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Hindu Teachings/निश्चित ही सेकुलरिज्म खतरे में पड जाएगा........

चुन अपने लिए फूल या खार तू ,कि नेकी -बदी का है  मुख़तार तू ,जो दिल चाहे इस ज़िंदगी को सँबार ,बहार इसकी देख और उजाला निखार , जो दिल चाहे यह बाग बीरान  कर ,खुद अपनी तबाही के सामान कर,जो दिल चाहे ले राह -ए अक्लो स्वाब ,जो दिल  चाहे कर अपनी मिट्टी ख़राब।  हिन्दू धर्म पे कुठार घात सदियों से होते रहे  हैं , लेकिन  कभी भी सख्त शब्दों का या ऐसा कहें कोई भी कठोर विरोध नहीं किया गया , क्यों ?? क्योंकि हिन्दू धर्म में दुसरे धर्म के  विरोध में  कभी कुछ कहा  ही नहीं गया।  स्वामी गीतानन्द जी ने ख्वाज़ा दिल मुहम्मद साहिब के शब्दों का तर्जुमा हिंदी में किया क्योंकि इन शब्दों में मनुष्य मात्र के लिए सन्देश है।   कोई भी हिन्दू संत इस्लाम या क्रिश्चियन धर्म के ग्रंथों में से नकारात्मक सन्देश कभी हिंदी में अनुबादित  ही नहीं करता  , कारण सिर्फ यही था "दूसरों की निंदा का अर्थ है उन अबगुणो को अपने जीवन में समाहित करना"।  खैर हम क्यों नकारात्मकता को अपनाएँ , चलो एक दिया जलाएं। जिंदगी रूप में हमे एक बगीचा मिला है...