पवित्रता (purification ) से एकाग्रता (concentration ) प्राप्त होगी , एकाग्रता से मनन (meditation/thinking )की योग्यता आती है जिसका परिणाम होती है अनुभवावस्था (realization)
"जब तलक अपनी समझ इंसान को आती नहीं , तब तलक दिल की परेशानी कभी जाती नहीं" - स्वामी राम तीर्थ सभी बातें सुनने या पढ़ने से ही बदलाब नहीं आता। बदलाब को इंकलाब भी कहते हैं और आप जानते हैं इंकलाब आसान नहीं होते। कोई भी गुण जो हम अपने में चाहते हैं उसका लगातार मनन , तथा अभ्यास करना पड़ता है। अपना अहंकार छोड़ कर मिट्टी के साथ मिटटी होना पड़ता है जैसे किसान को होना पड़ता है मटियामेट , वैसे ही उस विचार पर एकाग्र हो कर जीवन में उसे उतारने की लगातार कोशिश करनी होगी साथ ही भगवान् से प्रार्थना तांकि सफलता मिले। इसके लिए हर तरफ से ध्यान समेट कर एक ही विचार पर केंद्रित करना होता है। आसान नहीं होगा ये काम ,कोई सूरमा ही होगा जो ये कर पाता है। याद रखो जो बस्तु जीतनी अधिक कीमती होगी उसे प्राप्त करने के लिए उतनी ही कड़ी मेहनत अर्थात पुरुषार्थ करना पड़...