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Gujarat Election - One Sided Battle

Love Is The Only Medicine For This World हमारे लिए शब्दों का महत्व आजकल बहुत अधिक होता है अगर वे नकारात्मक हैं , अगर शव्द सकारात्मक हैं तो अधिकतर लोग उनकी तरफ ध्यान भी नहीं देते।  यही हालात हमारे जीवन में भी हैं जो भी कुछ अच्छा है वो दिखता ही नहीं है लेकिन नकारात्मकता की मोटी चादर हमारे मन और चित को पूर्ण रूपेण ढके रहती है।  गुजरात चुनाव में भी यही हो रहा है , समाज को जाति के नाम पर बांटा गया और फिर धर्म के नाम की राजनीति मुख्य मुद्दा हो गयी।  गुजरात में विकास मुख्य मुद्दा पिछले चुनावों में था लेकिन इस बार पटेल आरक्षण मुहीम को इतना अधिक प्रचार मिला की चुनाव के मुद्दे सिमट कर जाति और धर्म तक ही सीमित हो गए।  दोष नेताओं को नहीं दे सकते समाज को जनता को जैसा चाहिए वही मुद्दा मुख्य हो जाता है। गुजरात के चनावों को काफी महत्व पूर्ण मन जा रहा है क्योंकि मोदी का राज्य है और इसके विकास मॉडल के  नाम पे ही मोदी सत्ता में आये थे।  कान्ग्रेस् ने आरक्षण तथा और कई बातों को जाति से जोड़ कर चुनावों से पहले ही विकास को पागल करार दे कर गुजरात को पिछड़ा राज्य घोषित कर दिया...

#Ambedkar , Brahmins and Secularism

भारत में बाबा साहेब की जयंती बहुत बड़े पर्व के रूप में मनाई जा रही है।  सोशल मीडिया में कई लोगों के उत्साह को सलाम करने का मन करता है , उत्साह में दिए  गए गलत बयान या अधूरे ज्ञान से थोड़ा दुःख और अचरज होता है लेकिन 14 अप्रैल नया 14 नवंबर बन रहा है ये तो साफ़ है।  बाबा साहेब को बहुत कष्ट सहने पड़े लेकिन जिस कारण बाबा साहेब महान बने वो था उनका ज्ञान ,शिक्षा और ज़िम्मेदारी उठाने की इच्छा।  बहुत कम लोग ये जानते हैं के जब जात-पात भारतीय समाज में ऊंचाइयों पर था तब बाबा साहेब तथा उनके कुछ साथियों को उच्च शिक्षा की तयारी ब सहायता  एक ब्राह्मण ने की थी।  खैर ये कोई बड़ी बात नहीं है अगर कोई ब्राह्मण धारा के विरूध जा कर समाज में बदलाब की कोशिश करे।  आज इस बात को बताने का प्रयोजन इतना भर है के मनु बाद की बात कर रहे कुछ लुच्चे लोग दलित और ब्राह्मणो को आपस में दुश्मन बता रहे हैं। उनको मनु समृति ज़रूर पढ़नी चाहिए।  अगर कोई भी शख्स समाज को तोड़ने या बांटने वालों को ध्यान से देखेंगा  तो दंग रह जाएंगा। #आशुतोष ,जी बिलकुल #केजरीवाल स्पेशल, आज #एकलब्य को दलि...

