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हिमाचल में 500 इलेक्ट्रिक बसें - पर्यावरण के नाम पे कितने डकारें जाएंगे









आज खबर आई के  हिमाचल में 500 इलेक्ट्रिक बसें अर्थात बिजली से चलने वाली बसें खरीदी  जाएंगी। हिमाचल के जिला ऊना से इस नयी बस सेवा की शुरुवात हो सकती है।  इस की ज़रुरत इस लिए पड़ी क्योंकि वाहन प्रदुषण के कारण गलेशियर पिघल रहे हैं ,मौसम पर बुरा असर पड रहा है ,ये कहना है हिमाचल के परिवहन मंत्री का। ये सुन कर एक बार तो झटका सा लगा मुझे , जिस जिला ऊना में बिजली चलित बसें शुरू की जाएंगी बहां आज पर्यावरण की हालत इतनी खराब है के सांस की बिमारी ,किडनी ,हृदय रोग ,कैंसर आदि के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। लेकिन ये बीमारियां सिर्फ  वाहन प्रदुषण से नहीं फ़ैल रही हैं. गहराई से जांच करने पे मैंने पाया के पेड़ों की संख्या दिन व् दिन बहुत काम होती जा रही है , जिला ऊना की जीवन रेखा समझी जानेवाली स्वां नदी (सोमभद्रा ) अपने अस्तित्व की आखरी लड़ाई लड़ रही है। इस नदी पे अनगिनत स्टोन क्रेशर लगवा दिए गए है , अच्छा ये नदी ऐतिहासिक महत्व भी रखती है , रामायण -महभारत काल  में इस नदी के किनारों पे भी खूब खेल खेले थे पांडवों ने भी , इस  किनारे कई ऐतिहासिक मंदिर भी निर्मित हैं। खैर , आज जितने  भी कारखाने जिला ऊना में लगवाए जा रहे हैं उन सभी का कूड़ा इस नदी में ही डाला जा रहा है , इस नदी का प्रदुषण वाहनो के धुएं से नहीं नेताओं के मक्कारी भरे स्वभाव की देन है। क्षेत्र में पीने के पानी में यूरिआ आदि बहुत मात्रा में पाया जा रहा है नतीजतन किडनी रोग से पीड़ित लोगों की संख्या रोज बढ़  रही है।  छोटे छोटे बच्चे भीषण बीमारियों के शिकार हो रहे है लेकिन नेता कहते हैं बसें बदलने प्रदुषण खत्म हो जाएगा , कोई बताये के स्टोन क्रेशर से जो घातक पैमाने से वायु प्रदुषण हो रहा है , उसका क्या इलाज़ करेंगे ये नेता जी। ये भी छोड़ो , ध्वनि प्रदुषण जी हाँ जी हाँ , वाहनो के हॉर्न इसका प्रमुख कारन हैं लेकिन सरकार इस तरफ संजीदा नहीं है, क्यों ? इस बात का उत्तर देंगे प्रदेश के नेता ? ऊना में जंगल के क्षेत्र में इंसानो की घुसपैठ इतनी भयानक रूप ले चुकी है के अब जंगली जानवर भी ख़त्म होने को हैं , बेसहारा पशुओं की फ़ौज खेती के लिए  अभिशाप बन रही है लेकिन इस का कोई हल नहीं ,क्यों ? कहीं ये बसें खरीदना  कमीशन की गेम तो नहीं है ? क्योंकि बस खरीद में किसी भी प्रदेश के परिवहन मंत्री और अफ़सर खूब कमीशन खाते हैं  तो पर्यावरण के नाम पे कितने डकारें जाएंगे ये दिलचसव होगा जानना 







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