मोदी के अमेरिका में दिए गए भाषण ने कोंग्रेसियों की नींद उड़ा दी है।
पिछले दिनों एक चुटकुला काफी प्रसिद्ध हुआ था जो पाकिस्तान पे बना था। गौर फरमाइयेगा " अमेरिका में अंग्रेजी सीख रहे छात्रों ने सामान्य ज्ञान पे चर्चा शुरू की , हॉट टॉपिक आतंकवाद है सो बात शुरू ही आतंकबाद से हुई। किसी ने प्रश्न किया दुनिया में सबसे अधिक आतंक फैलाने वाला देश कौन सा है , सभी इधर-उधर देखने लगे तो पाकिस्तानी लड़का गुस्से में बोला 'खुदा कसम अगर पाकिस्तान का नाम लिया तो गोलियों से भून दूँगा '…
खैर अपने भाषण में मोदी ने सिर्फ इतना कहा के पहले देश के नेताओं पे आरोप लगते थे बेटे ने ढाई सौ करोड़ का घोटाला किया , बेटी ने पांच सौ करोड़ का घोटाला किया ,दामाद ने हज़ार करोड़ का घोटाला किया आदि , लेकिन 15 महीने में मेरे पे तो कोई आरोप नहीं लगा। बस इतना सा ही तो कहा था मोदी ने लेकिन कांग्रेसियों ने इन शब्दों को पर्सनल ले लिया और इन शब्दों को देश की बेइज़ती करार दे दिया। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ के ये शब्द कैसे देश के लिए शर्मनाक हैं ? मोदी ने तो साधारण सचाई ही कही थी जिन लोगों को ये शब्द शर्म नाक लग रहे हैं, वे लोग तब कहाँ थे जब भारत में एक से बढ़कर एक घोटाले हो रहे थे और पूरी दुनिया भारत का मज़ाक उड़ा रही थी ? मोदी को ये सब बोलना पड़ा क्योंकि देश की पहचान ही कांग्रेस ने भरष्टाचार बाले देश के रूप में करवा दी थी। देश की भ्रष्टाचार वाली पहचान इतनी गाढ़ी बन गई है के दुनिया को आज भी बिश्वास नहीं हो पा रहा के 'भारत में भ्रष्टाचार पे लगाम लग चुकी है ' इस तोहमत को अगर खत्म करना है तो बिना शर्म के दुनिया के समक्ष स्वीकार करना ही पडेगा के हमारे यहां भरष्टाचार रुपी कुरीति भी थी लेकिन अब ये कुरीति खत्म हो चुकी है। क्या फर्क पड़ता है "दुनिया क्या कहेगी " वाले जुमले का। दुनिया तो भारत के भ्रष्टाचार से पहले से ही वाकिफ थे , फिर कांग्रेस की इज्जत कैसे काम हो गयी बड़ी जांच का विषेय है।
पिछले दिनों एक चुटकुला काफी प्रसिद्ध हुआ था जो पाकिस्तान पे बना था। गौर फरमाइयेगा " अमेरिका में अंग्रेजी सीख रहे छात्रों ने सामान्य ज्ञान पे चर्चा शुरू की , हॉट टॉपिक आतंकवाद है सो बात शुरू ही आतंकबाद से हुई। किसी ने प्रश्न किया दुनिया में सबसे अधिक आतंक फैलाने वाला देश कौन सा है , सभी इधर-उधर देखने लगे तो पाकिस्तानी लड़का गुस्से में बोला 'खुदा कसम अगर पाकिस्तान का नाम लिया तो गोलियों से भून दूँगा '…
खैर अपने भाषण में मोदी ने सिर्फ इतना कहा के पहले देश के नेताओं पे आरोप लगते थे बेटे ने ढाई सौ करोड़ का घोटाला किया , बेटी ने पांच सौ करोड़ का घोटाला किया ,दामाद ने हज़ार करोड़ का घोटाला किया आदि , लेकिन 15 महीने में मेरे पे तो कोई आरोप नहीं लगा। बस इतना सा ही तो कहा था मोदी ने लेकिन कांग्रेसियों ने इन शब्दों को पर्सनल ले लिया और इन शब्दों को देश की बेइज़ती करार दे दिया। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ के ये शब्द कैसे देश के लिए शर्मनाक हैं ? मोदी ने तो साधारण सचाई ही कही थी जिन लोगों को ये शब्द शर्म नाक लग रहे हैं, वे लोग तब कहाँ थे जब भारत में एक से बढ़कर एक घोटाले हो रहे थे और पूरी दुनिया भारत का मज़ाक उड़ा रही थी ? मोदी को ये सब बोलना पड़ा क्योंकि देश की पहचान ही कांग्रेस ने भरष्टाचार बाले देश के रूप में करवा दी थी। देश की भ्रष्टाचार वाली पहचान इतनी गाढ़ी बन गई है के दुनिया को आज भी बिश्वास नहीं हो पा रहा के 'भारत में भ्रष्टाचार पे लगाम लग चुकी है ' इस तोहमत को अगर खत्म करना है तो बिना शर्म के दुनिया के समक्ष स्वीकार करना ही पडेगा के हमारे यहां भरष्टाचार रुपी कुरीति भी थी लेकिन अब ये कुरीति खत्म हो चुकी है। क्या फर्क पड़ता है "दुनिया क्या कहेगी " वाले जुमले का। दुनिया तो भारत के भ्रष्टाचार से पहले से ही वाकिफ थे , फिर कांग्रेस की इज्जत कैसे काम हो गयी बड़ी जांच का विषेय है।
खैर , पूरी दुनिया का मीडिया मोदी मय हुआ पड़ा है सिलिकॉन वेल्ली में जुकरबर्ग समेत सभी व्यपारी मोदी के मुरीद हो गए और तो और मोदी को दुश्मन नंबर -1 मानने वाला पाकिस्तानी मीडिया और नागरिक सभी आज मोदी के मुरीद हुए पड़े हैं
ये भी वक़्त वक़्त की बात है कांग्रेस ने पिछले 10 साल सरदार मनमोहन सिंह को सिर्फ कठपुतली से अधिक कुछ नहीं समझा तो दुनिया उनको कैसे जानेगी ? मनमोहन सिंह एक काबिल इंसान हैं लेकिन संगत गलत लोगों की करी है तो रंगत चढ़नी भी लाजमी है। जैसे भीष्म पितामह महान थे लेकिन दुर्योधन की संगत ने उनकी महानता और श्रेष्ठता को ग्रहण लगा दिया था।
अब केजरीवाल को भी समझना पडेगा के मोदी उसका बाप है , उसने प्रश्न उठाया था के विदेश दोरो से क्या फायदा हुआ ?
तो जवाव है पिछले एक साल में जितना भी विदेशी निवेश भारत में हुआ उसका 64 % उन देशों से हुआ जहाँ मोदी गए थे।
राहुल गांधी का अभीतक कोई पता नहीं चला है और कोंग्रेसियों को कोई फ़िक्र ही नहीं है
"ये भी पहली बार है जब फेसबुक तिरंगे में रंगा हुआ है... लेकिन ना तो 15 अगस्त थी ना ही 26 जनवरी , हम कह सकते हैं झुकती है दुनिया झुकानेवाला चाहिए".



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