Modi Connection with Art of Living / इस तरह के विरोध तो अब होंगे ही।

आज सलमान रश्दी की पुरानी बीबी 'पद्मालक्ष्मी ' की पुस्तक के बारे में पढ़ रहा था।  उसने रश्दी के बारे में काफी कुछ लिखा है।  नहीं , मै समीक्षा नहीं कर रहा हूँ , मै तो अपने आप को ही समझा रहा हूँ इस दुनिया में जितने भी सेलिब्रिटी हैं सभी इंसान ही हैं इससे अधिक कुछ नहीं।  काम ,क्रोध ,लोभ ,मोह और अहंकार ये पांच गुण हैं जो पूरी दुनिया को नचा रहे हैं।  कोई भी जीव इन पांच गुणो से बाहर नहीं है , फिर वो हिन्दू हो या हो मुस्लिम ,सिख हो या हो ईसाई , पुरुष ,स्त्री ,शेर-कुत्ता ,पक्षी दानब या मानव् सभी। मै भी इसी श्रेणी में आता हूँ और आप भी।  श्री -श्री रवि शंकर कहते हैं लोगों के बारे में कोई फैसले मत लिया करो , इंसान गुणो के अनुसार बदलता रहता है , कभी बहुत अच्छा कभी बहुत बुरा। लेकिन दिक्कत हम संसारियों की ये है के हम एक ही अनुभव के आधार पर एक दुसरे को अलग -अलग श्रेणिओं में बाँट देते हैं। पिछले दिनों सुभाष चन्द्र बॉस से सम्बंधित फाइलों से बहुत गुप्त बातों का पता चला।  कई लोग महात्मा गांधी से राष्ट्र पिता की उपाधि छीन कर सुभाष चन्द्र बॉस को देने की बात भी करने लगे , उ...

JNU AZADI ऑपरेशन हुआ कन्हैया का -अच्छे दिन तो शुरू हो गए भाई !!

देश में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है।  J N U में कन्हैया बापिस आया और आरएसएस तथा मोदी की भाषा बोलते हुए देश भक्ति की ऊंची -ऊंची बातें कर रहा था।  आज तक , abp news , ndtv आदि के स्टूडियोज में तो जैसे रौनक ही लौट आई।  इन चेन्नल्स ने कन्हैया को मोदी के बराबर नहीं बल्कि बहुत ऊपर , बड़ा करके दिखाया।  खैर जितना मर्जी दिखाया लेकिन कन्हैया के विचारों में आया क्रांतिकारी बदलाव क्यों और कैसे आया ये किसी ने भी नहीं बताया।  कन्हैया खुद को भी 'बेचारा ' बताता रहा लेकिन उसके कड़वे और देश द्रोही विचारों पर राष्ट्र भक्ति की चाशनी का राज़ उसने भी नहीं बताया , बल्कि 'लाल-सलाम ' के बुर्के को ओढ़ कर जेल और कोर्ट में पिलाई गई  देश भक्ति की घुटी  को छुपाने की नाकाम कोशिशि तो की लेकिन गीदड़ तब  तक पहचाना नहीं जाता जब तक मुंह ना खोले और जैसे ही वह मुंह खोलता है हुआँ -हुआँ की आवाज़ सारे राज़ खोल देती है।  यहाँ भी ऐसा ही हुआ सभी नाटक और बातें एक तरफ, लेकिन देश भक्ति  लपलपाती चाशनी में एक गदार के देश भक्ति वाले भाषण ने सारा राज़ खोल दिया।  जेल में सेवा तो ...

JNU ISSUE - United India

देश में जिस तरह की हवा बनायी जा रही खतरे की संभावना बढ़ रही है ऐसा दिख रहा है ,लेकिन साधारण जन -मानस की खरी-खरी दो टूक बातें सुन कर मुझे महसूस हो रहा है के अब देश के अच्छे दिन आ रहे है।  JNU हादसे ने देश को जोड़ने का बहुत महत्वपूर्ण काम किया है।  देश की जनता को  बिना कुछ किये साफ़ -साफ़ पता चला के देश में जो देश बिरोधी गतिविधियाँ चलती रही हैं उनको समर्थन कहाँ से मिलता रहा है।  राहुल गांधी , केजरीवाल , समाजवादी ,जनता दल बहुजनबादी और कम्युनिस्ट् विद्वानो का  खुल कर देश द्रोहियों के समर्थन में आना पूरी की पूरी कहानी ब्यान कर गया।  किसी को कुछ कहना या सुनना ही नहीं पड़ा , लेकिन जनता ने एक सुर में देश प्रेम और सम्मान को महत्वपूर्ण बता कर एक कड़ा संदेश दे दिया है के , जो भी हो देश के विरुध बोलने वालों को बक्शा नहीं जाएगा।  अब केंद्रीय विश्वविद्यालओं में तिरंगा फहराने के विरोध ने जनता को पक्का यकीन दिलवा दिया है के देश को अस्थिर और तोड़ने की साजिश करने वाले जितने अधिक देश के बाहर हैं उससे अधिक संख्या देश के अंदर है और ये दोषी लोग धर्म ,मज़हव या जाती की आढ़ में छुपे ह...

