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Showing posts from 2015

Modi's Clothes, Bihar Elections and Secularism ! / बिहार में मोदी के कपडे चुनावी मुद्दा है ?

दो रंगियां ये ज़माने की ,जीते जी है सब , कि मुर्दों को  न बदलते कफन देखा। ये शेयर 'ग़ालिब 'ने कई साल पहले राहुल गाँधी व कांग्रेस ठगबंधन को ध्यान में रखते हुए लिख दिया था , जिसका अर्थ है कपडे जिन्दा लोग ही बदलते है मुर्दे नहीं। बिहारचुनाब रैलियों में कांग्रेस ठगबंधन का एक मुद्दा "नरेंदर मोदी द्वारा बार -2 कपड़े बदलना भी है " . पता नही बिहार की जनता को इस बार महाठगबंधन के मुद्दे सुहाये भी है यां नही , महाठगबंधन द्वारा कोई भी मुद्दा जनता से जुड़ा हुआ नहीं उठाया गया। लेकिन  सोशल साईटस जैसे फेसबुक और व्हाट्स एप्प  ने चुनाबो में काफी प्रभाव डाला है। मोदी दिन में 100 कपड़े बदले इससे देश को क्या फर्क पड़ता है, पंडित नेहरू के कपड़े लंदन से धुल कर और प्रैस हो कर आते थे ,ये बात बताते समय  कांग्रेसियों का सीना फटने को हो आता था। कांग्रेसी लोग आँख बंद करके मंत्र मुक्त्त हो जाते थे ,जैसे नेहरू साहब के कपड़े ही नही धुलते थे लंदन में बल्की भारत का भाग्य भी साफ हो जाता था ,गरीब का स्नान हो जाता था ,साधरण भारतीय कृत -2 हो जाता था। वो  दिन भी बीत गए ,अब राहुल गाँ...

Make In India / विपक्ष परेशान क्यों है 'मेक इन इंडिया' से

कुदरत का नियम है सभी एक दूसरे से सीखते हैं ,यहां मौलिकता का दावा कोई नहीं कर सकता। फिर सरकार के 'मेड इन इंडिया 'अभियान का बिरोध क्यों ? भारत सरकार ने दुनिया की सभी बड़ी कम्पनियो को  भारत आकर निर्माण करने का न्योता दिया ,इसका फायदा सबसे पहले  तो रोजगार के रूप में होगा , दूसरे हमारे लोग तकनीक भी सीख सकेंगे। 80 के दशक में HERO-HONDA,ESCORT-YAMAHA, TVS -SUZUKI  आदि कम्पनियो ने भारत में काम शुरू किये थे। भारत और बिदेशी कम्पनियो के साझे उपकर्म थे ,उस समय भारत के लोगों के पास गाड़ियां बनाने की नई तकनीक नहीं थी।  परन्तु आज दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल कंपनी "हीरो" भारत की है। पेंटागन  ,एप्पल तथा वोेइंग  के साथ मिलकर ऐसे सैंसर  तैयार कर रहा है जो सिपाही पहन भी सकें और जहाज की वाड़ी  पर भी लगाए जा सकें। अब अगर भारत को ऐसा  ही कुछ निर्माण करना है तो दो  रास्ते है एक तो भारत के विज्ञानिक खुद ही खोज करें या भारत अमेरिकी कम्पनियो से सहयोग लेकर वर्तमान मांग को पूरा करें लेकिन भबिष्य के लिए भारतीय खोज जारी र...

