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Modi's Clothes, Bihar Elections and Secularism ! / बिहार में मोदी के कपडे चुनावी मुद्दा है ?

दो रंगियां ये ज़माने की ,जीते जी है सब ,
कि मुर्दों को  न बदलते कफन देखा।

ये शेयर 'ग़ालिब 'ने कई साल पहले राहुल गाँधी व कांग्रेस ठगबंधन को ध्यान में रखते हुए लिख दिया था , जिसका अर्थ है कपडे जिन्दा लोग ही बदलते है मुर्दे नहीं।
बिहारचुनाब रैलियों में कांग्रेस ठगबंधन का एक मुद्दा "नरेंदर मोदी द्वारा बार -2 कपड़े बदलना भी है " . पता नही बिहार की जनता को इस बार महाठगबंधन के मुद्दे सुहाये भी है यां नही , महाठगबंधन द्वारा कोई भी मुद्दा जनता से जुड़ा हुआ नहीं उठाया गया। लेकिन  सोशल साईटस जैसे फेसबुक और व्हाट्स एप्प  ने चुनाबो में काफी प्रभाव डाला है।
मोदी दिन में 100 कपड़े बदले इससे देश को क्या फर्क पड़ता है, पंडित नेहरू के कपड़े लंदन से धुल कर और प्रैस हो कर आते थे ,ये बात बताते समय  कांग्रेसियों का सीना फटने को हो आता था। कांग्रेसी लोग आँख बंद करके मंत्र मुक्त्त हो जाते थे ,जैसे नेहरू साहब के कपड़े ही नही धुलते थे लंदन में बल्की भारत का भाग्य भी साफ हो जाता था ,गरीब का स्नान हो जाता था ,साधरण भारतीय कृत -2 हो जाता था। वो  दिन भी बीत गए ,अब राहुल गाँधी का कांग्रेस युग है  पता नही ,राहुल रोज नहाते भी है या नही ,क्योंकि भारत के अधिकतर विदेशी  रिर्टनों के उपर अंग्रेज़ दिखने का बड़ा दवाब होता है और अंग्रेजों की एक महत्वपूर्ण आदत होती है 'कभी-कभार' नहाना, इंग्लैंड की वर्तमान महारानी अपने जीवन में शायद ही 100 वार भी नहाई हो, फिर राहुल तो 'कांग्रेस के   सुकुमार है' विदेश में शिक्षा ग्रहण करने के बाद भारत की सेवा करने उतरे हैं , ध्यान देने योग्य बात है के राहुल के इलावा सलमान खुर्शीद आदि महान कांग्रेसी हैं जो विदेशी शिक्षा से ओत -प्रोत हो कर दोनों हाथों से देश की सेवा करने में जुटे हुए हैं।

खैर , विदेशी दौरों के दौरान मोदी बहुत कपडे बदलते हैं या नहीं परन्तु मुख्य बात है देश को उन दौरों का क्या फायदा हुआ ? अगर ये प्रश्न मुद्दा बनता तब बात थी।  लेकिन दुर्भाग्य वश ऐसा नहीं हुआ।
अगर राजनेता असली मुद्दे नहीं उठाते तो मीडिया का फ़र्ज़ था के 'चुनावों के मुद्दे ना बदलें ' अब ऐसा तभी हो सकता था अगर मीडिया दलाली ना करता , दुर्भाग्य देखिये इस देश का , आज भी मीडिया पर प्राइम टाइम पे गौ-मांस खाने वालों की महफ़िल तो दिखी लेकिन मुख्य मुद्दे गौण ही रह गए।
द्वन्द , इस देश के भाग्य में है , नेता मूर्ख और पत्रकार दलाल , अगर कोई ठीक नेतृत्व भी आ जाए जैसे के मोदी सरकार है,  तब भी पत्रकारिता दलाली वाली हरकतें छोड़ नहीं रही है.
आज डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम का जन्म दिन था और मीडिया ने उनके  जन्म दिन के साथ न्याय नहीं किया।लेकिन एक बात तो साफ़ है देश को आनेवाले दिनों में कई कलाम मिलने वाले हैं क्योंकि सरकार बच्चों के मन में विज्ञान के प्रति प्रेम और रिसर्च को बहुत आनंद दायक बना रही है और मोदी सरकार की विज्ञान को बढ़ावे की नीति ही कलाम साहेब के लिए सच्ची और पूर्ण श्रद्धांजलि  होगी।

मोदी के कपडे बिहार चुनाव का  मुद्दा तो है ही लेकिन सेकुलरिज्म को खतरे की एक और खबर आ रही है इस बार राष्ट्रपति भवन में नवरात्री कन्या पूजन का आयोजन होने जा रहा है।


धर्मनिरपेक्ष चैनल बहस करवा रहे हैं कि मुसलमान गरबे में क्यों न जाएं? 
और यही चैनल 16 जून को बहस करवा रहे थे
कि मुसलमान योग करने क्यों जाएं??

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