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Showing posts from April, 2020

पवित्रता (purification ) से एकाग्रता (concentration ) प्राप्त होगी , एकाग्रता से मनन (meditation/thinking )की योग्यता आती है जिसका परिणाम होती है अनुभवावस्था (realization)

"जब तलक अपनी समझ इंसान को आती नहीं , तब तलक दिल की परेशानी कभी जाती नहीं" - स्वामी राम तीर्थ                                   सभी बातें सुनने या पढ़ने से ही बदलाब नहीं आता।  बदलाब को इंकलाब भी कहते हैं और आप जानते हैं इंकलाब आसान नहीं होते। कोई भी गुण जो हम अपने में चाहते हैं उसका लगातार मनन , तथा अभ्यास करना पड़ता है। अपना अहंकार छोड़ कर मिट्टी के साथ मिटटी होना पड़ता है जैसे किसान को होना पड़ता है मटियामेट , वैसे ही उस विचार पर एकाग्र हो कर जीवन में उसे उतारने की लगातार कोशिश करनी होगी साथ ही भगवान् से प्रार्थना तांकि सफलता मिले। इसके लिए हर तरफ से ध्यान समेट कर एक ही विचार पर केंद्रित करना होता है। आसान नहीं होगा ये काम ,कोई सूरमा ही होगा जो ये कर पाता है।                                        याद रखो जो बस्तु जीतनी अधिक कीमती होगी उसे प्राप्त करने के लिए उतनी ही कड़ी मेहनत अर्थात पुरुषार्थ करना पड़...

"God is most glorified in us when we are most satisfied in Him." John Piper

यकीं  आदमी को करे सरफ़राज़ , यकीं  में ही है कामयाबी का राज़ , जिसे अपने बल पर ना हो ऐतवार ,मिलेगी उसी मन के हारे को हार । विश्वास करना हो तो छोटा मोटा नहीं , ऐसा विश्वास होना चाहिए जो हिमालय पर्वत को हिलाने की योग्यता रखे। एक बार एक विश्वासी व्यक्ति को पीठ पर एक गांठ हो गयी , उसने शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर को भी दिखाया , डॉक्टर को कुछ भी चिंता जनक नहीं लगा , लेकिन व्यक्ति संतुष्ट नहीं हुआ।  उसने खूब कोशिश करी ,कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सभी का मत एक ही था कि कोई चिंता की बात नहीं नार्मल है , परन्तु व्यक्ति अंदर ही अंदर कष्ट महसूस करता था।  एक दिन भगवान के सामने जा कर प्रार्थना की।  बोला "भगवान् ये गाँठ भी तुमने ही बनाई है और ये शरीर भी  , मैं अब इसका उपचार तुम्हारे ऊपर छोड़ता हूँ,तुम ही अब उपचार करो ।  ये प्रार्थना उसकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा हो गयी, परिणाम स्वरुप गाँठ कुछ ही समय में ठीक हो गयी। साधारण बात नहीं है यह , एकाग्र चित हो कर एक ही विषय के ऊपर प्रार्थना की और परिणाम मिला। याद रखो - एक समय पर एक ही बात के लिए प्रार्थना हो, ...

विश्वास , ताकत तथा मेहनत महान चमत्कार के रूप में परिणाम देते हैं

यकीं  आदमी को करे सरफ़राज़ , यकीं  में ही है कामयाबी का राज़ , जिसे अपने बल पर ना हो ऐतवार ,मिलेगी उसी मन के हारे को हार । यह एक परम सत्य है जिस चीज़ की आशा मन को होती है वही मनुष्य को प्राप्त होती है, मज़ेदार बात है हम आस भी उसी चीज़ की करते हैं जो हमे चाहिए होती है। सम्पूर्ण सकारात्मक वातावरण त्यार करने के लिए दिल की गहराइयों से कोशिश करनी होगी फिर सृजन का काम सही तरीके से होगा। याद रखो  :-  विश्वास , ताकत तथा मेहनत महान चमत्कार के रूप में परिणाम देते हैं  प्रकृति की सृजनात्मक शक्तियां इन्हीं शब्दों का फल हैं। यह ताकतवर शब्द जितने ज्यादा बार दोहराये जाएंगे अंतःकरण में उतनी जल्दी इनका वास होगा अर्थात हमारे मन में ये शब्द पक्के हो जाएंगे। ध्यान देना विश्वास की ताकत मनुष्य को उत्साह से भर देती है।  किसी भी कठिनाई को हराने की योग्यता 'विश्वास /Faith ' से ही प्राप्त होती है। भगवान् श्री कृष्ण के शब्द याद करो "कौन्तये प्रतिजानीहि न में भक्तः प्रणश्यति "  अर्थात :-  हे कौन्तेय !  तुम निश्चयपूर्वक सत्य जानो कि मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता।।...

हर में हरि हैं / God In All /गीता रहस्य by Swami Geeta Nand ji Maharaj ,Geeta Nagari Ambala City

हर में हरि हैं --  मत: परतरं नान्यत भवन्ति भावा भूतानां मतः एव पृथग्विधा। अर्थात गरज जानदारों में जो है सफास , है उन सबका मसबा मेरी पाक जात। इस दुनिया में जितने भी दरिंदे (beasts ),परिंदे (birds ),चरिन्दे (animals ), मनुष्य ,देवी -देवता आदि जिस शक्ति के कारण चल रहे हैं वह 'आत्मा 'भगवान जी की ही देन है। अगर आत्मा नहीं हो तो शरीर मुर्दा बन जाता है। शरीर सर्वथा आत्मा पर ही आश्रित होता है शरीर का अपना स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता। शरीर नश्वर है खत्म होगा ही परन्तु आत्मा अजर अमर है अर्थात बना है जो बिगड़ेगा बे काल-ओ कील , कि खुद जिंदगी मौत की है दलील। हमे एकांत में बैठ कर गंभीरता पूर्वक मनन करना चाहिए कि :- वह कौन है 1) जिसके कारण से बुद्धि अपना निर्णय करती है 2 )जिसके कारण से मन संकल्प -विकल्प करता है 3 )जिसके कारण से तन का हर अंग अपना काम करता है 4 )जिसके कारण नाड़ियों में रक्त बहता है 5 )खाना खाने के बाद पचाता कोन है 6 )इस शरीर का प्रबंधक कोन है इस सब के उत्तर में भगवान् कहते हैं :- मैं जान -ए जहां जानदारों में  हूँ संत कहते हैं जैसे आवाज सुनते -सुनते हम आव...