"नोखली, पश्चिम बंगाल का हिस्सा है इस जगह
10 अक्टूबर 1946 को दंगे शुरू हुए , मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारन हिन्दू इस दंगे में सीधा और आसान टारगेट थे।
सबसे ज्यादा दुःख और कष्ट औरतों ने सहा। बहुत सी औरतों को अपने पति को मरते देखा और फिर जबरन उन मर्दों से शादी करनी पड़ी जिन लोगों ने उनके पतियों को मारा था। उन औरतों के चेहरे मृत देह के चेहरे लग रहे थे। दुराचार यहीं नहीं रुका था , बल्कि हज़ारों हिन्दुओं की जान बख़्शने की कीमत गौ -मांस खिला कर उनको इस्लाम में शामिल होना रखी गयी थी। " ये शव्द मुरिअल लिस्टर राहत कार्य में आई हुई थीं ,ने 6 नवम्बर 1946 को लिखे थे (वी वी नागरकर की पुस्तक से )
अमृता बाजार पत्रिका 23 -10-1946 के लेख में लिखती है :-
13 दिन से 120 गाओं ( रामगंज,लक्ष्मीपुर,रायपुर,बेगमगंज और सेनबाग़ थाना क्षेत्र जिला नोखली ) जिनमे 90 हज़ार हिन्दू रहते थे तथा 70 हज़ार ग्रामीण चांदपुर तथा फरीदगंज थाना जिला कोमिला में हथियार बंद लोगों ने बंधी बनाया हुआ है। 'मृत्यु' इन लोगों के चेहरे पे साफ़ दिख रही है , फ़ौज द्वारा उन लोगों के लिए रसद पहुंचाई जानी चाहिए , वे लोग कई दिनों से भूखे हैं।
"द स्टेटस्मैन ने लिखा है 16 - 10 -1946 के दिन :-
लगभग 300 स्क्वायर किलोमीटर के क्षेत्र में दंगाइयों ने भारी नरसंहार किया गया है , घरों को जला दिया , उनकी औरतों को अगवा कर लिया गया और जबरन धर्म परिवर्तन किया गया। हज़ारों दंगाइयों ने "हिन्दु बहुल गाओं पर हमला किया हिन्दुओं को उनके पालतू पशुओं को मार कर खाने के लिए बाध्य किया"। हिन्दुओं के सभी पूजा स्थल तोड़ दिए गए हैं और जिला धीश तथा पुलिस कप्तान ने" कोई कदम नहीं उठाया"
।( जिला नओखली और जिला कोमिला में क्रमशः 80 % और 77 % मुस्लिम आवादी थी )
एक ब्रिटिश पत्रकार ने द स्टेट्समैन में लिखा है " दुसरे विश्व युद्ध ने मुझे कष्ट नहीं पहुँचाया था लेकिन मैं कह सकता हूँ युद्ध भी इतना भयानक नहीं होता , ये मध्य युगीन निर्दयता का भयानक दृष्य था ".
बहुत ही भयानक नरसंहार था मुस्लिम सैनिक इस में शामिल थे क्योंकि पूरा वाक्या बड़ी तैयारी के साथ किया गया था , सैनिकों की तरह चारों तरफ से सड़कें , नदियां और जंगल पूरे बहरी क्षेत्र से से काट दिए गए थे। नेहरू , महात्मा गांधी सभी को इसका पता था लेकिन इतिहास की किताबों में हिन्दुओं के साथ हुए ऐसे हज़ारों हादसे कभी जगह नहीं बना पाये क्योंकि शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों के पद हमेशा हिन्दू विरोधी विचारधारियों के पास ही रहे। कांग्रेस और सेक्युलर जनजाति ने हिन्दुओं को बदनाम करने के सिवा और कुछ नहीं किया।
http://noakhali1946.blogspot.in/2012/10/october-2012-have-we-forgotten-noakhali.html?m=1
10 अक्टूबर 1946 को दंगे शुरू हुए , मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारन हिन्दू इस दंगे में सीधा और आसान टारगेट थे।
सबसे ज्यादा दुःख और कष्ट औरतों ने सहा। बहुत सी औरतों को अपने पति को मरते देखा और फिर जबरन उन मर्दों से शादी करनी पड़ी जिन लोगों ने उनके पतियों को मारा था। उन औरतों के चेहरे मृत देह के चेहरे लग रहे थे। दुराचार यहीं नहीं रुका था , बल्कि हज़ारों हिन्दुओं की जान बख़्शने की कीमत गौ -मांस खिला कर उनको इस्लाम में शामिल होना रखी गयी थी। " ये शव्द मुरिअल लिस्टर राहत कार्य में आई हुई थीं ,ने 6 नवम्बर 1946 को लिखे थे (वी वी नागरकर की पुस्तक से )
अमृता बाजार पत्रिका 23 -10-1946 के लेख में लिखती है :-
13 दिन से 120 गाओं ( रामगंज,लक्ष्मीपुर,रायपुर,बेगमगंज और सेनबाग़ थाना क्षेत्र जिला नोखली ) जिनमे 90 हज़ार हिन्दू रहते थे तथा 70 हज़ार ग्रामीण चांदपुर तथा फरीदगंज थाना जिला कोमिला में हथियार बंद लोगों ने बंधी बनाया हुआ है। 'मृत्यु' इन लोगों के चेहरे पे साफ़ दिख रही है , फ़ौज द्वारा उन लोगों के लिए रसद पहुंचाई जानी चाहिए , वे लोग कई दिनों से भूखे हैं।
"द स्टेटस्मैन ने लिखा है 16 - 10 -1946 के दिन :-
लगभग 300 स्क्वायर किलोमीटर के क्षेत्र में दंगाइयों ने भारी नरसंहार किया गया है , घरों को जला दिया , उनकी औरतों को अगवा कर लिया गया और जबरन धर्म परिवर्तन किया गया। हज़ारों दंगाइयों ने "हिन्दु बहुल गाओं पर हमला किया हिन्दुओं को उनके पालतू पशुओं को मार कर खाने के लिए बाध्य किया"। हिन्दुओं के सभी पूजा स्थल तोड़ दिए गए हैं और जिला धीश तथा पुलिस कप्तान ने" कोई कदम नहीं उठाया"
।( जिला नओखली और जिला कोमिला में क्रमशः 80 % और 77 % मुस्लिम आवादी थी )
एक ब्रिटिश पत्रकार ने द स्टेट्समैन में लिखा है " दुसरे विश्व युद्ध ने मुझे कष्ट नहीं पहुँचाया था लेकिन मैं कह सकता हूँ युद्ध भी इतना भयानक नहीं होता , ये मध्य युगीन निर्दयता का भयानक दृष्य था ".
बहुत ही भयानक नरसंहार था मुस्लिम सैनिक इस में शामिल थे क्योंकि पूरा वाक्या बड़ी तैयारी के साथ किया गया था , सैनिकों की तरह चारों तरफ से सड़कें , नदियां और जंगल पूरे बहरी क्षेत्र से से काट दिए गए थे। नेहरू , महात्मा गांधी सभी को इसका पता था लेकिन इतिहास की किताबों में हिन्दुओं के साथ हुए ऐसे हज़ारों हादसे कभी जगह नहीं बना पाये क्योंकि शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों के पद हमेशा हिन्दू विरोधी विचारधारियों के पास ही रहे। कांग्रेस और सेक्युलर जनजाति ने हिन्दुओं को बदनाम करने के सिवा और कुछ नहीं किया।
http://noakhali1946.blogspot.in/2012/10/october-2012-have-we-forgotten-noakhali.html?m=1

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