Modi's Clothes, Bihar Elections and Secularism ! / बिहार में मोदी के कपडे चुनावी मुद्दा है ?

दो रंगियां ये ज़माने की ,जीते जी है सब , कि मुर्दों को  न बदलते कफन देखा। ये शेयर 'ग़ालिब 'ने कई साल पहले राहुल गाँधी व कांग्रेस ठगबंधन को ध्यान में रखते हुए लिख दिया था , जिसका अर्थ है कपडे जिन्दा लोग ही बदलते है मुर्दे नहीं। बिहारचुनाब रैलियों में कांग्रेस ठगबंधन का एक मुद्दा "नरेंदर मोदी द्वारा बार -2 कपड़े बदलना भी है " . पता नही बिहार की जनता को इस बार महाठगबंधन के मुद्दे सुहाये भी है यां नही , महाठगबंधन द्वारा कोई भी मुद्दा जनता से जुड़ा हुआ नहीं उठाया गया। लेकिन  सोशल साईटस जैसे फेसबुक और व्हाट्स एप्प  ने चुनाबो में काफी प्रभाव डाला है। मोदी दिन में 100 कपड़े बदले इससे देश को क्या फर्क पड़ता है, पंडित नेहरू के कपड़े लंदन से धुल कर और प्रैस हो कर आते थे ,ये बात बताते समय  कांग्रेसियों का सीना फटने को हो आता था। कांग्रेसी लोग आँख बंद करके मंत्र मुक्त्त हो जाते थे ,जैसे नेहरू साहब के कपड़े ही नही धुलते थे लंदन में बल्की भारत का भाग्य भी साफ हो जाता था ,गरीब का स्नान हो जाता था ,साधरण भारतीय कृत -2 हो जाता था। वो  दिन भी बीत गए ,अब राहुल गाँ...

Sahitya Academy Award and Secular / किसान की मौत साहित्य को संजीवनी लगती रही

आजकल साहित्य अकैडमी अवार्ड बापिस करने की होड़ लगी हुई है ,सेक्युलर साहित्यकार काफी मुस्तैदी के साथ कम्युनलिज्म का बिरोध कर रहे हैं , अख़लाक़ जैसा सेक्युलर अगर मरता है तो साहित्यकार दुखी होता है लेकिन जब संजीव कुमार नाम का कम्युनल लड़का ,बिहार में मुस्लिम समुदाय द्वारा मार दिया जाता है तो ना सेक्युलर मीडिया खबर दिखाता है और  ना ही किसी  साहित्यकार को कष्ट होता है। खैर, आज़ादी तो ज़रुर भारत को 1947 में मिली थी लेकिन अधिकतर पढ़ा लिखा वर्ग अंग्रेज़ों की मानसिक गुलामी आज भी करता रहा है उसमे विदेशों में पढ़े कांग्रेसी नेता जैसे खुर्शीद ,राहुल आदि तथा अधिकतर सेक्युलर साहित्यकार अब तो इनकी पहचान बड़ी आसान हो गयी है ! आज़ादी के बाद के अधिकतर भारतीय साहित्यकार अपराध बोध तथा हीन भावना से ग्रसित रहे हैं। पूरी दुनिया में  जितने भी महान प्रेरक हुए हैं वे एक ही बात कहते रहे हैं 'नज़र बदलो ,नज़ारे बदल जाएंगे ' ये छोटी सी बात अगर देश के सेक्युलर साहित्यकार नहीं समझ रहे हैं तो आम आदमी कैसे समझेगा।  एक साहित्यकार टी बी  बहस में कह रही थी "अख़लाक़ की मौत के बाद अब दम घुटता है इस...