Sahitya Academy Award and Secular / किसान की मौत साहित्य को संजीवनी लगती रही

आजकल साहित्य अकैडमी अवार्ड बापिस करने की होड़ लगी हुई है ,सेक्युलर साहित्यकार काफी मुस्तैदी के साथ कम्युनलिज्म का बिरोध कर रहे हैं , अख़लाक़ जैसा सेक्युलर अगर मरता है तो साहित्यकार दुखी होता है लेकिन जब संजीव कुमार नाम का कम्युनल लड़का ,बिहार में मुस्लिम समुदाय द्वारा मार दिया जाता है तो ना सेक्युलर मीडिया खबर दिखाता है और  ना ही किसी  साहित्यकार को कष्ट होता है। खैर, आज़ादी तो ज़रुर भारत को 1947 में मिली थी लेकिन अधिकतर पढ़ा लिखा वर्ग अंग्रेज़ों की मानसिक गुलामी आज भी करता रहा है उसमे विदेशों में पढ़े कांग्रेसी नेता जैसे खुर्शीद ,राहुल आदि तथा अधिकतर सेक्युलर साहित्यकार अब तो इनकी पहचान बड़ी आसान हो गयी है ! आज़ादी के बाद के अधिकतर भारतीय साहित्यकार अपराध बोध तथा हीन भावना से ग्रसित रहे हैं। पूरी दुनिया में  जितने भी महान प्रेरक हुए हैं वे एक ही बात कहते रहे हैं 'नज़र बदलो ,नज़ारे बदल जाएंगे ' ये छोटी सी बात अगर देश के सेक्युलर साहित्यकार नहीं समझ रहे हैं तो आम आदमी कैसे समझेगा।  एक साहित्यकार टी बी  बहस में कह रही थी "अख़लाक़ की मौत के बाद अब दम घुटता है इस...

Swami Gita Nand ji's Art of Livingअगर कल से बेहतर नहीं आज तुम , तो इक दिन की दौलत हुई तुमसे गुम।

बना ज़र्रे -ज़र्रे से कोह -ए -गिराँ , हुए कतरे -कतरे से दरिया रवां। अगर थोड़ा -थोड़ा किये जाओगे , मुरादों के सुमरे लिये जाओगे। जो सेहत नहीं तन में चुस्ती कहाँ , टको से मिले तन्दरूस्ती कहाँ। तुझे तन्दरूस्ती की लाजम है कदर , कि मुलक -ए -बदन में न हो जाये ग़दर।  मर्ज़ से खिरदमन्द को आर है ,मरीज आप अपना गुनाहगार है। है सेहत से रूहानियत का मजा ,हो पोशाक उजली तो खुशबू लगा। वो पेटू जो खा-खा के बीमार हो , कहो उससे फाके को तैयार हो , वो दावत उडाने की लज्ज़त ही क्या , की इक दिन ग़िज़ा और दस दिन दवा। नजरहो तो जौहर को जौहर कहे , है अन्धा जो हीरे को ककर कहे। है जाहिल को नेकी -बदी बात एक , कि होते है अन्धे को दिन -रात एक। भला मर्द जाहिल का ईमान क्या! की अन्धो को रंगो की पहचान क्या!! गधे को उढ़ा दे जो मखमल की झूल , दुलत्ती चालान न जायेगा भूल। बहुत लोग बातो में लुकमान है , अमल में जो देखो तो नादान है। जो सीखो किसी को सीखते चलो ,दिये से दिये को जलाते चलो। गवाये गा आकल न बेकार दिन , की इन्सा की है जिन्दगी चार दिन। नहीं वक़्त से बढ़ के अनमोल माल , न माजी को रो अब तबाह कर न हाल। ओ हर...

Problem of India is Congress ! / भारत की सबसे बड़ी समस्या कांग्रेस है !

चीन और रूस का सीरिया में ISIS पे आक्रमण अमेरिका के लिए चिंता का विषेय हो सकता है या फिर डरना चाहिए पाकिस्तान को , भारत के लिए तो सोचने का मौक़ा है के "कब पाकिस्तान में आतंकियों के कैम्पों पर रूस की तरह हमला करना है"। मीडिया हमेशा से बात का बतंगड़ बना देता है , लेकिन सीरिया में बदले समीकरणों से भारत के मीडिया को मरोड़ क्यों लग रहे हैं समझ से परे हैं।  रूस तो सीरिया में अपनी दोस्ती निभा रहा है , अमेरिका अपनी दूकान चला रहा है लेकिन चीन का सीरिया का रुख साफ़ -साफ़ बताता है के चीन में सब कुछ ठीक नहीं है। भारत के लिए चिंता का विषय आज के दिन सिर्फ कांग्रेस और कांग्रेस का सेक्युलर ठगबंधन है।  सूत्रों की माने तो देश में बदलाब की जो लहर मोदी सरकार चलाना चाहती है वह विपक्ष को किसी भी कीमत पर सुहा नहीं रही  है।  G S T बिल पास होना , मोदी सरकार  द्वारा व्यापारियों के साथ किया गया बादा पूरा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ये बिल व्यपार में चोरी भी कम करेगा ऐसा माना जा रहा , लेकिन कांग्रेस  ठगबंधन के लोग राज्यसभा में सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करने में कोई क...

