है मेहरवान !