प्रश्न :- दुनियां का सबसे सफल व्यक्ति कौन ?
उत्तर :- जिसकी इच्छा शक्ति सुव्यवस्थित हो।
यही साधारण लेकिन गूढ़ रहस्य है। इस संसार की सबसे बड़ी पूँजी है " एकाग्र चित्त" अर्थात सुव्यवस्थित इच्छा शक्ति। कुछ भी नया सीखने की चाह भर से कुछ नहीं होगा , प्रयत्न प्रारम्भ करने होंगे। नया काम आरम्भ करना बहुत कठिन क्रिया है , इस लिए जो भी शुरू करना चाहते हैं अभी शुरू कर दो। याद रखो "अभी नहीं तो कभी नहीं " | सार्थक प्रयास , मनोयोग से की गयी कोशिश हो सकता है बहुत महान कार्य की तरफ अग्रसर होने की छोटी सी शुरुआत हो! अच्छा वक्ता बनना है तो आज ही शुरुआत करो , नित्य कोशिश करो अब्राहिम लिंकन की तरह , एकांत में जा कर भाषण देने की प्रेक्टिस करो लेकिन प्रेक्टिस रोज करो बिना छुट्टी किये लगातार पूरी तन्मयता के साथ , आज के भाषण से कल का भाषण अच्छा होगा यह ध्यान रखें। नाम याद नहीं होते तो अभी जो व्यक्ति पहले मिले उसका नाम याद रखने की मेहनत शुरू करो। जो भी विधा आप सीखना चाहते हैं , बस शुरू हो जाइये।
बस , ध्यान देना की मेहनत का अर्थ सिर्फ दोहराना नहीं , सिर्फ दोहराने से आपको फायदा नहीं होगा , आपकी प्रगति नहीं होगी। आपको हर दोहराव का विचार पूर्वक विश्लेषण करना होगा , जिससे आपको पता चलता रहे आपकी प्रगति का तथा उन कमियों का भी जिनका दूर होना आपके सिद्ध हस्त होने के लिए परम् आवश्यक है। कमियां कैसे दूर होंगी ये प्लानिंग भी करते रहना है। जब आप नित्य विचार करेंगे प्लानिंग करेंगे फिर उनको दूर करने की भरपूर कोशिश करेंगे तो आप अपनी तरक्की सामने पाएंगे। वैज्ञानिक जब किसी नई खोज पर काम शुरू करते हैं तब उनका दायरा बहुत बड़ा होता है फिर धीरे - धीरे दायरा संकुचित करते जाते हैं। ऐसे ही नित्य की कोशिश और विचार पूर्वक विश्लेषण आपकी मेहनत का दायरा घटाते जायेंगे ,क्योंकि आपकी कमियां घटती जाएंगी। सीखने का प्रत्येक काम प्रयोग तथा खोज की क्रिया ही होती है। हर प्रयत्न के बाद आपको अपनी कमियों तथा उनको दूर करने में आ रही कठिनाइयों का पूर्ण ज्ञान आवश्यक है। फिर उनसे छुटकारा प्राप्ति की जुगत /तरकीब ढूंढनी होगी। आपको पता होना चाहिए किन कमियों के कारण आप नाम याद नहीं रख पाते या भाषण देने में डरते हैं। सीखने की इच्छा शक्ति को सुव्यबस्थित करने का अर्थ ही यही है कि व्यक्ति अपने प्रत्येक प्रयत्न के परिणाम पर विचार करे तथा अपनी कठिनाइयों को धीरे -धीरे दूर करते जाएँ।
उत्तर :- जिसकी इच्छा शक्ति सुव्यवस्थित हो।
यही साधारण लेकिन गूढ़ रहस्य है। इस संसार की सबसे बड़ी पूँजी है " एकाग्र चित्त" अर्थात सुव्यवस्थित इच्छा शक्ति। कुछ भी नया सीखने की चाह भर से कुछ नहीं होगा , प्रयत्न प्रारम्भ करने होंगे। नया काम आरम्भ करना बहुत कठिन क्रिया है , इस लिए जो भी शुरू करना चाहते हैं अभी शुरू कर दो। याद रखो "अभी नहीं तो कभी नहीं " | सार्थक प्रयास , मनोयोग से की गयी कोशिश हो सकता है बहुत महान कार्य की तरफ अग्रसर होने की छोटी सी शुरुआत हो! अच्छा वक्ता बनना है तो आज ही शुरुआत करो , नित्य कोशिश करो अब्राहिम लिंकन की तरह , एकांत में जा कर भाषण देने की प्रेक्टिस करो लेकिन प्रेक्टिस रोज करो बिना छुट्टी किये लगातार पूरी तन्मयता के साथ , आज के भाषण से कल का भाषण अच्छा होगा यह ध्यान रखें। नाम याद नहीं होते तो अभी जो व्यक्ति पहले मिले उसका नाम याद रखने की मेहनत शुरू करो। जो भी विधा आप सीखना चाहते हैं , बस शुरू हो जाइये।
बस , ध्यान देना की मेहनत का अर्थ सिर्फ दोहराना नहीं , सिर्फ दोहराने से आपको फायदा नहीं होगा , आपकी प्रगति नहीं होगी। आपको हर दोहराव का विचार पूर्वक विश्लेषण करना होगा , जिससे आपको पता चलता रहे आपकी प्रगति का तथा उन कमियों का भी जिनका दूर होना आपके सिद्ध हस्त होने के लिए परम् आवश्यक है। कमियां कैसे दूर होंगी ये प्लानिंग भी करते रहना है। जब आप नित्य विचार करेंगे प्लानिंग करेंगे फिर उनको दूर करने की भरपूर कोशिश करेंगे तो आप अपनी तरक्की सामने पाएंगे। वैज्ञानिक जब किसी नई खोज पर काम शुरू करते हैं तब उनका दायरा बहुत बड़ा होता है फिर धीरे - धीरे दायरा संकुचित करते जाते हैं। ऐसे ही नित्य की कोशिश और विचार पूर्वक विश्लेषण आपकी मेहनत का दायरा घटाते जायेंगे ,क्योंकि आपकी कमियां घटती जाएंगी। सीखने का प्रत्येक काम प्रयोग तथा खोज की क्रिया ही होती है। हर प्रयत्न के बाद आपको अपनी कमियों तथा उनको दूर करने में आ रही कठिनाइयों का पूर्ण ज्ञान आवश्यक है। फिर उनसे छुटकारा प्राप्ति की जुगत /तरकीब ढूंढनी होगी। आपको पता होना चाहिए किन कमियों के कारण आप नाम याद नहीं रख पाते या भाषण देने में डरते हैं। सीखने की इच्छा शक्ति को सुव्यबस्थित करने का अर्थ ही यही है कि व्यक्ति अपने प्रत्येक प्रयत्न के परिणाम पर विचार करे तथा अपनी कठिनाइयों को धीरे -धीरे दूर करते जाएँ।
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