Skip to main content

Posts

Recent posts

Change Your Ways Not Target /रास्ते बदलते रहें लेकिन लक्ष्य न ओझल होने पाए

Love Is The Only Medicine For This World रास्ते बदलते रहें लेकिन लक्ष्य न ओझल होने पाए इसलिए कदम ध्यान से बढ़ाते जाना।  प्रयत्न की विधियां बदलती रहनी चाहिए।  जिस तरिके से सीखने में उन्नति होती  हुई दिखाई न दे उस पर अड़े रहना समझदारी नहीं होती।  उस रीति /तरिके में बदलाव करके दूसरे ढंग अपनाने में कोई बुराई नहीं , याद रहे हम लक्ष्य थोड़ी बदल रहे हैं ,सिर्फ रास्ते में बदलाब हो रहा है। सीखने का तो उद्देश्य ही होता  है अलग - अलग तरिके ढूँढना जो शिक्षार्थियों के लिए आसान तथा लाभकारी हों। गणित सिखाने का तरीका  भी तो यही होता है कि विद्यार्थी को थोड़े से प्रश्न हल करने के लिए दिए जाएँ लेकिन उन प्रश्नों को अलग -अलग विधियों के प्रयोग द्वारा हल करने का आदेश दिया जाए जिससे शिक्षार्थी को समझ आ जाये कि कोन सी विधि कहां अच्छे परिणाम देगी। मतलब साफ है जितने भी वैकल्पिक तरिके हैं सभी को आजमाना चाहिए जब तक मन माफिक परिणाम नहीं मिलते।  सभी रीतियां सभी के लिए नहीं होती हैं , ये बात हमेशा याद रखना है। आपको अपने लिए सर्वोत्तम रीति ढूंढनी है। किसी सफलतम व्यक्ति द्वारा...

How to Learn New Things or Tough Subjects Successfully ?मतलब ये है कि आप अपने बचपन में लौट जाइये अर्थात बच्चे बन जाइये

Love Is The Only Medicine For This World जानवरों तथा मनुष्यों का सीखने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है।  जीवों के सीखने की प्रक्रिया ,'कोशिश और गलती अर्थात trial and error ' नियम पर आधारित होती है । सीखने वाले के लिए शुरूआती प्रयत्न किसी विज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं होते। प्रारंभिक छोटी -छोटी कोशिशों से मनुष्य को सफलता के रास्ते की कठिनाइयों तथा अपनी कमियों का पता चलता है ,जिनको दूर करने के प्रयत्न वह आरम्भ कर देता है। शुरुआती प्रयत्न इतना तो समझा ही देते हैं कि वे कौन  से  तरीके हैं जिनसे लक्षित क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती और वह नए तरिके अपना कर अपनी कोशिशों को नए आयाम देना भी आरम्भ करदेता है। सीखना मानसिक दक्षता का आधार है।  हर सीखने वाले की दक्षता अलग -अलग होती है अतः सीखने के लिए कितना समय लगता है यह भी हर किसी की दक्षता पर ही निर्भर करता है।  कौरव तथा पांडव गुरु द्रोणाचार्य जी के आश्रम में शिक्षा के लिए  गए।  गुरु जी ने पहला पाठ पढ़ाया "सदा सच बोलो " | अगले दिन गुरु जी ने पाठ सुनाने को कहा तो सिवाए युधिष्ठिर के सभी ने पाठ रट कर सुना...

दुनियां का सफल व्यक्ति कौन है ? Who is successful person of this world?

प्रश्न :- दुनियां का सबसे सफल व्यक्ति कौन ?  उत्तर :- जिसकी इच्छा शक्ति सुव्यवस्थित हो। यही साधारण लेकिन गूढ़ रहस्य है।  इस संसार की सबसे बड़ी पूँजी है " एकाग्र चित्त" अर्थात सुव्यवस्थित इच्छा शक्ति। कुछ भी नया सीखने की चाह भर से कुछ नहीं होगा , प्रयत्न प्रारम्भ करने होंगे।  नया काम आरम्भ करना बहुत कठिन क्रिया है , इस लिए जो भी शुरू करना चाहते हैं अभी शुरू कर दो।  याद रखो "अभी नहीं तो कभी नहीं " | सार्थक प्रयास , मनोयोग से की गयी कोशिश हो सकता है बहुत महान कार्य की तरफ अग्रसर होने की छोटी सी शुरुआत हो! अच्छा वक्ता बनना है तो आज ही शुरुआत करो , नित्य कोशिश करो अब्राहिम लिंकन की तरह , एकांत में जा कर भाषण देने की प्रेक्टिस करो लेकिन प्रेक्टिस रोज  करो बिना छुट्टी किये लगातार पूरी तन्मयता के साथ , आज के भाषण से कल का भाषण अच्छा होगा यह ध्यान रखें। नाम याद नहीं होते तो अभी जो व्यक्ति पहले मिले उसका नाम याद रखने की मेहनत शुरू करो।  जो भी विधा आप सीखना चाहते हैं ,  बस शुरू हो जाइये।  बस , ध्यान देना की मेहनत  का अर्थ  ...

