देश में जिस तरह की हवा बनायी जा रही खतरे की संभावना बढ़ रही है ऐसा दिख रहा है ,लेकिन साधारण जन -मानस की खरी-खरी दो टूक बातें सुन कर मुझे महसूस हो रहा है के अब देश के अच्छे दिन आ रहे है। JNU हादसे ने देश को जोड़ने का बहुत महत्वपूर्ण काम किया है। देश की जनता को बिना कुछ किये साफ़ -साफ़ पता चला के देश में जो देश बिरोधी गतिविधियाँ चलती रही हैं उनको समर्थन कहाँ से मिलता रहा है। राहुल गांधी , केजरीवाल , समाजवादी ,जनता दल बहुजनबादी और कम्युनिस्ट् विद्वानो का खुल कर देश द्रोहियों के समर्थन में आना पूरी की पूरी कहानी ब्यान कर गया। किसी को कुछ कहना या सुनना ही नहीं पड़ा , लेकिन जनता ने एक सुर में देश प्रेम और सम्मान को महत्वपूर्ण बता कर एक कड़ा संदेश दे दिया है के , जो भी हो देश के विरुध बोलने वालों को बक्शा नहीं जाएगा। अब केंद्रीय विश्वविद्यालओं में तिरंगा फहराने के विरोध ने जनता को पक्का यकीन दिलवा दिया है के देश को अस्थिर और तोड़ने की साजिश करने वाले जितने अधिक देश के बाहर हैं उससे अधिक संख्या देश के अंदर है और ये दोषी लोग धर्म ,मज़हव या जाती की आढ़ में छुपे हुए हैं। हाँ राजनितिक पार्टियों के रूप में भी अब दो धड़े उभर रहे हैं" एक देश प्रेमी दूसरा देश द्रोही " खैर जनता सब जानती है। बिहार का सुशासन और दिल्ली का भ्र्ष्टाचार मुक्त आश्वासन कैसे देश विरोधियों के जूते की नाल बन गए सर्वबिदित हो रहा है
How to Learn New Things or Tough Subjects Successfully ?मतलब ये है कि आप अपने बचपन में लौट जाइये अर्थात बच्चे बन जाइये
Love Is The Only Medicine For This World जानवरों तथा मनुष्यों का सीखने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है। जीवों के सीखने की प्रक्रिया ,'कोशिश और गलती अर्थात trial and error ' नियम पर आधारित होती है । सीखने वाले के लिए शुरूआती प्रयत्न किसी विज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं होते। प्रारंभिक छोटी -छोटी कोशिशों से मनुष्य को सफलता के रास्ते की कठिनाइयों तथा अपनी कमियों का पता चलता है ,जिनको दूर करने के प्रयत्न वह आरम्भ कर देता है। शुरुआती प्रयत्न इतना तो समझा ही देते हैं कि वे कौन से तरीके हैं जिनसे लक्षित क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती और वह नए तरिके अपना कर अपनी कोशिशों को नए आयाम देना भी आरम्भ करदेता है। सीखना मानसिक दक्षता का आधार है। हर सीखने वाले की दक्षता अलग -अलग होती है अतः सीखने के लिए कितना समय लगता है यह भी हर किसी की दक्षता पर ही निर्भर करता है। कौरव तथा पांडव गुरु द्रोणाचार्य जी के आश्रम में शिक्षा के लिए गए। गुरु जी ने पहला पाठ पढ़ाया "सदा सच बोलो " | अगले दिन गुरु जी ने पाठ सुनाने को कहा तो सिवाए युधिष्ठिर के सभी ने पाठ रट कर सुना...

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