Saffronisation of IITs and Secular Donations/ मुआवज़े में इतना फरक और फीस मुआफ़ी में छात्र की जाति -मज़हब नहीं देखेंगे

वाराणसी और दादरी ने खूब नाम कमाया है चंद दिनों में , एक और दादरी में कल एक हिन्दू युबक जय प्रकाश की मौत हो गयी , मीडिया उस युबक को अख़लाक़ की हत्या का दोषी करारा दे चुकी थी लेकिन स्थानीय पुलिस उसको गिरफ्तार करने की बजाये परिवार सहित प्रताड़ित कर रही थी , एक मज़दूर का आत्महत्या करना  दर्शाता है के अखिलेश सरकार मौत का बदला मौत से लेना चाहती थी और जयप्रकाश की मौत से बदला पूरा हो गया होगा।  मैं ऐसा इस लिए कह रहा हूँ क्योंकि वाराणसी की हिंसा में कॉंग्रेस्सिओं के इलावा उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाहियों की कार गुज़ारी भी सामने आ रही है , पूरे प्रकरण को शूट करने वाले एक स्थानीय फोटोग्राफर ने दावा किया है के वाराणसी में वाहनो को आग लगाने वाले और कोई नहीं बल्कि पुलिस थी।  ये दोनों केस मीडिया ने हिंदुत्व के खतरे के रूप में पेश किये और जनता को आधी अधूरी जानकारी दे कर बिहार चुनावो में बीजेपी गठबंधन को पसोपेश में डालने और हराने की कोशिश के रूप में प्रयोग किया।    असली परीक्षा तो अब होगी हिन्दू संगठनो की ,आज जब इखलाक का हिन्दू पडोसी पुलिस की बर्बरता की बलि चढ़ चुका है देखना ह...

Secular Death and Communal Death/ हिन्दू शहीद के दरवाजे पर कोई सांत्वना देने भी नहीं आया !

शहीद दरोगा मनोज मिश्रा के घरवालों का दर्द फिर हरा हुआ जब  अखलाक के परिजनों को 45 लाख और  मिले 2 नौकरियां मिली  बड़ा घर मिला , हवाई जहाज की यात्रा और मिश्रा जी के दरवाज़े पर  पर कोई सांत्वना तक देने नहीं पहुंचा  ॥   लेकिन गौहत्या के आरोपों से घिरे अखलाक के परिवार को अखिलेश सरकार 45 लाख का मुआवजा दे रही है. मनोज के पिता रोते हुए कहते हैं कि बेटे की मौत की  जांच हो और दो बच्चों को नौकरी दी जाए.  एक  बेटा खोने का दर्द तो सिर्फ मुस्लिम परिवार का ही होता है मिश्रा साहेब और उत्तरप्रदेश  सरकार आपके बेटे की जाति    हिन्दू  ब्राह्मण  होने के कारण  सांत्वना  देने  कैसे आ  जाती  ?   मनोज मिश्रा के  पिता    ने कहा कि अगर जाति-बिरादरी देखकर सरकार मुआवजा देती है तो ऐसा लगता है कि ब्राह्मण होकर हमने गुनाह कर दिया.  यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के हरदासपुर गांव के रहने वाले सब इंस्पेक्टर मनोज मिश्रा बरेली क...

