इंसान और जानवर सभी जीवो के बीच एक अदृश्य सेतु बना हुआ होता है इसका निर्माण तभी होता है जब दो लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता हो। ये फर्क नहीं पड़ता दोनों लोग किस परिवार ,जाति ,धर्म या प्रजाति के हैं। इंसान भी हो सकते हैं जानवर भी। पुरानी फिल्म अनाड़ी का गाना जिसके लेखक शैलेन्द्र थे इन भावो को पुरणत्या व्यक्त करता है-किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार ,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार ,किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार
जीना इसी का नाम है।
इतने प्यारे भाव हों और घर में कलह या अशांति हो तो कमी विचारों की नहीं बल्कि कमी बिकल्पों की है। पुराने समय में घरों के फैसले परिवारों के बड़े बज़ुर्ग ही लेते थे ,उनके आगे कोई ना -नुकर नहीं चलती थी किसी की हिम्मत ही नहीं होती थी। वक़्त बदला और परिवारों में कई शक्ति केंद्र हो गए। ऐसे विकट समय में अगर किसी से कोई फैसला देने के लिए कहे तो उनको अपना विचार बताते समय ऐसा कहना चाहिए कि मेरे विचार में तो ये काम ऐसे करलो बाकी और भी कई तरीके हैं जो ठीक समझो वही करो। जैसे ही आप विकल्प सामने रखते हैं, फैसला सुनने वालों को आज़ादी मिलती है कुछ अपनी मन मर्ज़ी करने की,और मन मुखियों से तो संसार भरा पड़ा है। हमारे एक मित्र मध्यप्रदेश में कुछ दिनों के लिए रहे। उनके रहने की व्यबस्था होटल में ही थी जहाँ रोज उनकी टक्कर होटल के हाउस कीपिंग स्टाफ से हो जाती थी ,क्योंकि रोज लोंडरी से जो कपडे धुल कर कमरे में आते थे उनके बिल में रोज गड़बड़ी होती परिणामस्वकरूप रोज कुछ समय उस गलती को ठीक करवाने में चला जाता था। खोज करने पर हमारे मित्र को पता चल गया कि इस उलटफेर का कारण है होटल स्टाफ को अंग्रेजी पढ़ने में दिकत आना। उन्होंने होटल कर्मचारियों को मुफ्त अंग्रेजी सिखाने की पेशकश की ,अपनी कोशिश असफल होते देख उसने होटल मालिक और मैनेजर को भी ऑफर बताया परन्तु हमारे मित्र को को नाकामयाबी हाथ लगी क्योंकि होटल कर्मचारी नया सीखने से डर रहे थे तो दूसरी तरफ होटल प्रबंधन भी स्टाफ को सिखाने के पक्ष में नहीं था क्योंकि अगर स्टाफ थोड़ा सा अंग्रज़ी पढ़ना सीख जायेगा तो अच्छी नौकरी ढूंढने निकल जायेगा फिर उनके पास होटल में काम कौन करेगा सस्ते में। इस सब में सबसे अधिक गुनेहगार होटल कर्मचारी हैं ,वे अपने आप से तो छोड़ो अपने परवार से भी प्यार नहीं करते .उनके मन में अंग्रेजी के खिलाफ और अपनी योग्यता के खिलाफ नकारात्मक बिचार कुछ भी नया सीखने से रोक रहे थे । मैं तो सीख ही नहीं सकता ऐसा कहने वाले लोग भी नकारात्मक अहंकार करते है जिसमे वे अपने को बिलकुल नकारा और मूरख मानकर ,झक मार के बैठ जाते हैं। अब एक इंसान आपकी मदद करना चाहता है निःस्वार्थ भाव से और आप मुंह मोड़ लें तो प्यार का सेतु कैसे तैयार हो। प्यार बांटना हो चाहे दर्द ,कोई दूसरा तो होना चाहिए। विदेशों में ओल्डएज होम्स में सभी सुख होने के बावजूद वहां रहने वाले दुखी रहते हैं क्योंकि उनके अपने उनको भुला बैठे हैं उनसे कोई मिलने नहीं आता। दूसरी तरफ जेल काटते कैदी ह जिन्हें जेल में परिवार के लोग मिलाने आते हैं और उनका दुःख काफी हद तक दूर कर देते हैं। मतलब साफ़ है -वक़्त के साथ हमे बदलते रहना होगा तभी प्यार और दर्द एक दूसरे के साथ बाँट पाएंगे।
