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Gujarat Election - One Sided Battle

Love Is The Only Medicine For This World हमारे लिए शब्दों का महत्व आजकल बहुत अधिक होता है अगर वे नकारात्मक हैं , अगर शव्द सकारात्मक हैं तो अधिकतर लोग उनकी तरफ ध्यान भी नहीं देते।  यही हालात हमारे जीवन में भी हैं जो भी कुछ अच्छा है वो दिखता ही नहीं है लेकिन नकारात्मकता की मोटी चादर हमारे मन और चित को पूर्ण रूपेण ढके रहती है।  गुजरात चुनाव में भी यही हो रहा है , समाज को जाति के नाम पर बांटा गया और फिर धर्म के नाम की राजनीति मुख्य मुद्दा हो गयी।  गुजरात में विकास मुख्य मुद्दा पिछले चुनावों में था लेकिन इस बार पटेल आरक्षण मुहीम को इतना अधिक प्रचार मिला की चुनाव के मुद्दे सिमट कर जाति और धर्म तक ही सीमित हो गए।  दोष नेताओं को नहीं दे सकते समाज को जनता को जैसा चाहिए वही मुद्दा मुख्य हो जाता है। गुजरात के चनावों को काफी महत्व पूर्ण मन जा रहा है क्योंकि मोदी का राज्य है और इसके विकास मॉडल के  नाम पे ही मोदी सत्ता में आये थे।  कान्ग्रेस् ने आरक्षण तथा और कई बातों को जाति से जोड़ कर चुनावों से पहले ही विकास को पागल करार दे कर गुजरात को पिछड़ा राज्य घोषित कर दिया...

Kindness is Quality of India/ रामदेव दुश्मनो की चालों से अनभिज्ञ नहीं हैं

पिछले दिनों में एक विचार ने मुझे काफी विचलित किया और परिणाम स्वरूप मैंने अपने लेखन में बदलाब करने का निर्णंये लिया।  सकारात्मकता को अब मैंने अपने लेखन की सर्वश्रेष्ठ पूँजी बनाने की शुरुआत की है। राजनितिक विचार और कटाक्ष भी होंगे लेकिन मूलतत्व "सकारात्मकता " अब मुख्य ध्ये होगा।  क्योंकि अपने लोगों तथा समाज की अगर तारीफ हम नहीं करेंगे ,अच्छे कामो की अगर रौशनी हमारे समाज में फैलानी है तो नकारात्मकता को छोड़ना होगा।  ओबैसी क्या कहता है क्या फरक पड़ता है , JNU में कुछ एक मूर्ख लोग देश तोड़ने की बात करें तो उनको महत्व क्यों दें ? बल्कि देश में हो रहे अच्छे काम तथा करने वालों के बारे में बात करेंगे तो कुछ सीखने को मिलता रहेगा।  शव्दों का असर बहुत  है ,ऐसे ही कर्मो का भी। हमारे देश में नकारात्मकता जानकर या अनजाने में फैलाई गयी है क्या फरक पड़ता है , मूलतत्व है  आज़ादी के बाद से हमारे हीरो और पहचान तथा इतिहास सभी पर परोक्ष रूप से प्रशन चिन्ह लगा दिए गए , पढ़ाई में इतना बदलाब हुआ के लोग भारतीयता का सही रूप ही भूल गए। एक युवा ने प्रशन किया "भारत हमारी माता कैसे हो सकता ह...