History of Noakhali 1946 Genocide of Hindus/नोखली नरसंहार 10 अक्टूबर 1946

"नोखली, पश्चिम बंगाल का हिस्सा है इस जगह 10  अक्टूबर 1946 को दंगे शुरू हुए , मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारन हिन्दू इस दंगे में सीधा और आसान टारगेट थे। सबसे ज्यादा दुःख और कष्ट औरतों ने सहा। बहुत सी औरतों को अपने पति को मरते देखा और फिर जबरन उन मर्दों से शादी करनी पड़ी जिन लोगों ने उनके पतियों को मारा था। उन औरतों के चेहरे मृत देह के चेहरे लग  रहे थे। दुराचार यहीं नहीं रुका था , बल्कि हज़ारों हिन्दुओं की जान बख़्शने की कीमत गौ -मांस खिला कर उनको इस्लाम में शामिल होना रखी गयी थी। " ये शव्द मुरिअल लिस्टर राहत कार्य में आई हुई थीं ,ने 6 नवम्बर 1946 को लिखे थे (वी वी नागरकर की पुस्तक से ) अमृता बाजार पत्रिका 23 -10-1946 के लेख में लिखती है :- 13 दिन से 120 गाओं ( रामगंज,लक्ष्मीपुर,रायपुर,बेगमगंज और सेनबाग़  थाना क्षेत्र  जिला नोखली )  जिनमे 90 हज़ार हिन्दू रहते थे तथा 70 हज़ार ग्रामीण चांदपुर तथा फरीदगंज थाना जिला कोमिला में हथियार बंद लोगों ने बंधी बनाया हुआ है। 'मृत्यु' इन लोगों के चेहरे पे साफ़ दिख रही है , फ़ौज द्वारा उन लोगों के लिए रसद पहुंचाई जानी चाहिए , व...

Swami GitaNand ji Mahraj (VEER JI) ki ---- जीने की कला

 इरादा है   मर्दो का कोह-ए-गिरां ,पहाड़ अपनी जा से टलेगा कहाँ , जो तू है बहादुर समझ ले यही ,कि है 'तख़्त या तख़्ता 'मंज़िल मेरी। इरादा तेरा है जो सुलझा हुआ ,रहेगा न तू गम से उलझा हुआ। अगर बाज के पर हो आरास्ता  ,हवा में हर इक सिम्मत है रास्ता।   तू लफ्जों को कामों के  साँचे में ढाल ,नसीयत से बेहतर है अच्छी मिसाल। जो मन्जिल को जाना है सामान बाँध ,हवा के न दामन में अरमान बाँध। कोई है मुअज्ञ्ज्ज  ,कोई ख़्वार है , हर इक अपनी किस्मत का मेमार है। कलम खूब हो  रोशनाई हो खूब ,जो दिल खूब हो तो लिखाई हो खूब।  जमाना  गिरे को उठता नहीं,गिरा अश्क फिर हाथ आता नहीं , जो दिल अपना दुबिधा में पाता है तू ,तो उड़ता नहीं फ़ड़फ़ड़ाता है तू। तबीयत हो यकसू तो होता है काम ,कि दुबिधा में माया मिलेगी न राम। अगर कामयाबी न हो जी न छोड,गिरे भी जो सौ बार हिम्मत न तोड़। वो जीतेगा हो जिसका दिल उस्तवार ,वो हारेगा दिल जिसका जायेगा हार। न मौजों थपेड़ों को ला ध्यान में ,हो मीनार तूफान पुरनूर में। मुसीबत उठा और मुँह से न बोल ,कि एहरन है  मजबूत ओछा है ढोल। ...

