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मोदी सरकार के लिए बदलाब कठिन है नामुमकिन नहीं

पर्यावरण के विषय में   काफी बातें और योजनाएं तैयार हो रही हैं।  सुनने में आ रहा है केंद्र सरकार अब जंगलों की देख रेख प्राइवेट कंपनियों या संस्थाओं के हाथ देने वाली है ,ऐसी सुगबुगाहट सुनने को मिल रही है। देखा जाए तो सरकार के पास बिकल्प हैं भी नहीं।  वन विभाग जो वनों को बचाने की सोच के साथ बनाया गया था , वनों को काटने या यूँ कहें लूटने का सबसे बड़ा विभाग बन गया है।  हम देश के किसी भी हिस्से में चले जाएँ आज लोग अपने निजी फायदे को ही सर्वोपरि रख रहे हैं , यही हाल सरकारी अधिकारियों का भी है तो उनको भी गलत नहीं कहा जा सकता क्योंकि समाज का प्रभाव ही तो उन पर पड़ा है। कल ही एक सेवा निवृत मुख्याध्यापक जी से बात हो रही थी उन्होंने बताया के शिमला हाई कोर्ट में किसी केस के सिल सिले में गया हुआ था तो वकीलों के साथ बात चल पड़ी , शाम का समय  था महफ़िल में नशे का सुरूर चढ़ने लगा था , एक वकील साहेब मेरे मुरीद हो गए और नज़दीक आकर बोले "हेडमास्टर साहेब आप केस जीत सकते हैं , आजकल जो जज हाई कोर्ट में है उसे लड़कियों का शौक है इधर उसके पास लड़की पहुंची उधर आप केस जीत गए।  एक...

मोदी समर्थक - सरकार की नीतियां जनता तक पहुंचाएं

आसपास की हलचल  भी कभी फायदा दे जाती है लेकिन सबसे ज्यादा सकूँ सिर्फ काम करने में मिलता है ,परिणाम  क्या होंगे इस बात से बेखबर छोटे बच्चों को एकाग्रता से मामूली से दिखने वाले क्रिया कलापों को करते देखो तो बड़े होने का अहंकार खत्म हो जाता है। जीवन में जो भी इंसान सफल  होता है उसमे बचपन कूटकूट के भरा होता है। बचपन भी एक सोच ही तो है ,जो अपने आप को समझदार और बड़ा समझता है वो कभी भी असंभव को संभव नहीं कर सकता।  दिल का बच्चा होना ज़रूरी है ,आज नरेंदर दामोदरदास मोदी का जनम दिन है और खुशकिस्मती से ए पी जे अब्दुलकलाम के बाद अगर कोई बचपने से भरा हुआ नेता देखा है तो वो मोदी है।  मोदी का उत्साह बताता है के उनका दिल अभी भी बच्चा है। उस देश में जहाँ लोकल ट्रैन समय पर नहीं चलती वहां के लोगों को बुलेट ट्रैन के सपने दिखाना और फिर उस सपने को शिदत साकार करने की जीतोड़ कोशिश समझदार कहलाने वाला नहीं कर सकता। अमेरिका जैसे हथियारों के व्यापारी देशों को सामने से चुनौती देने का काम भी मोदी ही कर सके , चीन को बॉर्डर पर ललकारने का दम भी मोदी सरकार ने ही दिखाया है।  यूँ ...

बीजेपी के नेता इस तरफ भी ध्यान दें

अच्छा, सबसे अधिक मज़ा आजकल टीवी पर कांग्रेस नेताओं को सुनने में आता है , आज  डाक टिकटों पर गांधी परिवार के  एकाधिकार को मोदी सरकार की चुनौती पे चर्चा सुन कर महसूस हुआ के जो भी मैनेजमेंट की किताबों में लिखा गया है , कांग्रेसी  बिना पढ़े हाईकमान की चम्पी करके ही वो ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं। रशीद अल्वी जैसे कई नेता इस बात को सार्थक करते हैं। जो भी हो मोदी सरकार की नेहरू-गांधी के इलावा जो देश के नेता और स्वतंत्रता सैनानी हुए हैं उनको सम्मान देने की इच्छा ने 'अच्छे दिनों के संकेत दे दिए हैं ' . लालू यादव और नितीश कुमार का ढगबंधन बिहार की जनता को रास नहीं आ रहा है ये रुझान मिल रहा है।  लालू के टाइम में बिहार में सड़कें नहीं बनी , लालू कहते थे 'अगर सड़क बनेगी तो पुलिस आपके घरों तक जल्दी पहुँच जायेगी ,अगर बिजली जलेगी तो पुलिस रात को दूर से आपका घर देख लेगी तो आप शराब कैसे बनाओगे इस लिए ना सड़क और ना बिजली की ज़रूरत है। ' पता नहीं बिहार की जनता उन दिनों को भूल गयी है या याद हैं। नितीश के विरुद्ध लालू एक नारा दिया करते थे "ऐसा कोई सगा नहीं ,जिसे नितीश ने ठगा नहीं " ले...

गुंणों का प्रभाव तथा लालू-खुर्शीद -गुजरात के पटेल , सरकारी कर्मचारी और बिहार के लोग

 आज  एक मित्र  से बात हो रही थी , वे काफी परेशान थे 'देश  के सरकारी कर्मचारिओं के  काम चोरी और बेईमानी  की आदत से " बात सही भी थी।  अगर भारत के सरकारी कर्मचारी अपने आप को भारत का हिस्सा मानते और अपना 50 % काम भी ईमानदारी से करते तो आज सभी सरकारी कर्मचारियों को पेंशन की सुबिधा भी मिलती और उनके बच्चों को भी सरकारी नौकरी आराम से मिलती क्योंकि देश के हालात बहुत अच्छे होते। लेकिन ये संभव ही नहीं हो पा रहा , भारत को लूटने में अधिकतर भारतीय लोग तो अंग्रेज़ों से भी आगे निकल गए हैं , लेकिन ये भूल गए के अँगरेज़ तो भारत से लूट का सामान ब्रिटेन ले गए , लेकिन वे लोग (भारतीय लूटेरे ) भारत की जनता से लूटा सामान कहाँ ले जाएंगे ?  मैं यहाँ नेताओं की बात नहीं कर रहा हूँ , मै यहां सिर्फ साधारण भारतीयों  की बात कर रहा हूँ जो सरकारी नौकरी मिलने से पहले तक तो देश भक्त और ईमानदार होते हैं लेकिन नौकरी मिलते ही उनकी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं।  खैर, पांच गुण(काम -क्रोध - लोभ -मोह -अहंकार ) जो पूरे ब्रह्माण्ड को अपने प्रभाव में ही रख...