SECULAR AND COMMUNAL NEWS /जनता को गुमराह करना भारत में बहुत आसान है

अगर भारत की बर्तमान स्थिति देखि जाये तो एक बात समझ में आती है देश दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंट चूका है एक RSS  वाली दूसरी ISIS वाली। अब आप स्वयं देखें JNU  के विद्वान , कांग्रेस के सिपेसलार , मुस्लिम्स तथा ईसाई नेता अधिकतर लोग पाकिस्तान जिंदाबाद कहने में शर्म महसूस नहीं  करते हैं लेकिन भारत माता की जय कहने से अच्छा इनको मरना लगता है।स्थिति खतरनाक इस लिए महसूस होती है क्योंकि देश में नकारात्मकता को मुख्य ख़बरों में जगह मिलती है लेकिन सकारात्मक बदलाब और सकारात्मक ख़बरें कहीं छुपा दी  जाती हैं। पिछले दिनों गुजरात के एक व्यवसायी ने 200 करोड़ रूपये बेटिओं के लिए दान कर दिए , जिस घर में दूसरी बेटी जन्म लेगी उस परिवार को 2 लाख से अधिक रूपये मिलेंगे।  बिडम्बना देखिये ये दिलेरी या दरियादिली सुर्खी नहीं बन सकी लेकिन देशद्रोही का संसद मार्च प्राइम टाइम की खबर बना दी गयी।  दिल्ली में विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समारोह होता है 35 लाख लोग देश और विदेश से आकर  हिस्सा लेते हैं , भारत में दुनिया धन्यबादी होकर आयी , बिना ख़ुशी -सुख मिले कौन लाखों रुपए खर...

JNU ISSUE - United India

देश में जिस तरह की हवा बनायी जा रही खतरे की संभावना बढ़ रही है ऐसा दिख रहा है ,लेकिन साधारण जन -मानस की खरी-खरी दो टूक बातें सुन कर मुझे महसूस हो रहा है के अब देश के अच्छे दिन आ रहे है।  JNU हादसे ने देश को जोड़ने का बहुत महत्वपूर्ण काम किया है।  देश की जनता को  बिना कुछ किये साफ़ -साफ़ पता चला के देश में जो देश बिरोधी गतिविधियाँ चलती रही हैं उनको समर्थन कहाँ से मिलता रहा है।  राहुल गांधी , केजरीवाल , समाजवादी ,जनता दल बहुजनबादी और कम्युनिस्ट् विद्वानो का  खुल कर देश द्रोहियों के समर्थन में आना पूरी की पूरी कहानी ब्यान कर गया।  किसी को कुछ कहना या सुनना ही नहीं पड़ा , लेकिन जनता ने एक सुर में देश प्रेम और सम्मान को महत्वपूर्ण बता कर एक कड़ा संदेश दे दिया है के , जो भी हो देश के विरुध बोलने वालों को बक्शा नहीं जाएगा।  अब केंद्रीय विश्वविद्यालओं में तिरंगा फहराने के विरोध ने जनता को पक्का यकीन दिलवा दिया है के देश को अस्थिर और तोड़ने की साजिश करने वाले जितने अधिक देश के बाहर हैं उससे अधिक संख्या देश के अंदर है और ये दोषी लोग धर्म ,मज़हव या जाती की आढ़ में छुपे ह...

Modi's Clothes, Bihar Elections and Secularism ! / बिहार में मोदी के कपडे चुनावी मुद्दा है ?

दो रंगियां ये ज़माने की ,जीते जी है सब , कि मुर्दों को  न बदलते कफन देखा। ये शेयर 'ग़ालिब 'ने कई साल पहले राहुल गाँधी व कांग्रेस ठगबंधन को ध्यान में रखते हुए लिख दिया था , जिसका अर्थ है कपडे जिन्दा लोग ही बदलते है मुर्दे नहीं। बिहारचुनाब रैलियों में कांग्रेस ठगबंधन का एक मुद्दा "नरेंदर मोदी द्वारा बार -2 कपड़े बदलना भी है " . पता नही बिहार की जनता को इस बार महाठगबंधन के मुद्दे सुहाये भी है यां नही , महाठगबंधन द्वारा कोई भी मुद्दा जनता से जुड़ा हुआ नहीं उठाया गया। लेकिन  सोशल साईटस जैसे फेसबुक और व्हाट्स एप्प  ने चुनाबो में काफी प्रभाव डाला है। मोदी दिन में 100 कपड़े बदले इससे देश को क्या फर्क पड़ता है, पंडित नेहरू के कपड़े लंदन से धुल कर और प्रैस हो कर आते थे ,ये बात बताते समय  कांग्रेसियों का सीना फटने को हो आता था। कांग्रेसी लोग आँख बंद करके मंत्र मुक्त्त हो जाते थे ,जैसे नेहरू साहब के कपड़े ही नही धुलते थे लंदन में बल्की भारत का भाग्य भी साफ हो जाता था ,गरीब का स्नान हो जाता था ,साधरण भारतीय कृत -2 हो जाता था। वो  दिन भी बीत गए ,अब राहुल गाँ...