जीना इसी का नाम है।
इतने प्यारे भाव हों और घर में कलह या अशांति हो तो कमी विचारों की नहीं बल्कि कमी बिकल्पों की है। पुराने समय में घरों के फैसले परिवारों के बड़े बज़ुर्ग ही लेते थे ,उनके आगे कोई ना -नुकर नहीं चलती थी किसी की हिम्मत ही नहीं होती थी। वक़्त बदला और परिवारों में कई शक्ति केंद्र हो गए। ऐसे विकट समय में अगर किसी से कोई फैसला देने के लिए कहे तो उनको अपना विचार बताते समय ऐसा कहना चाहिए कि मेरे विचार में तो ये काम ऐसे करलो बाकी और भी कई तरीके हैं जो ठीक समझो वही करो। जैसे ही आप विकल्प सामने रखते हैं, फैसला सुनने वालों को आज़ादी मिलती है कुछ अपनी मन मर्ज़ी करने की,और मन मुखियों से तो संसार भरा पड़ा है। हमारे एक मित्र मध्यप्रदेश में कुछ दिनों के लिए रहे। उनके रहने की व्यबस्था होटल में ही थी जहाँ रोज उनकी टक्कर होटल के हाउस कीपिंग स्टाफ से हो जाती थी ,क्योंकि रोज लोंडरी से जो कपडे धुल कर कमरे में आते थे उनके बिल में रोज गड़बड़ी होती परिणामस्वकरूप रोज कुछ समय उस गलती को ठीक करवाने में चला जाता था। खोज करने पर हमारे मित्र को पता चल गया कि इस उलटफेर का कारण है होटल स्टाफ को अंग्रेजी पढ़ने में दिकत आना। उन्होंने होटल कर्मचारियों को मुफ्त अंग्रेजी सिखाने की पेशकश की ,अपनी कोशिश असफल होते देख उसने होटल मालिक और मैनेजर को भी ऑफर बताया परन्तु हमारे मित्र को को नाकामयाबी हाथ लगी क्योंकि होटल कर्मचारी नया सीखने से डर रहे थे तो दूसरी तरफ होटल प्रबंधन भी स्टाफ को सिखाने के पक्ष में नहीं था क्योंकि अगर स्टाफ थोड़ा सा अंग्रज़ी पढ़ना सीख जायेगा तो अच्छी नौकरी ढूंढने निकल जायेगा फिर उनके पास होटल में काम कौन करेगा सस्ते में। इस सब में सबसे अधिक गुनेहगार होटल कर्मचारी हैं ,वे अपने आप से तो छोड़ो अपने परवार से भी प्यार नहीं करते .उनके मन में अंग्रेजी के खिलाफ और अपनी योग्यता के खिलाफ नकारात्मक बिचार कुछ भी नया सीखने से रोक रहे थे । मैं तो सीख ही नहीं सकता ऐसा कहने वाले लोग भी नकारात्मक अहंकार करते है जिसमे वे अपने को बिलकुल नकारा और मूरख मानकर ,झक मार के बैठ जाते हैं। अब एक इंसान आपकी मदद करना चाहता है निःस्वार्थ भाव से और आप मुंह मोड़ लें तो प्यार का सेतु कैसे तैयार हो। प्यार बांटना हो चाहे दर्द ,कोई दूसरा तो होना चाहिए। विदेशों में ओल्डएज होम्स में सभी सुख होने के बावजूद वहां रहने वाले दुखी रहते हैं क्योंकि उनके अपने उनको भुला बैठे हैं उनसे कोई मिलने नहीं आता। दूसरी तरफ जेल काटते कैदी ह जिन्हें जेल में परिवार के लोग मिलाने आते हैं और उनका दुःख काफी हद तक दूर कर देते हैं। मतलब साफ़ है -वक़्त के साथ हमे बदलते रहना होगा तभी प्यार और दर्द एक दूसरे के साथ बाँट पाएंगे।
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