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Modi's Clothes, Bihar Elections and Secularism ! / बिहार में मोदी के कपडे चुनावी मुद्दा है ?

दो रंगियां ये ज़माने की ,जीते जी है सब , कि मुर्दों को  न बदलते कफन देखा। ये शेयर 'ग़ालिब 'ने कई साल पहले राहुल गाँधी व कांग्रेस ठगबंधन को ध्यान में रखते हुए लिख दिया था , जिसका अर्थ है कपडे जिन्दा लोग ही बदलते है मुर्दे नहीं। बिहारचुनाब रैलियों में कांग्रेस ठगबंधन का एक मुद्दा "नरेंदर मोदी द्वारा बार -2 कपड़े बदलना भी है " . पता नही बिहार की जनता को इस बार महाठगबंधन के मुद्दे सुहाये भी है यां नही , महाठगबंधन द्वारा कोई भी मुद्दा जनता से जुड़ा हुआ नहीं उठाया गया। लेकिन  सोशल साईटस जैसे फेसबुक और व्हाट्स एप्प  ने चुनाबो में काफी प्रभाव डाला है। मोदी दिन में 100 कपड़े बदले इससे देश को क्या फर्क पड़ता है, पंडित नेहरू के कपड़े लंदन से धुल कर और प्रैस हो कर आते थे ,ये बात बताते समय  कांग्रेसियों का सीना फटने को हो आता था। कांग्रेसी लोग आँख बंद करके मंत्र मुक्त्त हो जाते थे ,जैसे नेहरू साहब के कपड़े ही नही धुलते थे लंदन में बल्की भारत का भाग्य भी साफ हो जाता था ,गरीब का स्नान हो जाता था ,साधरण भारतीय कृत -2 हो जाता था। वो  दिन भी बीत गए ,अब राहुल गाँ...

History of Noakhali 1946 Genocide of Hindus/नोखली नरसंहार 10 अक्टूबर 1946

"नोखली, पश्चिम बंगाल का हिस्सा है इस जगह 10  अक्टूबर 1946 को दंगे शुरू हुए , मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारन हिन्दू इस दंगे में सीधा और आसान टारगेट थे। सबसे ज्यादा दुःख और कष्ट औरतों ने सहा। बहुत सी औरतों को अपने पति को मरते देखा और फिर जबरन उन मर्दों से शादी करनी पड़ी जिन लोगों ने उनके पतियों को मारा था। उन औरतों के चेहरे मृत देह के चेहरे लग  रहे थे। दुराचार यहीं नहीं रुका था , बल्कि हज़ारों हिन्दुओं की जान बख़्शने की कीमत गौ -मांस खिला कर उनको इस्लाम में शामिल होना रखी गयी थी। " ये शव्द मुरिअल लिस्टर राहत कार्य में आई हुई थीं ,ने 6 नवम्बर 1946 को लिखे थे (वी वी नागरकर की पुस्तक से ) अमृता बाजार पत्रिका 23 -10-1946 के लेख में लिखती है :- 13 दिन से 120 गाओं ( रामगंज,लक्ष्मीपुर,रायपुर,बेगमगंज और सेनबाग़  थाना क्षेत्र  जिला नोखली )  जिनमे 90 हज़ार हिन्दू रहते थे तथा 70 हज़ार ग्रामीण चांदपुर तथा फरीदगंज थाना जिला कोमिला में हथियार बंद लोगों ने बंधी बनाया हुआ है। 'मृत्यु' इन लोगों के चेहरे पे साफ़ दिख रही है , फ़ौज द्वारा उन लोगों के लिए रसद पहुंचाई जानी चाहिए , व...

नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस और खानदानी बहादुर कांग्रेस कार्यकर्ता

 किसी संगठन या राजनितिक दल के सम्पूर्ण काडर को  अगर बहादुरी का मेडल देने की बात चले तो मेरी पसंद कॉंग्रेसी होंगे। इस संगठन की नींव 1885 में भारतियों को राजनीतिक नेतृत्व दिलवाने की सोच से किया गया था।  संगठन के लिए देश और देश की जनता सर्वोपरि थी , महात्मा गांधी , सुभाष चन्द्र बॉस , सरदार बलभभाई पटेल , लाल बहादुर शास्त्री आदि  लिस्ट बहुत बड़ी है लगभग सभी महान बिभूतियाँ जो आज़ादी की जंग में शामिल  थे ,कांग्रेस से भी जुड़े थे। अच्छा आज़ादी मिलते ही महात्मा गांधी ने मांग कर दी के कांग्रेस को भंग करदो क्योंकि देश आज़ाद हो चुका है और अब कॉंग्रस्स की ज़रूरत नहीं है। खैर , ये मांग नहीं मानी गयी और वक़्त के करवट लेते ही नयी कांग्रेस देश के सामने आ गयी , इस कांग्रेस में देश के लिए कोई जगह नहीं है और ना ही देश सेवा के लिए , एक और बात यहाँ नागरिक भी "भारतीय" ना होकर जाति -धर्म से पहचाने जाने लगे।  देश के सभी महान सेवक कहीं गुम हो गए और सिर्फ एक ही  परिवार देश का खैरख्वा हो गया , जी हाँ राहुल गांधी उसी परिवार की खेती हैं। वक़्त का फेर देखिये अब कोंग्रेसियों को ...