यकीं आदमी को करे सरफ़राज़ , यकीं में ही है कामयाबी का राज़ ,
जिसे अपने बल पर ना हो ऐतवार ,मिलेगी उसी मन के हारे को हार ।
विश्वास करना हो तो छोटा मोटा नहीं , ऐसा विश्वास होना चाहिए जो हिमालय पर्वत को हिलाने की योग्यता रखे।
एक बार एक विश्वासी व्यक्ति को पीठ पर एक गांठ हो गयी , उसने शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर को भी दिखाया , डॉक्टर को कुछ भी चिंता जनक नहीं लगा , लेकिन व्यक्ति संतुष्ट नहीं हुआ। उसने खूब कोशिश करी ,कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सभी का मत एक ही था कि कोई चिंता की बात नहीं नार्मल है , परन्तु व्यक्ति अंदर ही अंदर कष्ट महसूस करता था। एक दिन भगवान के सामने जा कर प्रार्थना की। बोला "भगवान् ये गाँठ भी तुमने ही बनाई है और ये शरीर भी , मैं अब इसका उपचार तुम्हारे ऊपर छोड़ता हूँ,तुम ही अब उपचार करो । ये प्रार्थना उसकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा हो गयी, परिणाम स्वरुप गाँठ कुछ ही समय में ठीक हो गयी।
साधारण बात नहीं है यह , एकाग्र चित हो कर एक ही विषय के ऊपर प्रार्थना की और परिणाम मिला।
याद रखो - एक समय पर एक ही बात के लिए प्रार्थना हो, सिद्ध हो जाएगी आपकी इच्छा। एक ही मांग हो और छोटे बच्चे की तरह परमपिता परमात्मा से मांगो , जो भी आपके लिए विशिष्ट और विलक्षण लगे उसकी मांग करो निश्चल मन से लगातार परमपिता इच्छा पूरी करेंगे। ध्यान रहे संदेह के लिए स्थान नहीं है ,संशय परमात्मा की कृपा को रोक देता है। विश्वास भगवान् से जोड़ पक्का करता है। याद रखो भगवान् हमारे लिए कुछ भी कर सकते हैं ,निःसंदेह ये निष्ठा / विश्वास प्रार्थी को सफलता प्रदान करेगा। हमारा विश्वास उसकी कृपा को अपनी और खींच लेता है और असंभव को संभव बना लेता है।
भगवान् के शब्द बार -बार अपने मन में दोहराओ - "जैसा जैसा भावे ,वैसा वैसा होये "
बहुत महान शब्द गुरु ग्रंथ साहिब में से हैं। साक्षात् भगवान् की वाणी , लेकिन अगर हम मानेंगे नहीं तो हम कष्टों में ही रहेंगे। द्रोपदी का जब वस्त्र हरण होने जा रहा था तो उसकी एकनिष्ठ पुकार ने वो कर दिया जो कभी हुआ ही नहीं और उसकी साडी का आकार इतना बढ़ गया की दुःशासन के हाथ थक गए लेकिन साडी नहीं ख़त्म हुई। इतना अकाट्य विश्वास होना चाहिए। अगर विश्वास पक्का है तो जो चाहोगे वही होगा इस बात पे संशय नहीं होना चाहिए।
एक काम करो कुछ समय के लिए इन शब्दों पर पूरी तर से विश्वास करो और एक कॉपी पे अपने अनुभव लिखना शुरू करो। याद रहे आप उस समयाब्धि में नकारात्मक विचारों को बिलकुल भी मन में स्थान न दो। जैसे भी परणाम आएं यहां शेयर करो। जैसे -जैसे सोच और प्रार्थना सकारात्मक होती जाएगी आपकी प्रार्थना के अचम्भित करने वाले अनुभव जीवन में दिखने शुरू हो जायेंगे। बस आपको उत्कृष्ट अर्थात अच्छे की आस लगानी है कुछ भी हो जाये बुरा नहीं सोचना। है तो बहुत कठिन लेकिन रोज की प्रैक्टिस जल्दी ही नजरिया बदल देगी। नित्य अभ्यास से हम ये गुण ग्रहण कर सकते हैं।
हर दिन ये याद करो 'परमात्मा मेरी इच्छाएं पूरी करने की ताकत मुझे दे रहे हैं "
दिन में कई बार यह दोहराओ " मैं भगवान् की सहायता से सर्बश्रेष्ठ चीज़ें प्राप्त करूंगा "
करो और अपने अनुभव बताओ
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