अमेरिका के मनोचकित्सक विलियम जेम्स कहते थे " जितना होना चाहिए उसकी तुलना में हम केवल अर्ध जागृत हैं। हम अपनी शारीरिक तथा मानसिक शक्तियों का बहुत थोड़ा भाग ही उपयोग में ला रहे हैं। मनुष्य की प्रगति जिस चरम सीमा तक पहुँच सकती है उससे पहले ही रुक जाती है। मनुष्य के पास भांति - भांति की शक्तियां होती हैं जिनका वह कभी उपयोग ही नहीं कर पाता। " इसको जरा अलग तरिके से समझिये , ध्यान दीजिये आधुनिक काल में इंजन चलित गाड़ियों , जहाजों आदि का प्रचलन पिछले 200 वर्षों में ही हुआ है , कारखानों की शुरुआत लगभग 200 वर्ष और पहले हुई थी। भाप , कोयला , पैट्रोल ,डीजल , बिजली , हायड्रोजन आदि ईंधन के रूप में प्रयोग होते रहे हैं। रोज नए शक्ति स्त्रोत खोजे जा रहे हैं लेकिन पुराने शक्ति स्त्रोतों का किफायती प्रयोग कैसे हो इसकी भी प्रतिदिन खोज जारी रहती है। नित्य प्रति प्रयोग होते हैं तांकि प्राप्त ऊर्जा भण्डार ...