Secular Artist and Communal Artist/ धर्म निरपेक्ष गुलाम अली साम्प्रदायिक रहमान

"अपनों पे सितम ,गैरों पे कर्म , ऐ जाने वफ़ा ये ज़ुल्म ना कर , ये ज़ुल्म ना कर " केजरीवाल ने ग़ुलाम अली को दिल्ली में शो करने के लिए न्योता भेजा है क्योंकि मुंबई में गुलाम अली का शो शिव सेना ने रद्द करवा  दिया है।  ये  है विश्व व्यापी सोच और जीतनी तारीफ़ केजरी सरकार की करी जाए  कम है। मुझे याद है केजू बाबा ने एकबार कहा था "हम नयी  प्रकार की राजनीति करने आये हैं "  . गुलाम अली का शो दिल्ली सरकार के लिए आमदनी का स्रोत भी बन सकता है, क्योंकि दिल्ली में करोड़ों आम आदमी गुलाम अली को चाहते हैं।  चाहे ना भी हों  लेकिन अंतर्राष्ट्रीय सोच इसे ही कहा जाएगा।   पिछले दिनों दादरी काण्ड पे केजरी का सेक्युलर विडिओ काफी प्रसिद्ध हुआ , धर्म निरपेक्षता का सशक्त उदाहरण और सन्देश उसमें केजरीवाल ने आम आदमी को दिया।  गुलाम अली साहेव पाकिस्तान नहीं वल्कि भारत के महान कलाकार हैं और आम आदमी की ज़िन्दगी से सीधे-सीधे जुड़े हुए  हैं।  नितीश कुमार और केजरीवाल की सोच यहीं आकर एक होती है और ममता बेनर्जी तो धर्मनिरपेक्षता की नींव है ही। जी हाँ , म...

Reuters says Tejas Mark-1A “obsolete”/ तेजस मार्क -1 A फ्रांस के राफेल जहाजों से भी कई गुणा अधिक सुरक्षित है

आज पूरा विश्व अशांत है , सीरिया  हो या अफ्रीका , अफगानिस्तान हो या भारत नागरिक असंतुष्ट हैं या ऐसा कहूँ के पूरा विश्व अशांत करदिया गया है। ध्यान देने वाली बात है दुनिया के आतंकवादियों को हथियार तथा गाड़ियां कोन मुहैय्या करवाता है ? कहाँ से आतंकियों तक रसद पहुँचती है ? कौन है जो हत्यारों को पनहा देता है कोण है जो समाजों  को आपस में  लड़ाता है ? क्यों सभी बुझे-बुझे से लगते हैं क्यों सभी घुटे-घुटे से लगते हैं ? समझ नहीं पाता हूँ मैं ,क्यों सभी खीझे -खीझे से लगते हैं ? अब देखो ना अगर किसी सिख की पगड़ी ,बाल या किरपान आदि पे कोई आंच आये तो उसका बिरोध जायज माना जाता है , किसी पैगम्बर का कार्टून अगर अखवार में छप जाए तो हाहा कार मच जाता है इस्लाम का अपमान माना जाता है , लेकिन जैसे ही 'गौ' की सुरक्षा और सम्मान की बात आती है सेकुलरिज्म खतरे में आ जाता है, क्यों ? उधर एक और खबर जो रॉयटर ने छापी तथा भारतीय मीडिया ने भी वैसे के वैसे ही बिना सोचे समझे छाप दी वो है 'तेजस फाइटर जहाज ' के बारे में आधी -अधूरी और गलत खबर छापना, आपके साथ  अखबारों की हैडलाइन तथा अख़ब...

