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लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता रहे -जीना इसी का नाम है

इंसान और जानवर सभी जीवो के बीच एक अदृश्य सेतु बना हुआ होता है इसका निर्माण तभी होता है जब दो लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता हो। ये फर्क नहीं पड़ता दोनों लोग किस परिवार ,जाति ,धर्म या प्रजाति के हैं।  इंसान भी हो सकते हैं जानवर भी। पुरानी फिल्म अनाड़ी का गाना जिसके लेखक शैलेन्द्र थे इन भावो को पुरणत्या व्यक्त करता है-किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार ,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार ,किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार जीना इसी का नाम है। इतने प्यारे भाव हों और घर में कलह या अशांति हो तो कमी विचारों की नहीं बल्कि कमी बिकल्पों की है। पुराने समय में घरों के फैसले परिवारों के बड़े बज़ुर्ग ही लेते थे ,उनके आगे कोई ना -नुकर नहीं  चलती थी किसी की हिम्मत ही नहीं होती थी। वक़्त बदला और परिवारों में कई शक्ति केंद्र हो गए। ऐसे विकट समय में अगर किसी से कोई फैसला देने के लिए कहे तो उनको अपना विचार बताते समय ऐसा कहना चाहिए कि मेरे विचार में तो ये काम ऐसे करलो बाकी और भी कई तरीके हैं जो ठीक समझो वही करो। जैसे ही आप विकल्प सामने रखते हैं, फैसला सुनने वालों को आज़ादी मिलती है कुछ...

JNU ISSUE - United India

देश में जिस तरह की हवा बनायी जा रही खतरे की संभावना बढ़ रही है ऐसा दिख रहा है ,लेकिन साधारण जन -मानस की खरी-खरी दो टूक बातें सुन कर मुझे महसूस हो रहा है के अब देश के अच्छे दिन आ रहे है।  JNU हादसे ने देश को जोड़ने का बहुत महत्वपूर्ण काम किया है।  देश की जनता को  बिना कुछ किये साफ़ -साफ़ पता चला के देश में जो देश बिरोधी गतिविधियाँ चलती रही हैं उनको समर्थन कहाँ से मिलता रहा है।  राहुल गांधी , केजरीवाल , समाजवादी ,जनता दल बहुजनबादी और कम्युनिस्ट् विद्वानो का  खुल कर देश द्रोहियों के समर्थन में आना पूरी की पूरी कहानी ब्यान कर गया।  किसी को कुछ कहना या सुनना ही नहीं पड़ा , लेकिन जनता ने एक सुर में देश प्रेम और सम्मान को महत्वपूर्ण बता कर एक कड़ा संदेश दे दिया है के , जो भी हो देश के विरुध बोलने वालों को बक्शा नहीं जाएगा।  अब केंद्रीय विश्वविद्यालओं में तिरंगा फहराने के विरोध ने जनता को पक्का यकीन दिलवा दिया है के देश को अस्थिर और तोड़ने की साजिश करने वाले जितने अधिक देश के बाहर हैं उससे अधिक संख्या देश के अंदर है और ये दोषी लोग धर्म ,मज़हव या जाती की आढ़ में छुपे ह...

Modi's Clothes, Bihar Elections and Secularism ! / बिहार में मोदी के कपडे चुनावी मुद्दा है ?

दो रंगियां ये ज़माने की ,जीते जी है सब , कि मुर्दों को  न बदलते कफन देखा। ये शेयर 'ग़ालिब 'ने कई साल पहले राहुल गाँधी व कांग्रेस ठगबंधन को ध्यान में रखते हुए लिख दिया था , जिसका अर्थ है कपडे जिन्दा लोग ही बदलते है मुर्दे नहीं। बिहारचुनाब रैलियों में कांग्रेस ठगबंधन का एक मुद्दा "नरेंदर मोदी द्वारा बार -2 कपड़े बदलना भी है " . पता नही बिहार की जनता को इस बार महाठगबंधन के मुद्दे सुहाये भी है यां नही , महाठगबंधन द्वारा कोई भी मुद्दा जनता से जुड़ा हुआ नहीं उठाया गया। लेकिन  सोशल साईटस जैसे फेसबुक और व्हाट्स एप्प  ने चुनाबो में काफी प्रभाव डाला है। मोदी दिन में 100 कपड़े बदले इससे देश को क्या फर्क पड़ता है, पंडित नेहरू के कपड़े लंदन से धुल कर और प्रैस हो कर आते थे ,ये बात बताते समय  कांग्रेसियों का सीना फटने को हो आता था। कांग्रेसी लोग आँख बंद करके मंत्र मुक्त्त हो जाते थे ,जैसे नेहरू साहब के कपड़े ही नही धुलते थे लंदन में बल्की भारत का भाग्य भी साफ हो जाता था ,गरीब का स्नान हो जाता था ,साधरण भारतीय कृत -2 हो जाता था। वो  दिन भी बीत गए ,अब राहुल गाँ...

Make In India / विपक्ष परेशान क्यों है 'मेक इन इंडिया' से

कुदरत का नियम है सभी एक दूसरे से सीखते हैं ,यहां मौलिकता का दावा कोई नहीं कर सकता। फिर सरकार के 'मेड इन इंडिया 'अभियान का बिरोध क्यों ? भारत सरकार ने दुनिया की सभी बड़ी कम्पनियो को  भारत आकर निर्माण करने का न्योता दिया ,इसका फायदा सबसे पहले  तो रोजगार के रूप में होगा , दूसरे हमारे लोग तकनीक भी सीख सकेंगे। 80 के दशक में HERO-HONDA,ESCORT-YAMAHA, TVS -SUZUKI  आदि कम्पनियो ने भारत में काम शुरू किये थे। भारत और बिदेशी कम्पनियो के साझे उपकर्म थे ,उस समय भारत के लोगों के पास गाड़ियां बनाने की नई तकनीक नहीं थी।  परन्तु आज दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल कंपनी "हीरो" भारत की है। पेंटागन  ,एप्पल तथा वोेइंग  के साथ मिलकर ऐसे सैंसर  तैयार कर रहा है जो सिपाही पहन भी सकें और जहाज की वाड़ी  पर भी लगाए जा सकें। अब अगर भारत को ऐसा  ही कुछ निर्माण करना है तो दो  रास्ते है एक तो भारत के विज्ञानिक खुद ही खोज करें या भारत अमेरिकी कम्पनियो से सहयोग लेकर वर्तमान मांग को पूरा करें लेकिन भबिष्य के लिए भारतीय खोज जारी र...