"भारत अब खड़ा हो रहा है ,
देखा था कभी गिडगडाते हुए ,
अब दहाड़ने लगा है देश मेरा बड़ा हो रहा है ,
गरीबी -ग़ुरबत ही मुद्दा थी कभी ,
अब काज और व्याज से व्यपार हो रहा है ,
देश मेरा नहीं सो रहा है।
कभी विदेशों के आगे चम्पी करते थे देश के नेता ,
आज आँख में आँख डालकर राज हो रहा है ,
सच्ची बात है भारत अब खड़ा हो रहा है।
मेहनत करने वालों को रस्ते नहीं थे बढ़ने के ,
आज छोटा सा बच्चा भी जहाज ढूंढ रहा है ,
सच में देश विज्ञान मय हो रहा है , जन - जन का कल्याण हो रहा है ,
देश से कूड़ा साफ़ रहा है क्योंकि अब भारत महान हो रहा है। "
एक बात तो माननी पड़ेगी के नरेंदर मोदी की मेहनत साफ़ दिखती है , साधारण जनता मुहं भर के मोदी की तारीफ़ कर रही है लेकिन एक कमी तो है 'भूमि बिल ' के बारे में सच जनता तक पहुंचाने में मोदी के इलावा कोई बीजेपी नेता आगे नहीं आया। शत्रुघ्न सिन्हां सरीखे नेता जो नितीश और केजरीवाल तथा लल्लू यादव के तलवे चाटने में गुरेज़ नहीं करते स्वयम ज़िमेदारी ले कर देश हित में भूमि बिल के फायदे बताने आगे नहीं आये । बीजेपी का दुर्भाग्य ये है के अधिकतर नेता कामचोरी की आदत से ग्रस्त हैं , जितनी मेहनत इस समय मोदी सरकार कर रही है देश को पटडी पर लाने के लिए उतने ही बीजेपी के नुक्कड़ नेता जनता से दूर जा रहे हैं। देश के किसी भी हिस्से में बीजेपी के ज़मीनी नेता जनता से सीधे नहीं जुड़ पाये परिणाम स्वरुप भूमि बिध्येयक के बारे में कांग्रेस और मीडिया जनता को गुमराह करने में सफल रहे।
देश में राजनितिक मुद्दे अब सिमट कर विकास के इर्द-गिर्द आ गए हैं , इसका श्रेय मोदी को जाता है क्योंकि विकास को मुद्दा बना कर चुनाब लड़ने की पहल मोदी ने ही करी वर्ना चुनाव तो बोझ लगने लगे थे।
भारत अमेरिका समेत कई देशों से हथियार खरीदता रहा है लेकिन हमारे नेता इसे व्यपार ना समझ कर इसे अमेरिका का उपकार समझते रहे। मोदी ने एक जागरूक उपभोक्ता की तरह मोल -भाव किये और नतीजे दुनिया देख रही है। किसी भी देश की नीति उस देश के फायदे के लिए होती है , अमेरिका भी व्यपारी देश है और नफ़ा -नुक्सान देखने के बाद ही मोदी की परस्ती स्वीकार कर रहा है। पाकिस्तान के बिरोध में कड़े शब्दों का प्रयोग अगर अमेरिका में हो रहा है तो मोदी को इसकी वाहवाही मिलनी चाहिए , ये अमेरिकी रुख में बदलाब रातो-रात नहीं आया है , आज अमेरिका के लोगों को भी व्यपार और रोज़गार की ज़रुरत है , दुनिया भर का मीडिया अमेरिका के समाज की सच्ची तस्वीर जनता तक नहीं पहुंचता ,फ़िल्मी समाज देख कर हम लोग सोचने लगते हैं के वहां के लोग शायद हम से अलग होंगे और यही बजह थी के भारतीय नेता भी अमेरिकन्स से मोल भाव करने से डरते थे , उनको पोलिसी बदलाब के लिए कहना तो दूर की बात होती थी, उनके द्वारा हमें सामान या हथियार देना भी एहसान होता था। भारत के लिए अपनी पहचान बनाना ज़रूरी था और मोदी ने ये काम सबसे पहले किया , हम देखते हैं के भारत में लोग बार-बार प्रशन करते हैं 'मोदी क्यों