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Saffronisation of IITs and Secular Donations/ मुआवज़े में इतना फरक और फीस मुआफ़ी में छात्र की जाति -मज़हब नहीं देखेंगे

वाराणसी और दादरी ने खूब नाम कमाया है चंद दिनों में , एक और दादरी में कल एक हिन्दू युबक जय प्रकाश की मौत हो गयी , मीडिया उस युबक को अख़लाक़ की हत्या का दोषी करारा दे चुकी थी लेकिन स्थानीय पुलिस उसको गिरफ्तार करने की बजाये परिवार सहित प्रताड़ित कर रही थी , एक मज़दूर का आत्महत्या करना  दर्शाता है के अखिलेश सरकार मौत का बदला मौत से लेना चाहती थी और जयप्रकाश की मौत से बदला पूरा हो गया होगा।  मैं ऐसा इस लिए कह रहा हूँ क्योंकि वाराणसी की हिंसा में कॉंग्रेस्सिओं के इलावा उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाहियों की कार गुज़ारी भी सामने आ रही है , पूरे प्रकरण को शूट करने वाले एक स्थानीय फोटोग्राफर ने दावा किया है के वाराणसी में वाहनो को आग लगाने वाले और कोई नहीं बल्कि पुलिस थी।  ये दोनों केस मीडिया ने हिंदुत्व के खतरे के रूप में पेश किये और जनता को आधी अधूरी जानकारी दे कर बिहार चुनावो में बीजेपी गठबंधन को पसोपेश में डालने और हराने की कोशिश के रूप में प्रयोग किया।  
 असली परीक्षा तो अब होगी हिन्दू संगठनो की ,आज जब इखलाक का हिन्दू पडोसी पुलिस की बर्बरता की बलि चढ़ चुका है देखना होगा कितने हिन्दू संगठन पीड़ित परिवार की सहायता करते हैं।  एक ही गाओं में दो मौते हुई एक मुस्लिम था जिसके मरने से सेकुलरिज्म खतरे में आ गया , 45 लाख अखिलेश सरकार ने इखलाख के परिवार को दिए ,फिर मायावती ने 11 लाख दिए , केजरीवाल  ने भी 14 लाख रुपया दिया है ऐसी खबर है ,  एक बड़ा घर, परिवार के 2 लोगों को सरकारी नौकरी, मुफ्त हवाई यात्रा आदि सभी को जोड़ कर देखें तो डेढ़ करोड़ से अधिक की बोली लगी है एक मुसलमान की मौत की और दूसरा हिन्दू  अभी उसकी खबर मीडिया के लिए महत्वपूर्ण नहीं रही और सरकार हिन्दू की सहायता करेगी नहीं , लेकिन क्या हिन्दू नेता जयप्रकाश के परिवार को कोई सहायता देंगे ?
जयप्रकाश को इज़्ज़त की चिता मिल गयी होगी इसपे भी शक है , आपको याद होगा शहीद हेमराज के परिवार का अनशन और उस शहीद के परिवार को दिया गया मुआवजा भी। हिन्दू शहीद हेमराज और मुस्लिम गौ-हत्यारे के परिवार को दिए गए 
मुआवज़े में इतना फरक क्यों  इसका जवाव तो देना पडेगा "पुत्तर सरकार" को।

उधर एक और कम्युनल फैसला ले कर स्मृति ईरानी ने IIT आई -आई -टी  की शिक्षा को भी भगवा रंग चढ़ा दिया , अब आई -आई -टी में दाखिल शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों से फीस नहीं ली जाएगी।  इस फैसले से सेकुलरिज्म खतरे में आ सकता है क्योंकि इस फैसले में जाती या धर्म की व्याख्या नहीं की गयी है,ये कैसा फैसला है शारीरिक रूप से अक्षम छात्र की जब तक जाती या धर्म नहीं पूछा जाएगा तब तक सेकुलरिज्म कमज़ोर होता जाएगा , कांग्रेस -आप - जनतादल -कम्यनिस्ट तथा सेक्युलर जनता मोमबत्ती जला  कर कब बिरोध करेगी देखना होगा। 
आई -आई -टी आयोग की मीटिंग उधर एक और खतरनाक फैसला लेते हुए स्मृति ईरानी ने एक नयी योजना (पल ) PAL को भी मंजूरी दी है , इसके तहत कमज़ोर छात्रों को IIT आई -आई -टी के लिए तैयार किया जाएगा लेकिन यहाँ भी छात्र की जाति  -मज़हब नहीं देखा जाएगा।  सेकुलरिज्म को कमज़ोर करने वाले दो कठोर फैसले लिए गए हैं , अब सेकुलरिज्म को सहारा कोन देगा सोचने का विषय है। 

  
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