Saffronisation of IITs and Secular Donations/ मुआवज़े में इतना फरक और फीस मुआफ़ी में छात्र की जाति -मज़हब नहीं देखेंगे

वाराणसी और दादरी ने खूब नाम कमाया है चंद दिनों में , एक और दादरी में कल एक हिन्दू युबक जय प्रकाश की मौत हो गयी , मीडिया उस युबक को अख़लाक़ की हत्या का दोषी करारा दे चुकी थी लेकिन स्थानीय पुलिस उसको गिरफ्तार करने की बजाये परिवार सहित प्रताड़ित कर रही थी , एक मज़दूर का आत्महत्या करना  दर्शाता है के अखिलेश सरकार मौत का बदला मौत से लेना चाहती थी और जयप्रकाश की मौत से बदला पूरा हो गया होगा।  मैं ऐसा इस लिए कह रहा हूँ क्योंकि वाराणसी की हिंसा में कॉंग्रेस्सिओं के इलावा उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाहियों की कार गुज़ारी भी सामने आ रही है , पूरे प्रकरण को शूट करने वाले एक स्थानीय फोटोग्राफर ने दावा किया है के वाराणसी में वाहनो को आग लगाने वाले और कोई नहीं बल्कि पुलिस थी।  ये दोनों केस मीडिया ने हिंदुत्व के खतरे के रूप में पेश किये और जनता को आधी अधूरी जानकारी दे कर बिहार चुनावो में बीजेपी गठबंधन को पसोपेश में डालने और हराने की कोशिश के रूप में प्रयोग किया।    असली परीक्षा तो अब होगी हिन्दू संगठनो की ,आज जब इखलाक का हिन्दू पडोसी पुलिस की बर्बरता की बलि चढ़ चुका है देखना ह...

Secular Death and Communal Death/ हिन्दू शहीद के दरवाजे पर कोई सांत्वना देने भी नहीं आया !

शहीद दरोगा मनोज मिश्रा के घरवालों का दर्द फिर हरा हुआ जब  अखलाक के परिजनों को 45 लाख और  मिले 2 नौकरियां मिली  बड़ा घर मिला , हवाई जहाज की यात्रा और मिश्रा जी के दरवाज़े पर  पर कोई सांत्वना तक देने नहीं पहुंचा  ॥   लेकिन गौहत्या के आरोपों से घिरे अखलाक के परिवार को अखिलेश सरकार 45 लाख का मुआवजा दे रही है. मनोज के पिता रोते हुए कहते हैं कि बेटे की मौत की  जांच हो और दो बच्चों को नौकरी दी जाए.  एक  बेटा खोने का दर्द तो सिर्फ मुस्लिम परिवार का ही होता है मिश्रा साहेब और उत्तरप्रदेश  सरकार आपके बेटे की जाति    हिन्दू  ब्राह्मण  होने के कारण  सांत्वना  देने  कैसे आ  जाती  ?   मनोज मिश्रा के  पिता    ने कहा कि अगर जाति-बिरादरी देखकर सरकार मुआवजा देती है तो ऐसा लगता है कि ब्राह्मण होकर हमने गुनाह कर दिया.  यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के हरदासपुर गांव के रहने वाले सब इंस्पेक्टर मनोज मिश्रा बरेली क...