Fadnavis-Slaps-Rajdeep- Replied to the open-letter -Why Meat Ban

Dear Rajdeep, Normally I don’t reply to every open letter by ‘senior’ journalists but this time I thought if I didn’t, the Goebbels law — speak what is untrue several times over and it becomes the truth — may prevail. Your letter is an excellent example of how a section of the media, without having sound knowledge, bashes a government with an agenda. Let me bring some clarity to the first issue you have raised. My state government did not take the decision to ban meat. Not a single new order went from the government to any local body. The Congress government in 2004 took the decision to close a slaughter-house for two days in Paryushan Parva. It was conveyed to all municipal corporations then. Since then all municipal corporations including Mira-Bhaindar started implementing it. Additionally municipal corporations like Mumbai and Mira-Bhaindar adopted resolutions to ban it for additional days within their own powers, which in the case of Mumbai dates back to 1994. Surprisingly,...

नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस और खानदानी बहादुर कांग्रेस कार्यकर्ता

 किसी संगठन या राजनितिक दल के सम्पूर्ण काडर को  अगर बहादुरी का मेडल देने की बात चले तो मेरी पसंद कॉंग्रेसी होंगे। इस संगठन की नींव 1885 में भारतियों को राजनीतिक नेतृत्व दिलवाने की सोच से किया गया था।  संगठन के लिए देश और देश की जनता सर्वोपरि थी , महात्मा गांधी , सुभाष चन्द्र बॉस , सरदार बलभभाई पटेल , लाल बहादुर शास्त्री आदि  लिस्ट बहुत बड़ी है लगभग सभी महान बिभूतियाँ जो आज़ादी की जंग में शामिल  थे ,कांग्रेस से भी जुड़े थे। अच्छा आज़ादी मिलते ही महात्मा गांधी ने मांग कर दी के कांग्रेस को भंग करदो क्योंकि देश आज़ाद हो चुका है और अब कॉंग्रस्स की ज़रूरत नहीं है। खैर , ये मांग नहीं मानी गयी और वक़्त के करवट लेते ही नयी कांग्रेस देश के सामने आ गयी , इस कांग्रेस में देश के लिए कोई जगह नहीं है और ना ही देश सेवा के लिए , एक और बात यहाँ नागरिक भी "भारतीय" ना होकर जाति -धर्म से पहचाने जाने लगे।  देश के सभी महान सेवक कहीं गुम हो गए और सिर्फ एक ही  परिवार देश का खैरख्वा हो गया , जी हाँ राहुल गांधी उसी परिवार की खेती हैं। वक़्त का फेर देखिये अब कोंग्रेसियों को ...

मोदी समर्थक - सरकार की नीतियां जनता तक पहुंचाएं

आसपास की हलचल  भी कभी फायदा दे जाती है लेकिन सबसे ज्यादा सकूँ सिर्फ काम करने में मिलता है ,परिणाम  क्या होंगे इस बात से बेखबर छोटे बच्चों को एकाग्रता से मामूली से दिखने वाले क्रिया कलापों को करते देखो तो बड़े होने का अहंकार खत्म हो जाता है। जीवन में जो भी इंसान सफल  होता है उसमे बचपन कूटकूट के भरा होता है। बचपन भी एक सोच ही तो है ,जो अपने आप को समझदार और बड़ा समझता है वो कभी भी असंभव को संभव नहीं कर सकता।  दिल का बच्चा होना ज़रूरी है ,आज नरेंदर दामोदरदास मोदी का जनम दिन है और खुशकिस्मती से ए पी जे अब्दुलकलाम के बाद अगर कोई बचपने से भरा हुआ नेता देखा है तो वो मोदी है।  मोदी का उत्साह बताता है के उनका दिल अभी भी बच्चा है। उस देश में जहाँ लोकल ट्रैन समय पर नहीं चलती वहां के लोगों को बुलेट ट्रैन के सपने दिखाना और फिर उस सपने को शिदत साकार करने की जीतोड़ कोशिश समझदार कहलाने वाला नहीं कर सकता। अमेरिका जैसे हथियारों के व्यापारी देशों को सामने से चुनौती देने का काम भी मोदी ही कर सके , चीन को बॉर्डर पर ललकारने का दम भी मोदी सरकार ने ही दिखाया है।  यूँ ...