Desire/Wish And Will Power / इच्छा तथा दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति

सबसे अधिक महत्वपूर्ण है इच्छा  तथा दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति  का सही अनुमान तथा सही अर्थ समझ में आना। सीखने की इच्छा या सीखने के लिए दृढ संकल्प में बहुत बड़ा अंतर् है। पहली तो एक साधारण अभिलाषा है और दूसरा अभिलाषा को पूरा करने का साहसपूर्ण तथा सक्रिय प्रयत्न है।  सीखने की इच्छा बिखरी हुई तथा साधारण होती है , परन्तु दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति केंद्रित तथा निश्चित वस्तु है। सीखने की इच्छा का अर्थ है हम काम या क्रिया को बार -बार दोहराते हैं और आशा करते हैं कि कोई फायदा हो। लेकिन दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति दोहराने से भी आगे ले जाती है , हर कदम पर विश्लेषण करना और असफलता के कारणों को ढूँढना विवेचना करना फिर सुधार की गुंजाईश तथा सुधार के उपयुक्त तरीके अपनाना शामिल हो जाता है। दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति का तातपर्य है दृढ़ता से मन तथा प्रयत्न को केंद्रित करना। इच्छा तथा दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति में बहुत बड़ा अंतर् आवश्यक है परन्तु 'इच्छा ' परम् आवश्यक है। साधारण इच्छा /शौक /रूचि नींब है 'दृढ़ संकल्प/इच्छा शक्ति' की।  अगर साधारण इच्छा  /शौक /रूचि ही नहीं है तो संकल्प या उत्साह का तो प्र...

You are Your Friend And Foe - Lord Krishana

मनुष्य अपना मित्र आप ही है और अपना दुश्मन भी आप ही है , ये बात भगवान श्री कृष्ण ने ज़ोर दे कर गीता में कही  है। वैज्ञानिक शोध भी यह सिद्ध करते है।  कई विद्यार्थी खूब पढ़ाई करते हैं ,दोहराते रहते हैं लेकिन परीक्षा में फिसडी साबित होते हैं, क्या कारण  है ? कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है ? जिन्होंने इसके ऊपर विचार किया उन्होंने कई तरह से कोशिश करके निष्कर्ष भी नकाले हैं , आपके लिए कुछ उदाहरण समर्पित हैं :- कुछ विद्यार्थयों को  थोड़े से शब्द रटने के लिए दिए गए , क्योंकि उनको ये शब्द लक्ष्य के रूप में दिए गए थे , 8 से  15 बार शब्दों को दोहराने से वे  शब्द सभी को याद हो गए। परन्तु जब वही शब्द कुछ अन्य विद्यार्थियों को  ऐसे ही याद करने के लिए दिए गए तो इन शब्दों को याद करने के लिए 75 से 100 बार दोहराना पड़ा। देखा - सिर्फ विद्यार्थियों की प्रगाढ़ इच्छा शक्ति इतना बड़ा अंतर् पैदा कर देती है।  स्कूल के कुछ छात्रों को ब्लैकबॉर्ड पे  कुछ शब्द लिख कर अपनी कॉपी में उतारने के लिए दिए गए। फिर अचानक उनको बिना देखे शब्द लिखने के लिए कहा गया। अगले दिन छा...

Why Most Of The Intelligent Students Ends In Disaster ?

हम जानते हैं कि मानव मस्तिष्क के तीन प्रमुख तत्व हैं जो मनुष्य को नियंत्रित करते रहते हैं अर्थात एक कड़ी में बाँध कर रखते हैं।   ये तीनो ही आपस में मिश्रित हैं और  किसी भी तत्व की कमी अन्य दो को भी निकम्मा कर देती है या फिर अन्य दो मिलकर तीसरे की कमी को पूरा कर लेते हैं। गाडी के तीन प्रमुख तत्व  इंजन , ईंधन तथा चालक सभी अलग -अलग  हैं। परन्तु मानव मस्तिष्क के तीन प्रमुख तत्व भावना  , बुद्धि और संकल्प शक्ति इकठ्ठे हैं तथा क्रिया -प्रतिक्रिया करके एक -दूसरे को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। मानलो एक पुस्तक आप ने खरीदी और पढ़ने बैठ गए। यदि पुस्तक आपको पसंद है तो आप बड़े मजे से आनंद लेते हुए पुस्तक पढ़ेंगे।  सबकुछ समझ भी आएगा और याद भी रह जायेगा। क्योंकि आपकी पुस्तक के प्रति भावना बहुत प्रबल है तो आप सारी पुस्तक जल्दी ही पढ़ कर ,समझ कर बहुत खुश हो जायेंगे । इसके विपरीत अगर पुस्तक के प्रति भाव अच्छे नहीं हैं ,रूचि नहीं है तो हो सकता है मज़बूरी में आपकी नज़रें पुस्तक पे हों लेकिन मन वहां नहीं होगा। आप तीव्र बुद्धि हैं परन्तु उस पुस्तक का विषय आपको समझ ही नही...