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Secular Death and Communal Death/ हिन्दू शहीद के दरवाजे पर कोई सांत्वना देने भी नहीं आया !

शहीद दरोगा मनोज मिश्रा के घरवालों का दर्द फिर हरा हुआ जब  अखलाक के परिजनों को 45 लाख और  मिले 2 नौकरियां मिली  बड़ा घर मिला , हवाई जहाज की यात्रा और
मिश्रा जी के दरवाज़े पर  पर कोई सांत्वना तक देने नहीं पहुंचा  ॥ 
लेकिन गौहत्या के आरोपों से घिरे अखलाक के परिवार को अखिलेश सरकार 45 लाख का मुआवजा दे रही है.
मनोज के पिता रोते हुए कहते हैं कि बेटे की मौत की  जांच हो और दो बच्चों को नौकरी दी जाए.
 एक  बेटा खोने का दर्द तो सिर्फ मुस्लिम परिवार का ही होता है मिश्रा साहेब और उत्तरप्रदेश  सरकार आपके बेटे की जाति    हिन्दू ब्राह्मण होने के कारण  सांत्वना  देने  कैसे आ  जाती  ?  

मनोज मिश्रा के  पिता   ने कहा कि अगर जाति-बिरादरी देखकर सरकार मुआवजा देती है तो ऐसा लगता है कि ब्राह्मण होकर हमने गुनाह कर दिया. 
यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के हरदासपुर गांव के रहने वाले सब इंस्पेक्टर मनोज मिश्रा बरेली के फरीदपुर में पशु तस्करों की गोली का शिकार हो गए थे,
 लेकिन मनोज के परिजन उसकी हत्या में बरेली पुलिस की साजिश की बात कह सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. महीना होने को है लेकिन सरकार का कोई मंत्री तक मनोज के घर नहीं आया है..अब दादरी कांड में मारे गए अखलाक की मौत और मुआवजे की बारिश से मनोज के परिजन व्यथित हैं. मनोज के दो बेटियां और एक बेटा है.
मनोज के पिता कहते हैं कि मेरा बेटा पुत्र मनोज कुमार मिश्रा गौ हत्य को रोकने के लिए शहीद हुआ. उसको अभी तक सरकार और शासन की तरफ से कोई मुआवजा नहीं मिला है. जो बीस लाख का मुआवजा सबको मिलता है बस वहीं दिया गया और एक तरफ जो गौहत्या करवाते हैं उन्‍हें 45-45 लाख रुपया दिया गया.उन्‍होंने कहा कि हमारा बेटा ऑन ड्यूटी शहीद हुआ उसका कुछ नहीं. मनोज की विधवा शशी मिश्रा कहती हैं कि हमारे पति जो ऑन ड्यूटी शहीद हुए हैं उनके परिवार के लिए सरकार ने कुछ भी नहीं किया है. अब बच्चों का पालन पोषण कैसे होगा.उन्‍होंने कहा कि जो गौकशी को रोकना चाहते थे, उनके लिए कुछ भी नहीं मुख्यमंत्री ने तो एक शब्द भी नहीं कहा ये दुखद है.
ऐसे कई दोगले उदाहरण भारत में आपको रोज़ पढ़ने को मिलते रहे होंगे जिससे आप साफ़ पता लगा लेते होगेकी की   मरने वाला 'किस धर्म से है'
 पिछले दिनों  सहारनपुर में इंस्पेक्टर NK त्यागी की मृत्यु हुई थी। खनन माफिया का ट्रक ओवरटेक करने के चक्र में इंस्पेक्टर  त्यागी  की बाइक पे चढ़ गया और दर्दनाक हादसे में उनकी मृत्यु हुई , लेकिन कोई मीडिया हलचल नहीं हुइ ।  
इन  दिनों में दादरी काण्ड खूब उछाला गया और आज़म खान समेत सभी सेक्युलर रोने रो रहे हैं.…… नयी दुखी आत्मा हैं नयनतारा सहगल - नेहरू के खानदान से हैं 1986 में इनको साहित्य अकादमी पुरूस्कार मिला था आज इनको मुस्लिम अख़लाक़ की  मौत का सदमा लगा  है   अपना साहित्य अकादमी पुरूस्कार भारत सरकार को बापिस कर रही हैं। अच्छा लगा के "सेक्युलर मौत" का दुःख व्यक्त करने वाले खुल कर सामने आ रहे हैं। 
परन्तु हिन्दुओं के कष्ट कब तक कम्युनल गिने जाते रहेंगे ? 
उधर वाराणसी में कल साधुओं के शांति पूर्ण प्रदर्शन को खुनी रूप देने के आरोप में कांग्रेस mla अजय राय को गिरफ्तार कर लिया है। … सेकुलरिज्म को भारी ठेस पहुंचेगी आज की रात क्योंकि सेक्युलर गुनाह और कम्युनल गुनाह दोनों अलग -अलग चीज़े होती हैं अगर मरने वाला अख़लाक़ है तो सेक्युलर और अगर मनोज है तो कम्युनल !!

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