बीजेपी के नेता इस तरफ भी ध्यान दें

अच्छा, सबसे अधिक मज़ा आजकल टीवी पर कांग्रेस नेताओं को सुनने में आता है , आज  डाक टिकटों पर गांधी परिवार के  एकाधिकार को मोदी सरकार की चुनौती पे चर्चा सुन कर महसूस हुआ के जो भी मैनेजमेंट की किताबों में लिखा गया है , कांग्रेसी  बिना पढ़े हाईकमान की चम्पी करके ही वो ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं। रशीद अल्वी जैसे कई नेता इस बात को सार्थक करते हैं। जो भी हो मोदी सरकार की नेहरू-गांधी के इलावा जो देश के नेता और स्वतंत्रता सैनानी हुए हैं उनको सम्मान देने की इच्छा ने 'अच्छे दिनों के संकेत दे दिए हैं ' . लालू यादव और नितीश कुमार का ढगबंधन बिहार की जनता को रास नहीं आ रहा है ये रुझान मिल रहा है।  लालू के टाइम में बिहार में सड़कें नहीं बनी , लालू कहते थे 'अगर सड़क बनेगी तो पुलिस आपके घरों तक जल्दी पहुँच जायेगी ,अगर बिजली जलेगी तो पुलिस रात को दूर से आपका घर देख लेगी तो आप शराब कैसे बनाओगे इस लिए ना सड़क और ना बिजली की ज़रूरत है। ' पता नहीं बिहार की जनता उन दिनों को भूल गयी है या याद हैं। नितीश के विरुद्ध लालू एक नारा दिया करते थे "ऐसा कोई सगा नहीं ,जिसे नितीश ने ठगा नहीं " ले...

क्या ये हिम्मत बीजेपी के कार्यकर्ता दिखाएँगे ?

मोदी सरकार देश की सुरक्षा को लेकर बहुत ही संजीदा है , इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी बात को और पुख्ता करता है  हेरान टीपी ड्रोन खरीदने के प्रस्ताब को गुपचुप ढंग से पास करना।  40 करोड़ डॉलर की ये डील भारत की सेनाओं को बहुत सहायक होने वाली है।  अच्छा ये भी खूब रही हम सभी ये भी चाहते हैं के ऐसे और हथियार भारत सरकार ख़रीदे जिससे सेना ताकतवर बने लेकिन दूसरी तरफ मुफ्त में सुबिधायें चाहियें, पेंशने भी बढ़ा दी जाएँ , सैलरी भी बढाई  जाये , टैक्स भी कम हो जाए , सड़कें भी बने ,नए काम हों आदि आदि। लेकिन क्या ये सब इतना आसान है ? क्या हर किसी को देश हित के लिए कुछ त्याग नहीं करना चाहिए ? अब पेट्रोल -डीज़ल के दाम काफी नीचे आये हैं लेकिन ट्रकों -बसों -टैक्सियों के किराए कम नहीं हुए ,क्यों ? क्या ये भी मोदी के डंडे से ही सम्भव है क्या? अगर सरकार डंडे का उपयोग करेगी इन छोटी-छोटी चीज़ों के लिए तो फिर और काम कब होंगे। सिर्फ बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता ही अगर ईमानदारी से अपना काम देश हित में दो साल के लिए करें तो भारत सफलता की आवरत लिख सकता है , अब ...

