युवा मन की उड़ान हिमालय से ऊंची हो सकती है और प्रशांत महासागर की गहराइयों से भी गहरी हो सकती वशर्ते युवा सेवा ,साधना और स्वाभिमान को जीवन में उतार चूका हो। आजकल अधिकतर लोगों को कहते सुना जा सालता की 'इस सिस्टम का कुछ नहीं हो सकता ,सदियों से इंसान और समाज ऐसा ही रहा है कई लोगों ने कोशिश करि लेकिन समाज नहीं बदला। हा हा हा....... कितना भयंकर मज़ाक और नामसझी भरा नादान इंसान है , भाई जितने भी महान लोग हुए या समाज को सुधारने वाले हुए सभी ने अपने काम से , अपंने कर्म से ही शिक्षा दी है। जिस भी इंसान की बात को समाज अनदेखा कर रहा है सच तो ये है की वो इंसान खुद अभी कच्चा है और कच्चे फल किसी को पसंद नहीं आते फिर ये तो बातें हैं। जब तक आपके जीवन में ईमानदार कोशिश नहीं होगी आपको कोई नहीं सुनेगा। अगर कोई अपवाद हो तो बात अलग है। आपको कर्म योग को जीवन में उतरना होगा , उसके परिणामस्वरूप आपके शब्दों में 'बज़न ' होगा और बजनयुक्त शब्द चाहे ए पी जे अब्दुलकलाम के हों या भगत सिंह के चाहे नरेंदर मोदी के हों या महात्मा गांधी के सभी को एक जैसा सम्मान मिलेगा और प्रभाव भी हज़ा...