1857 First War for Independence /काटजू -शोभा डे - फोटो खिंचवाने के लिए "गौ " क्या "गूँ " भी खा सकते हैं

भारत वही देश है  जहाँ गौ- चर्बी बाले कारतूस को लेकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ बिद्रोह का बिगुल बजा था.… और मंगल -मंगल -मंगल -मंगल हो.गयी थी  ………।   बड़ी वचित्र स्थिति है हमारे देश की एक तरफ देश तरक्की की राह खोज रहा है , दूसरी तरफ जाती - धर्म -मजहब की राजनीति उफान पर है।  बीजेपी द्वारा साफ-साफ़ दो टूक गौ-हत्या पर प्रतिबन्ध काफी कुछ व्यान करता है।  अगर आपने इतिहास पढ़ा हो तो 1857 की आज़ादी की पहली क्रांति का सबसे बड़ा कारण भी 'गौ-हत्या " ही रही।  जैसा के मैंने पहले भी लिखा था भारत के लोग या हिन्दू महाभारत के युद्ध से हुए विनाश के कारण लड़ाई -झगडे और हथियारों से दूर ही रहते थे , लेकिन जैसे ही "गौ -माता " पे बात आई अंग्रेज़ों की सत्ता के आखरी दिन शुरू हो गए।  मंगल पांडे ने सुप्त समाज को जाग्रत कर दिया सिर्फ यही नहीं सूअर की चर्बी बाले कारतूस मुसलमानो को अंग्रेज़ो के खिलाफ होने के लिए काफी थे।  हिन्दू और मुस्लिम दोनों एक साथ ब्रिटिश राज के खिलाफ खड़े हो  गए थे क्योंकि 'गौ-माता और सूअर' को मार कर उनकी चर्वी से कारतूस बना दिए यहां तक तो सब ठीक...

Hindu Teachings/निश्चित ही सेकुलरिज्म खतरे में पड जाएगा........

चुन अपने लिए फूल या खार तू ,कि नेकी -बदी का है  मुख़तार तू ,जो दिल चाहे इस ज़िंदगी को सँबार ,बहार इसकी देख और उजाला निखार , जो दिल चाहे यह बाग बीरान  कर ,खुद अपनी तबाही के सामान कर,जो दिल चाहे ले राह -ए अक्लो स्वाब ,जो दिल  चाहे कर अपनी मिट्टी ख़राब।  हिन्दू धर्म पे कुठार घात सदियों से होते रहे  हैं , लेकिन  कभी भी सख्त शब्दों का या ऐसा कहें कोई भी कठोर विरोध नहीं किया गया , क्यों ?? क्योंकि हिन्दू धर्म में दुसरे धर्म के  विरोध में  कभी कुछ कहा  ही नहीं गया।  स्वामी गीतानन्द जी ने ख्वाज़ा दिल मुहम्मद साहिब के शब्दों का तर्जुमा हिंदी में किया क्योंकि इन शब्दों में मनुष्य मात्र के लिए सन्देश है।   कोई भी हिन्दू संत इस्लाम या क्रिश्चियन धर्म के ग्रंथों में से नकारात्मक सन्देश कभी हिंदी में अनुबादित  ही नहीं करता  , कारण सिर्फ यही था "दूसरों की निंदा का अर्थ है उन अबगुणो को अपने जीवन में समाहित करना"।  खैर हम क्यों नकारात्मकता को अपनाएँ , चलो एक दिया जलाएं। जिंदगी रूप में हमे एक बगीचा मिला है...

Hindu /हिन्दू धर्म की शिक्षा मज़ाक क्यों लगती रही ?

"गनीमत समझ जिंदगी की बहार , के मानुष चोला नहीं बार -बार ,तू कर इस तरह बाग -ए -हस्ती की सैर ,की इंजाम जिस सैर का हो बखैर " ये दोहे ख्वाज़ा दिल मुहम्मद साहेब के द्वारा लिखे गए हैं और हिंदी में अनुबाद स्वामी गीतानन्द जी (वीर जी ) गीतानगरी अम्बाला वालों ने किया है।   स्वामी जी  भगवान कृष्ण तथा गीता के महान  अनुयाई और भक्त थे।लेकिन उन्होंने मुस्लिम विचारकों तथा संतों की बाणी  को भी अपने साधकों  साथ साझा किया और सर्वधर्म समभाव  का सन्देश दिया।     भारत में हिन्दू धर्म सेक्युलर ज़मात के  निशाने पर रहा  है , पिछले दिनों  में टी बी और अखबारों में काफी वक़्त हिन्दू धर्म की निंदा पे खर्च किया गया।  मै हैरान होता हूँ के कॉर्पोरेट ट्रैनिंग्स तथा मोटिवेशनल पाठ पढ़ाने वाले लोग हर जगह एक ही बात दोहराते हैं के 'निंदा ' से बचो।  गोस्वामी तुलसीदास जब रामायण लिख कर हटे तो किसी ने पुछा "गोस्वामी जी आपने रावण की निंदा और उसकी बात बहुत कम करी है ऐसा क्यों ? गोस्वामी जी ने बोला - रावण के अवगुण अगर मै बार-बार स्मरण...