Make In India / विपक्ष परेशान क्यों है 'मेक इन इंडिया' से

कुदरत का नियम है सभी एक दूसरे से सीखते हैं ,यहां मौलिकता का दावा कोई नहीं कर सकता। फिर सरकार के 'मेड इन इंडिया 'अभियान का बिरोध क्यों ? भारत सरकार ने दुनिया की सभी बड़ी कम्पनियो को  भारत आकर निर्माण करने का न्योता दिया ,इसका फायदा सबसे पहले  तो रोजगार के रूप में होगा , दूसरे हमारे लोग तकनीक भी सीख सकेंगे। 80 के दशक में HERO-HONDA,ESCORT-YAMAHA, TVS -SUZUKI  आदि कम्पनियो ने भारत में काम शुरू किये थे। भारत और बिदेशी कम्पनियो के साझे उपकर्म थे ,उस समय भारत के लोगों के पास गाड़ियां बनाने की नई तकनीक नहीं थी।  परन्तु आज दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल कंपनी "हीरो" भारत की है। पेंटागन  ,एप्पल तथा वोेइंग  के साथ मिलकर ऐसे सैंसर  तैयार कर रहा है जो सिपाही पहन भी सकें और जहाज की वाड़ी  पर भी लगाए जा सकें। अब अगर भारत को ऐसा  ही कुछ निर्माण करना है तो दो  रास्ते है एक तो भारत के विज्ञानिक खुद ही खोज करें या भारत अमेरिकी कम्पनियो से सहयोग लेकर वर्तमान मांग को पूरा करें लेकिन भबिष्य के लिए भारतीय खोज जारी र...

Problem of India is Congress ! / भारत की सबसे बड़ी समस्या कांग्रेस है !

चीन और रूस का सीरिया में ISIS पे आक्रमण अमेरिका के लिए चिंता का विषेय हो सकता है या फिर डरना चाहिए पाकिस्तान को , भारत के लिए तो सोचने का मौक़ा है के "कब पाकिस्तान में आतंकियों के कैम्पों पर रूस की तरह हमला करना है"। मीडिया हमेशा से बात का बतंगड़ बना देता है , लेकिन सीरिया में बदले समीकरणों से भारत के मीडिया को मरोड़ क्यों लग रहे हैं समझ से परे हैं।  रूस तो सीरिया में अपनी दोस्ती निभा रहा है , अमेरिका अपनी दूकान चला रहा है लेकिन चीन का सीरिया का रुख साफ़ -साफ़ बताता है के चीन में सब कुछ ठीक नहीं है। भारत के लिए चिंता का विषय आज के दिन सिर्फ कांग्रेस और कांग्रेस का सेक्युलर ठगबंधन है।  सूत्रों की माने तो देश में बदलाब की जो लहर मोदी सरकार चलाना चाहती है वह विपक्ष को किसी भी कीमत पर सुहा नहीं रही  है।  G S T बिल पास होना , मोदी सरकार  द्वारा व्यापारियों के साथ किया गया बादा पूरा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ये बिल व्यपार में चोरी भी कम करेगा ऐसा माना जा रहा , लेकिन कांग्रेस  ठगबंधन के लोग राज्यसभा में सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करने में कोई क...

नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस और खानदानी बहादुर कांग्रेस कार्यकर्ता

 किसी संगठन या राजनितिक दल के सम्पूर्ण काडर को  अगर बहादुरी का मेडल देने की बात चले तो मेरी पसंद कॉंग्रेसी होंगे। इस संगठन की नींव 1885 में भारतियों को राजनीतिक नेतृत्व दिलवाने की सोच से किया गया था।  संगठन के लिए देश और देश की जनता सर्वोपरि थी , महात्मा गांधी , सुभाष चन्द्र बॉस , सरदार बलभभाई पटेल , लाल बहादुर शास्त्री आदि  लिस्ट बहुत बड़ी है लगभग सभी महान बिभूतियाँ जो आज़ादी की जंग में शामिल  थे ,कांग्रेस से भी जुड़े थे। अच्छा आज़ादी मिलते ही महात्मा गांधी ने मांग कर दी के कांग्रेस को भंग करदो क्योंकि देश आज़ाद हो चुका है और अब कॉंग्रस्स की ज़रूरत नहीं है। खैर , ये मांग नहीं मानी गयी और वक़्त के करवट लेते ही नयी कांग्रेस देश के सामने आ गयी , इस कांग्रेस में देश के लिए कोई जगह नहीं है और ना ही देश सेवा के लिए , एक और बात यहाँ नागरिक भी "भारतीय" ना होकर जाति -धर्म से पहचाने जाने लगे।  देश के सभी महान सेवक कहीं गुम हो गए और सिर्फ एक ही  परिवार देश का खैरख्वा हो गया , जी हाँ राहुल गांधी उसी परिवार की खेती हैं। वक़्त का फेर देखिये अब कोंग्रेसियों को ...

बीजेपी के नेता इस तरफ भी ध्यान दें

अच्छा, सबसे अधिक मज़ा आजकल टीवी पर कांग्रेस नेताओं को सुनने में आता है , आज  डाक टिकटों पर गांधी परिवार के  एकाधिकार को मोदी सरकार की चुनौती पे चर्चा सुन कर महसूस हुआ के जो भी मैनेजमेंट की किताबों में लिखा गया है , कांग्रेसी  बिना पढ़े हाईकमान की चम्पी करके ही वो ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं। रशीद अल्वी जैसे कई नेता इस बात को सार्थक करते हैं। जो भी हो मोदी सरकार की नेहरू-गांधी के इलावा जो देश के नेता और स्वतंत्रता सैनानी हुए हैं उनको सम्मान देने की इच्छा ने 'अच्छे दिनों के संकेत दे दिए हैं ' . लालू यादव और नितीश कुमार का ढगबंधन बिहार की जनता को रास नहीं आ रहा है ये रुझान मिल रहा है।  लालू के टाइम में बिहार में सड़कें नहीं बनी , लालू कहते थे 'अगर सड़क बनेगी तो पुलिस आपके घरों तक जल्दी पहुँच जायेगी ,अगर बिजली जलेगी तो पुलिस रात को दूर से आपका घर देख लेगी तो आप शराब कैसे बनाओगे इस लिए ना सड़क और ना बिजली की ज़रूरत है। ' पता नहीं बिहार की जनता उन दिनों को भूल गयी है या याद हैं। नितीश के विरुद्ध लालू एक नारा दिया करते थे "ऐसा कोई सगा नहीं ,जिसे नितीश ने ठगा नहीं " ले...