ISIS के खिलाफ फतवे ज़ारी

ये खबर भारत के मीडिया ने दवा दी , देश में कोई भी मुस्लिम जब देश प्रेम और भाई चारे की बात करता है तो उसे सम्पूर्ण उत्साह के साथ पूरा समर्थन और सम्मान मिलना चाहिए।  भारत का दुर्भाग्य है के जनता को खवर पहुंचाने वाले खवर नफीस या तो कम्युनिस्ट माईंड / सोच के हैं या फिर बिकाऊ किसम के पत्रकार हैं ,  दोष इन लोगों का नहीं है , पत्रकारिता में इम्मान्दारी से काम करने वाले को तो गुज़ारे लायक पगार भी नहीं मिलती।  अधिकतर लोग टी वी में चमकती हसीनाओं को खबरें देते देख कर सोच लेते हैं के पत्रकारों की तो बल्ले-बल्ले होती है लेकिन सच बहुत भयाभय और कड़वा है ,खैर इस मुद्दे पे कभी फिर बात करेंगे , तो मुसलमान अगर isis का झंडा उठाते हैं तब तो टी वी पर खूब बहस  और खबर कई दिनों तक दिखाई जाती है ,लेकिन जब मुस्लिम लोग isis के खिलाफ झंडा उठाते हैं तो ये खबर , खबर ही नहीं बनती।  इससे सिर्फ एक ही सन्देश जाता है के भारत का मीडिया खाता भारत का है लेकिन उस ही थाली में छेद भी कर रहा है जिसमे खता है।  दुःख दायक है , परन्तु एक बात तो साफ़ हो गयी है के सोशल मीडिया ने पारम्परिक मीडिया की नाक में ...

भारत बनेगा मिसाइल प्रूफ, मोदी सरकार का 'काली कवच '

भारत को दुनिया मे पहला "मिसाईल प्रुफ" देश बनाने की तैयारी में मोदी सरकार ! अब बहुत जल्द पाकिस्तान समेत सभी हथियार पसंद देश हो जाएंगे भारत के आगे ढेर ! काली के वार से सभी को मिलेगी मात ,अटलबिहारी बाजपाई के शासन के दौरान अमेरिका से लाई गयी थी गुप्त तकनीक। काली रोकेगी दुश्मन की मिसाइलों को , भारत बनेगा मिसाइल प्रूफ देश , मोदी सरकार को मिलेगा 'काली कवच ' विज्ञानिक भाषा में KALI का अर्थ है 'किलो एम्पेयर  लीनियर इंजेक्टर 'Kilo Ampere Linear Injector'. ये तकनीक इस तरह काम करती है के अगर कोई भी मिसाइल भारत का रुख करती है तो सेकण्ड्स से भी पहले 'इलेक्ट्रॉनिक बीम्स Relativistic Electrons Beams' उसको जला देगी। ये लेजर बीम की तरह छेद ही नहीं करती हैं पर उस जगह पर इलेक्टिक सिस्टम को भी खत्म कर देती है। काली , लेजर हथियारों से बहुत अधिक कारगर और खतरनाक है। ये एक बहुत अधिक शक्ति वाली माइक्रोवेव तोप के रूप में काम करेगी। जल्दी ही साधारण जनता और तकनीक की दुनिया के तुर्रम खान माने जा रहे बिकसित देश भी मुहं और आँखें खोल कर देखेंगे 'काली  का जाल '

सैनिकों का बुलंद होसला देखना चाहती है सरकार - नरेन्द्र मोदी

फरीदाबाद मेट्रो के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गति-प्रगति रैली  भाषण के मुख्य बिन्‍दु प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत भारत मां की जयघोष करते हुए जय जवान,जय किसान के नारे के साथ की। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरियाणा मेरा दूसरा घर है। उन्होंने कहा कि गुजरात छोड़ने के बाद मैंने वर्षों तक हरियाणा में अपना जीवन बताया और यहां के हर गांव-हर गली से परिचित हूं। उन्होंने कहा कि आपके प्यार को कभी नहीं भूल सकता, इसी वजह से मैं बार-बार खिंचा चला आता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आपके इस प्यार को ब्याज सहित विकास के रूप में लौटाऊंगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि देश राजनीति से नहीं राष्ट्रनीति से आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि हमारा एकमात्र मंजिल विकास है। उन्होंने ने एक बार फिर 2022 तक हर गरीब को घर देने की बात दोहराई। रैली में वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने पूर्व सैनिकों से जो वादा किया था, उसे निभाया है। श्री मोदी ने कहा कि वीआरएस के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "ऐसे जवान जो मोर्च...