Lal Bahadur Shastri - story of a Great Leader

जन्म - 2  अक्तुबर 1904 , मृत्यु - 10  जनवरी 1966 .  भारत के द्वितिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म  मुगलसराय (वराणसी) उत्तर प्रदेश के एक सामान्य परिवार में हुआ था। आपके बचपन का नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था। आपके पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एक  प्राइवेट स्कूल में शिक्षक रहे और बाद में इलाहाबाद में सरकारी विभाग में  क्लर्क भी रहे , लेकिन जब लाल बहादुर एक बर्ष के थे तभी उनके पिता जी की मृत्यु हो गयी। लाल का बचपन का जीवन  संघर्ष पूर्ण  रहा। गरीवी में  परवरिश काफी कठिनाई से हुई।  इनको नदी पार करके स्कूल जाना होता था और नाव वाला नदी पार करवाने के पैसे लेता था , लाल बहादुर नाव द्वारा  नहीं बल्कि तैर कर नदी पार करते थे। एक और वाक्या जिसने इनका  जीवन बदल दिया था , एक बार लाल बहादुर दोस्तों सहित किसी के बगीचे से फल चुराने गए , वहां बगीचे के रक्षक द्वारा लाल पकड़ लिए गए , जब बगीचा रक्षक इनको पीटने लगा तो इन्होने बगीचा रक्षक से मुआफ़ी की गुहार करी , के मेरे पिता नहीं है कृपया मुझे छोड़ दो ,...

Russia Attacked Siriya

रूस ने सीरीया पे हवाई हमले शुरू किये , अमेरिका को दो टूक शब्दों में कह दिया सीरीया से चले जाओ।  पेंटागन ने इस जानकारी की पुष्टि भी की है 

Mark Zuckerberg's Explanation On Internet.org/मार्क ज़ुकरबर्ग ने अपना पक्ष रखा

Over the past week in India, there has been a lot written about  Internet.org and net neutrality. I’d like to share my position on these topics here for everyone to see. First, I’ll share a quick story. Last year I visited Chandauli, a small village in northern India that had just been connected to the internet. In a classroom in the village, I had the chance to talk to a group of students who were learning to use the internet. It was an incredible experience to think that right there in that room might be a student with a big idea that could change the world — and now they could actually make that happen through the internet. The internet is one of the most powerful tools for economic and social progress. It gives people access to jobs, knowledge and opportunities. It gives voice to the voiceless in our society, and it connects people with vital resources for health and education. I believe everyone in the world deserves access to these opportunities. In many coun...

Modi - The Winner / पाकिस्तानी मीडिया और नागरिक सभी आज मोदी के मुरीद हुए पड़े हैं

मोदी के अमेरिका में दिए गए भाषण ने कोंग्रेसियों की नींद उड़ा दी है। पिछले दिनों एक चुटकुला काफी प्रसिद्ध हुआ था जो पाकिस्तान पे बना था। गौर फरमाइयेगा " अमेरिका में अंग्रेजी सीख रहे छात्रों ने सामान्य ज्ञान पे चर्चा शुरू की , हॉट टॉपिक आतंकवाद है सो बात शुरू ही आतंकबाद से हुई। किसी ने प्रश्न किया दुनिया में सबसे अधिक आतंक फैलाने वाला देश कौन सा है , सभी इधर-उधर देखने लगे तो पाकिस्तानी लड़का गुस्से में बोला 'खुदा कसम अगर पाकिस्तान का नाम लिया तो गोलियों से भून दूँगा '… खैर अपने भाषण में मोदी ने सिर्फ इतना कहा के पहले देश के नेताओं पे आरोप लगते थे बेटे ने ढाई सौ करोड़ का घोटाला किया , बेटी ने पांच सौ करोड़ का घोटाला किया ,दामाद ने हज़ार करोड़ का घोटाला किया आदि , लेकिन 15 महीने में मेरे पे तो कोई आरोप नहीं लगा। बस इतना सा ही तो कहा था मोदी ने लेकिन कांग्रेसियों ने इन शब्दों को पर्सनल ले लिया और इन शब्दों को देश की बेइज़ती करार दे दिया।  मैं समझ नहीं पा रहा हूँ के ये शब्द कैसे देश के लिए शर्मनाक हैं ? मोदी ने तो साधारण सचाई ही कही थी जिन लोगों को ये शब्द शर्म नाक लग रहे हैं, वे ल...