हिमाचल में 500 इलेक्ट्रिक बसें - पर्यावरण के नाम पे कितने डकारें जाएंगे

आज खबर आई के  हिमाचल में 500 इलेक्ट्रिक बसें अर्थात बिजली से चलने वाली बसें खरीदी  जाएंगी। हिमाचल के जिला ऊना से इस नयी बस सेवा की शुरुवात हो सकती है।  इस की ज़रुरत इस लिए पड़ी क्योंकि वाहन प्रदुषण के कारण गलेशियर पिघल रहे हैं ,मौसम पर बुरा असर पड रहा है ,ये कहना है हिमाचल के परिवहन मंत्री का। ये सुन कर एक बार तो झटका सा लगा मुझे , जिस जिला ऊना में बिजली चलित बसें शुरू की जाएंगी बहां आज पर्यावरण की हालत इतनी खराब है के सांस की बिमारी ,किडनी ,हृदय रोग ,कैंसर आदि के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। लेकिन ये बीमारियां सिर्फ  वाहन प्रदुषण से नहीं फ़ैल रही हैं. गहराई से जांच करने पे मैंने पाया के पेड़ों की संख्या दिन व् दिन बहुत काम होती जा रही है , जिला ऊना की जीवन रेखा समझी जानेवाली स्वां नदी (सोमभद्रा ) अपने अस्तित्व की आखरी लड़ाई लड़ रही है। इस नदी पे अनगिनत स्टोन क्रेशर लगवा दिए गए है , अच्छा ये नदी ऐतिहासिक महत्व भी रखती है , रामायण -महभारत काल  में इस नदी के किनारों पे भी खूब खेल खेले थे पांडवों ने भी , इस  किनारे कई ऐ...

सैनिकों का बुलंद होसला देखना चाहती है सरकार - नरेन्द्र मोदी

फरीदाबाद मेट्रो के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गति-प्रगति रैली  भाषण के मुख्य बिन्‍दु प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत भारत मां की जयघोष करते हुए जय जवान,जय किसान के नारे के साथ की। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरियाणा मेरा दूसरा घर है। उन्होंने कहा कि गुजरात छोड़ने के बाद मैंने वर्षों तक हरियाणा में अपना जीवन बताया और यहां के हर गांव-हर गली से परिचित हूं। उन्होंने कहा कि आपके प्यार को कभी नहीं भूल सकता, इसी वजह से मैं बार-बार खिंचा चला आता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आपके इस प्यार को ब्याज सहित विकास के रूप में लौटाऊंगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि देश राजनीति से नहीं राष्ट्रनीति से आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि हमारा एकमात्र मंजिल विकास है। उन्होंने ने एक बार फिर 2022 तक हर गरीब को घर देने की बात दोहराई। रैली में वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने पूर्व सैनिकों से जो वादा किया था, उसे निभाया है। श्री मोदी ने कहा कि वीआरएस के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "ऐसे जवान जो मोर्च...

एक तरफ पाकिस्तान -लालू परसाद -नितीश -सोनीया -केजरी का महाठगबन्दन - दूसरी तरफ मोदी !

देश के अंदर किसी भी तरह से अस्थिरता लाना और बाहर पाकिस्तान का एटम बॉम्ब से धमकाना एक ही सिक्के के दो पहलु लगते हैं।  जिस तरह की भाषा नितीश -लल्लू -सोनिया -केजरी बोल रहे हैं उससे एक बात तो साफ़  है के मोदी सरकार को चारो तरफ से घेरने की तैयारी पूरी प्लानिंग के साथ हो रही है. आरक्षण का भूत जो पटेलों ,जाटों,गुज्जरों के सर चढ़ रहा है  उसमे घी/तेल डालने वाले महाठगबंधन की चांदी दिख  रही है। उधर रिटायर फौजियों का देश सेवा के बदले देश की आमदनी में हिस्सा मांगना या यूँ कहें माँ की सेवा का मुआबजा मांगना और फिर 1965 के युद्ध के 50 जीत उत्सव का बहिष्कार बताता है के देश के हालात बदतर बनाने की पूरी साजिश की गयी है। ये जो भी बारदातें  हो  रही हैं एक -दूसरे से बिलकुल  जुडी हुई हैं।  मोदी के प्रधान मंत्री बनने से सिवाये देश भक्तों के सभी दुखी थे और अमेरिका से लेकर चीन - पाकिस्तान आदि देश तो एक दम सदमे में पहुँच गए थे। मोदी सरकार द्वारा भूमि अधग्रहण बिल रोकना सही वक्त पर लिया गया सही फैसला है।  मोदी का  विधयक मुझे पसंद था लेकिन ...