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Make History/बिना थके बढ़ने वाले ही इतिहास लिखते हैं

  एक दिन एक संत से उनके शिष्य ने पुछा "गुरुदेव आप जिस समाज की सेवा करने के लिए हमे भेजते हैं उसी समाज के लोग हमारा बिरोध करते हैं ,कई बार तो हमारे पीछे कुत्ते छोड़ देते हैं"। गुरु देव खूब हँसे और जबाब देते हुए बोले " बेटा सुआर को अगर तुम गन्दी नाली में से निकाल कर साफ़ पानी से धोओगे ,साबुन से नहलाओगे और बिलकुल साफ़ जगह रखोगे तो तुम्हें क्या लगता है सूअर को अच्छा लगेगा ? बेटा  हमे समाज की सेवा इस लिए करनी है क्योंकि हमे लगता है समाज को सेवा की ज़रूरत है ठीक वैसे ही जैसे की सूअर को साफ़ करने का निर्णय हमारा अपना था ,सूअर को तो गन्दगी में बैठने का स्वभाव बन गया है। नेहला कर जैसे ही सूअर को छोड़ो वो सीधे नाली में -कीचड में जा कर लौटने लगेगा।  इस वार्तालाप में आपको सीखने के लिए एक ही चीज़ है और वह है लगातार संघर्ष अच्छाई के लिए।  जिस भी जगह आप काम कर रहे हैं आपको खूब मेहनत करनी पड़ेगी अगर आप अच्छा और ईमानदारी से काम करना चाहते है तो।  असंभव नहीं है लेकिन आपको विश्वास होना चाहिए की आप सही रास्ते पर हैं। उदाहरण के लिए नरेंद्र मोदी को ही ले लो , मोदी सरकार ने अपने सभी बजट...

Make In India / विपक्ष परेशान क्यों है 'मेक इन इंडिया' से

कुदरत का नियम है सभी एक दूसरे से सीखते हैं ,यहां मौलिकता का दावा कोई नहीं कर सकता। फिर सरकार के 'मेड इन इंडिया 'अभियान का बिरोध क्यों ? भारत सरकार ने दुनिया की सभी बड़ी कम्पनियो को  भारत आकर निर्माण करने का न्योता दिया ,इसका फायदा सबसे पहले  तो रोजगार के रूप में होगा , दूसरे हमारे लोग तकनीक भी सीख सकेंगे। 80 के दशक में HERO-HONDA,ESCORT-YAMAHA, TVS -SUZUKI  आदि कम्पनियो ने भारत में काम शुरू किये थे। भारत और बिदेशी कम्पनियो के साझे उपकर्म थे ,उस समय भारत के लोगों के पास गाड़ियां बनाने की नई तकनीक नहीं थी।  परन्तु आज दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल कंपनी "हीरो" भारत की है। पेंटागन  ,एप्पल तथा वोेइंग  के साथ मिलकर ऐसे सैंसर  तैयार कर रहा है जो सिपाही पहन भी सकें और जहाज की वाड़ी  पर भी लगाए जा सकें। अब अगर भारत को ऐसा  ही कुछ निर्माण करना है तो दो  रास्ते है एक तो भारत के विज्ञानिक खुद ही खोज करें या भारत अमेरिकी कम्पनियो से सहयोग लेकर वर्तमान मांग को पूरा करें लेकिन भबिष्य के लिए भारतीय खोज जारी र...

Hindu /हिन्दू धर्म की शिक्षा मज़ाक क्यों लगती रही ?

"गनीमत समझ जिंदगी की बहार , के मानुष चोला नहीं बार -बार ,तू कर इस तरह बाग -ए -हस्ती की सैर ,की इंजाम जिस सैर का हो बखैर " ये दोहे ख्वाज़ा दिल मुहम्मद साहेब के द्वारा लिखे गए हैं और हिंदी में अनुबाद स्वामी गीतानन्द जी (वीर जी ) गीतानगरी अम्बाला वालों ने किया है।   स्वामी जी  भगवान कृष्ण तथा गीता के महान  अनुयाई और भक्त थे।लेकिन उन्होंने मुस्लिम विचारकों तथा संतों की बाणी  को भी अपने साधकों  साथ साझा किया और सर्वधर्म समभाव  का सन्देश दिया।     भारत में हिन्दू धर्म सेक्युलर ज़मात के  निशाने पर रहा  है , पिछले दिनों  में टी बी और अखबारों में काफी वक़्त हिन्दू धर्म की निंदा पे खर्च किया गया।  मै हैरान होता हूँ के कॉर्पोरेट ट्रैनिंग्स तथा मोटिवेशनल पाठ पढ़ाने वाले लोग हर जगह एक ही बात दोहराते हैं के 'निंदा ' से बचो।  गोस्वामी तुलसीदास जब रामायण लिख कर हटे तो किसी ने पुछा "गोस्वामी जी आपने रावण की निंदा और उसकी बात बहुत कम करी है ऐसा क्यों ? गोस्वामी जी ने बोला - रावण के अवगुण अगर मै बार-बार स्मरण...