रोज़ रोज़ विदेशी दौरा करते हैं या विदेशों में ही घुमते रहते हैं' . परन्तु किस कारण से मोदी को घूमना पड़ रहा है ये जानने की बहुत कम लोग कोशिश करते हैं। खैर , संयुक्त राष्ट्र सभा में मोदी के भाषण ने दुनिया को फिर से एक नयी दिशा देने की कोशिश करी है , भारत और संयुक्त राष्ट्र की योजनाएं एक दुसरे की पूरक हैं , जब सब का लक्ष्य एक ही है तो फिर अलग -अलग कोशिशें क्यों ? ये सन्देश मोदी दुनियां को देने में कामयाब हुए हैं।
दुनिया के बड़े-बड़े व्यपारियों का मोदी से मिलना और उनका भारत की तरफ ध्यान देना किसी महान सफलता से कम नहीं है। भारत का मीडिया और कांग्रेस जितना भी नकारात्मक प्रचार करें ,धरातल पर सच दुनिया देख रही है।
अब ज़रूरत मोदी समर्थकों की सार्थक पहल की होगी , जनता के साथ संवाद में कमी नहीं आनी चाहिए।
बीजेपी के पुराने नेता नए लोगों को ज़मीनी स्तर पर संगठन से जुड़ने ही नहीं दे रहे , युवा ख़ास करके हताश हो जाते हैं बीजेपी नेताओं के ऐसे व्यवहार से , मेरा युवाओं के सन्देश है 'अगर बीजेपी के नेता आपसे संवाद और व्यवहार अच्छा नहीं करते तो दुखी होने की ज़रूरत नहीं है , आप mygov .in पे सीधे मोदी को अपना सन्देश भेजें लेकिन देश में हो रहे सकरात्मक बदलाब में भागिदार ज़रूर बने।
ये चुटकुला सोशल मीडिया में छाया हुआ है
"10 pm New york city U.S.
नवाज शरीफ - खाना खायें ..??
नरेंद्र मोदी - आप खा लें ...हमें तो
इंडिया में भी मिलता है ..!"
देखा था कभी गिडगडाते हुए ,
अब दहाड़ने लगा है देश मेरा बड़ा हो रहा है ,
गरीबी -ग़ुरबत ही मुद्दा थी कभी ,
अब काज और व्याज से व्यपार हो रहा है ,
देश मेरा नहीं सो रहा है।
कभी विदेशों के आगे चम्पी करते थे देश के नेता ,
आज आँख में आँख डालकर राज हो रहा है ,
सच्ची बात है भारत अब खड़ा हो रहा है।
मेहनत करने वालों को रस्ते नहीं थे बढ़ने के ,
आज छोटा सा बच्चा भी जहाज ढूंढ रहा है ,
सच में देश विज्ञान मय हो रहा है , जन - जन का कल्याण हो रहा है ,
देश से कूड़ा साफ़ रहा है क्योंकि अब भारत महान हो रहा है। "
एक बात तो माननी पड़ेगी के नरेंदर मोदी की मेहनत साफ़ दिखती है , साधारण जनता मुहं भर के मोदी की तारीफ़ कर रही है लेकिन एक कमी तो है 'भूमि बिल ' के बारे में सच जनता तक पहुंचाने में मोदी के इलावा कोई बीजेपी नेता आगे नहीं आया। शत्रुघ्न सिन्हां सरीखे नेता जो नितीश और केजरीवाल तथा लल्लू यादव के तलवे चाटने में गुरेज़ नहीं करते स्वयम ज़िमेदारी ले कर देश हित में भूमि बिल के फायदे बताने आगे नहीं आये । बीजेपी का दुर्भाग्य ये है के अधिकतर नेता कामचोरी की आदत से ग्रस्त हैं , जितनी मेहनत इस समय मोदी सरकार कर रही है देश को पटडी पर लाने के लिए उतने ही बीजेपी के नुक्कड़ नेता जनता से दूर जा रहे हैं। देश के किसी भी हिस्से में बीजेपी के ज़मीनी नेता जनता से सीधे नहीं जुड़ पाये परिणाम स्वरुप भूमि बिध्येयक के बारे में कांग्रेस और मीडिया जनता को गुमराह करने में सफल रहे।