Modi and Digital India - आँख में आँख डाल कर हाथ मिलाएंगे - मोदी

"ना डरेंगे ना डराएंगे , ना झुकेंगे ना झुकाएँगे , आँख में आँख डाल कर हाथ मिलाएंगे - मोदी " ये बात पहले सिर्फ भाषण बाज़ी  ही लगते थे लेकिन मार्क ज़ुकरबर्ग की बॉडी लैंग्वेज देख कर महसूस हुआ के मोदी के शव्द सिर्फ भाषणो तक ही सीमित नहीं थे , मोदी ने अपने एक-एक शब्द को सच करके दिखाया है। यहाँ मै ये कते   नहीं कह रहा के मार्क या अमेरिका को मोदी ने डरा दिया ,नहीं ,बल्कि मेरा बस इतना कहना है  "भारत को भारत का असली गौरव दिलवा दिया" ।  मैं देख रहा था कैसे मार्क ज़ुकरबर्ग बार-बार पानी पी कर अपने स्ट्रेस को दवा रहा था। गूगल -फेसबुक -एप्पल आदि जितनी  भी अमेरिकन कम्पनीज हैं ऐसा नहीं है के अब एक दम से भारत में पैसे की बरसात कर देंगे। लेकिन अब वे लोग भारत में आ कर मोदी की कथनी और करनी को ज़रूर देख सकेंगे।  कांग्रेस एंड पार्टी ने भारत के प्रति पूरे विश्व में एक नकरात्मक छवि जो बना राखी थी , इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाली।  पुरानी छवि ही क्यों ,जिस तरह की आज भी राजनीति के नए ढंग जो कांग्रेस अपना रही है उससे साफ़ हो रहा है के विदेशियों को तो मोदी खींच लाएंगे ले...

Change in American Attitude is Due to Modi Sarkar/ अमेरिका में भारत की बल्ले-बल्ले

"भारत अब खड़ा हो रहा है ,  देखा था कभी गिडगडाते हुए ,  अब दहाड़ने लगा है देश मेरा बड़ा हो रहा है , गरीबी -ग़ुरबत ही मुद्दा थी कभी , अब काज  और व्याज से  व्यपार हो रहा है ,  देश मेरा नहीं सो रहा है। कभी विदेशों के आगे चम्पी करते थे देश के नेता ,  आज आँख में आँख डालकर राज हो रहा है ,  सच्ची बात है भारत अब खड़ा हो रहा है। मेहनत करने वालों को रस्ते नहीं थे बढ़ने के ,  आज छोटा सा बच्चा भी जहाज ढूंढ रहा है , सच में देश विज्ञान मय हो रहा है , जन - जन का कल्याण हो रहा है ,  देश से कूड़ा साफ़  रहा है क्योंकि अब भारत महान हो रहा है। " एक बात तो माननी पड़ेगी के नरेंदर मोदी की मेहनत साफ़ दिखती है , साधारण जनता मुहं भर के मोदी की तारीफ़ कर रही है लेकिन एक कमी तो है 'भूमि बिल ' के बारे में सच जनता तक पहुंचाने में मोदी के इलावा कोई बीजेपी नेता आगे नहीं आया।  शत्रुघ्न सिन्हां सरीखे नेता जो नितीश और केजरीवाल तथा लल्लू यादव के तलवे चाटने में गुरेज़ नहीं करते   स्वयम ज़िमेदारी ले कर देश हित में भूमि बिल के फायदे बताने आगे नहीं आये...