मोदी सरकार की सुरक्षा योजनाएं मुस्लिम भी ले सकते हैं फायदा

प्रधान मंत्री जनधन योजना  28 अगस्त 2014 को शुरू हुई थी और इस  का पहला चरण 14 अगस्त 2015 को समापत हो   चूका है।   जिसने भी इस योजना के तहत बैंक में खाता खुलवाया है उसको डेबिटकार्ड के साथ ही 1 लाख रूपय का दुर्घटना बीमा मिला है और जिन  26 जनवरी 2015 से पहले खाता खुलवाया था उनका  30  हज़ार का जीवन बीमा भी हुआ बिलकुल मुफ्त में।  अब दूसरा चरण शुरू हो चुका है इस योजना का 14 अगस्त 2015 से 14 अगस्त 2018 तक ये दूसरा चरण चलेगा।  आप सोच रहे होंगे के सिर्फ बैंक खाते ही तो खोलने हैं फिर इतना टाइम क्यों , तो मित्रो ज़रा रुकिए जब आप जनधन योजना के बारे में बिस्तार से समझेंगे तो आप कहेंगे इतने काम समय में इतना कुछ सम्भव नहीं हो सकता ,लेकिन मोदी है के मानता नहीं, मोदी को सारा काम इस थोड़े सेव समय में ही पूरा करना है।  आज़ादी से बाद हमारे मज़दूर या धियाड़ी दार या असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले भाई बहनो के परिवारों के लिए   कोई सुरक्षा चक्र नहीं बन पाया था , लेकिन अब सरकार ने देश करोड़ों मज़दूरों तथा उनके परिवारों को वित्तीय सुरक...

एक तरफ पाकिस्तान -लालू परसाद -नितीश -सोनीया -केजरी का महाठगबन्दन - दूसरी तरफ मोदी !

देश के अंदर किसी भी तरह से अस्थिरता लाना और बाहर पाकिस्तान का एटम बॉम्ब से धमकाना एक ही सिक्के के दो पहलु लगते हैं।  जिस तरह की भाषा नितीश -लल्लू -सोनिया -केजरी बोल रहे हैं उससे एक बात तो साफ़  है के मोदी सरकार को चारो तरफ से घेरने की तैयारी पूरी प्लानिंग के साथ हो रही है. आरक्षण का भूत जो पटेलों ,जाटों,गुज्जरों के सर चढ़ रहा है  उसमे घी/तेल डालने वाले महाठगबंधन की चांदी दिख  रही है। उधर रिटायर फौजियों का देश सेवा के बदले देश की आमदनी में हिस्सा मांगना या यूँ कहें माँ की सेवा का मुआबजा मांगना और फिर 1965 के युद्ध के 50 जीत उत्सव का बहिष्कार बताता है के देश के हालात बदतर बनाने की पूरी साजिश की गयी है। ये जो भी बारदातें  हो  रही हैं एक -दूसरे से बिलकुल  जुडी हुई हैं।  मोदी के प्रधान मंत्री बनने से सिवाये देश भक्तों के सभी दुखी थे और अमेरिका से लेकर चीन - पाकिस्तान आदि देश तो एक दम सदमे में पहुँच गए थे। मोदी सरकार द्वारा भूमि अधग्रहण बिल रोकना सही वक्त पर लिया गया सही फैसला है।  मोदी का  विधयक मुझे पसंद था लेकिन ...