देश में राजनितिक मुद्दे अब सिमट कर विकास के इर्द-गिर्द आ गए हैं , इसका श्रेय मोदी को जाता है क्योंकि विकास को मुद्दा बना कर चुनाब लड़ने की पहल मोदी ने ही करी वर्ना चुनाव तो बोझ लगने लगे थे।
भारत अमेरिका समेत कई देशों से हथियार खरीदता रहा है लेकिन हमारे नेता इसे व्यपार ना समझ कर इसे अमेरिका का उपकार समझते रहे। मोदी ने एक जागरूक उपभोक्ता की तरह मोल -भाव किये और नतीजे दुनिया देख रही है। किसी भी देश की नीति उस देश के फायदे के लिए होती है , अमेरिका भी व्यपारी देश है और नफ़ा -नुक्सान देखने के बाद ही मोदी की परस्ती स्वीकार कर रहा है। पाकिस्तान के बिरोध में कड़े शब्दों का प्रयोग अगर अमेरिका में हो रहा है तो मोदी को इसकी वाहवाही मिलनी चाहिए , ये अमेरिकी रुख में बदलाब रातो-रात नहीं आया है , आज अमेरिका के लोगों को भी व्यपार और रोज़गार की ज़रुरत है , दुनिया भर का मीडिया अमेरिका के समाज की सच्ची तस्वीर जनता तक नहीं पहुंचता ,फ़िल्मी समाज देख कर हम लोग सोचने लगते हैं के वहां के लोग शायद हम से अलग होंगे और यही बजह थी के भारतीय नेता भी अमेरिकन्स से मोल भाव करने से डरते थे , उनको पोलिसी बदलाब के लिए कहना तो दूर की बात होती थी, उनके द्वारा हमें सामान या हथियार देना भी एहसान होता था। भारत के लिए अपनी पहचान बनाना ज़रूरी था और मोदी ने ये काम सबसे पहले किया , हम देखते हैं के भारत में लोग बार-बार प्रशन करते हैं 'मोदी क्यों रोज़ रोज़ विदेशी दौरा करते हैं या विदेशों में ही घुमते रहते हैं' . परन्तु किस कारण से मोदी को घूमना पड़ रहा है ये जानने की बहुत कम लोग कोशिश करते हैं। खैर , संयुक्त राष्ट्र सभा में मोदी के भाषण ने दुनिया को फिर से एक नयी दिशा देने की कोशिश करी है , भारत और संयुक्त राष्ट्र की योजनाएं एक दुसरे की पूरक हैं , जब सब का लक्ष्य एक ही है तो फिर अलग -अलग कोशिशें क्यों ? ये सन्देश मोदी दुनियां को देने में कामयाब हुए हैं।
दुनिया के बड़े-बड़े व्यपारियों का मोदी से मिलना और उनका भारत की तरफ ध्यान देना किसी महान सफलता से कम नहीं है। भारत का मीडिया और कांग्रेस जितना भी नकारात्मक प्रचार करें ,धरातल पर सच दुनिया देख रही है।
अब ज़रूरत मोदी समर्थकों की सार्थक पहल की होगी , जनता के साथ संवाद में कमी नहीं आनी चाहिए।
बीजेपी के पुराने नेता नए लोगों को ज़मीनी स्तर पर संगठन से जुड़ने ही नहीं दे रहे , युवा ख़ास करके हताश हो जाते हैं बीजेपी नेताओं के ऐसे व्यवहार से , मेरा युवाओं के सन्देश है 'अगर बीजेपी के नेता आपसे संवाद और व्यवहार अच्छा नहीं करते तो दुखी होने की ज़रूरत नहीं है , आप mygov .in पे सीधे मोदी को अपना सन्देश भेजें लेकिन देश में हो रहे सकरात्मक बदलाब में भागिदार ज़रूर बने।
ये चुटकुला सोशल मीडिया में छाया हुआ है
"10 pm New york city U.S.
नवाज शरीफ - खाना खायें ..??
नरेंद्र मोदी - आप खा लें ...हमें तो
इंडिया में भी मिलता है ..!"

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