बात पिछले वर्ष बरसात की है जगह महाराष्ट्र का मुंबई -पुणे एक्सप्रेसवे था। बारिश से डर कर जहाँ अधिकतर लोग घरों में दुबक जाते हैं , कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो उस सुहाने मौसम को महसूस करने निकल पड़ते हैं। ऐसी ही ठेठ मुम्बईकर महिला उषा प्रताप अकेले अपनी कार में सवार होकर घाट की सुंदरता को निहारने निकल पड़ीं। धीरे -धीरे चलती गाडी को एकाएक पीछे से आती हुई तेज रफ़्तार राज्य परिवहन की बस ने ओवरटेक कियापरिणाम स्वरुप सड़क पे इकठ्ठा पानी कार के अंदर भी घुस गया। उषा प्रताप को ये कोई कष्ट देने वाली अनुभूति नहीं थी , बारिश में अक्सर ऐसा हो जाता है और अगर पानी से इतनी नफरत होती तो घर से ही ना निकलती। लेकिन जो बात महिला को चिंतित कर गयी वो थी बस की चाल। बस तेज गति से हिचकोले खाते जा रही थी और ज़रा सी चूक बस के यात्रियों को मौत की आगोश में भेज सकती थी। खुशनुमा मौसम बोझिल हो गया और महिला गाडी में बैठे -बैठे यात्रियों की कुशलता की प्रार्थना करने लगी। फिर ना जाने क्या सोचा और अपनी कार की स्पीड बढाकर बस के नंबर नोट कर लिया और अपनी कार सड़क किनारे पार्क करदी। उषा ने ट्विटर अकाउंट खोला और ट्ववीट करने की ठानी लेकिन किसे ट्वीट करके बताये समझ नहीं आ रहा था क्योंकि अधिकतर साधारण नागरिको को परिवहन विभाग के अफसरों के नाम या ट्वीटर अकाउंट तो पता नी होते यही उषा के साथ भी हुआ। कुछ सोच कर उसने दो व्यक्तियों को इस घटना बारे ट्वीट किये साथ ही बस का नंबर भी। महिला थोड़ा सुकून महसूस कर रही थी क्योंकि उसने सार्थक कोशिश की थी बस के यात्रियों की सकुशलता निश्चित करने की ,परन्तु कहीं उसके मन में थोड़ा सा संदेह था की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एक साधारण नागरिक के ट्वीट को गंभीरता से लेंगे ? ठीक 90 मिनट बाद उसके सारे प्रश्नो का उत्तर देते हुए एक ट्वीट आया 'जिसमे शुरू में 'सॉरी ' लिखा था और आगे लिखा था ड्राइवर संदीप के खिलाफ जाँच के बाद कार्यबाही होगी ,फिर लिखा 'रात 8.45 पे बस पुणे पहुँच चुकी है। और ये सब जानकारी खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उषा प्रताप को दी।
इधर 20 जून 2017 को कर्नाटक के बेंगलुरु में सब इंस्पेक्टर एम्.एल.निजलिंगप्पा ने एक एम्बुलेंस को रास्ता देने के लिए आउट ऑफ़ द वे जाकर महांमहिम राष्ट्रपति का काफिला रोक दिया। ऐसा फैसला अगर कोई पुलिस अधिकारी पहले के दिनों में लेता तो नौकरी चली जाती और जांच होती सो अलग लेकिन इसबार सरकार ने सम्बेदनशीलता को देखते हुए अधिकारी की न सिर्फ तारीफ की बल्कि इनाम की घोषणा भी करदी। आज़ादी के इतने वर्षों बाद ही सही सरकार और व्यबस्था की सम्बेदन शीलता आशा जगती है। कड़वा सच तो ये है की आज़ादी के बाद तो राजनेता तथा सरकारें असंबेदन शीलता का उपनाम ही हो गए थे। भगवान् राम के भारत में 'राजनीती 'का अर्थ था 'मर्यादा का व्यवहार अर्थात जन हित में मर्यादित कार्य करना। श्री राम का जीवन राजनीती में धैर्य ,भविष्य की समझ और जनहित की अभिलाषा का सन्देश देता रहा है। आज इन बातों को अगर सरकारें व्यवहार में ला रही हैं तो सम्बेदंनशील समाज के निर्माण की तरफ छोटे -छोटे कदम बढ़ने शुरू हो गए हैं, शुभ संकेत है देश की जनता के लिए।
इधर 20 जून 2017 को कर्नाटक के बेंगलुरु में सब इंस्पेक्टर एम्.एल.निजलिंगप्पा ने एक एम्बुलेंस को रास्ता देने के लिए आउट ऑफ़ द वे जाकर महांमहिम राष्ट्रपति का काफिला रोक दिया। ऐसा फैसला अगर कोई पुलिस अधिकारी पहले के दिनों में लेता तो नौकरी चली जाती और जांच होती सो अलग लेकिन इसबार सरकार ने सम्बेदनशीलता को देखते हुए अधिकारी की न सिर्फ तारीफ की बल्कि इनाम की घोषणा भी करदी। आज़ादी के इतने वर्षों बाद ही सही सरकार और व्यबस्था की सम्बेदन शीलता आशा जगती है। कड़वा सच तो ये है की आज़ादी के बाद तो राजनेता तथा सरकारें असंबेदन शीलता का उपनाम ही हो गए थे। भगवान् राम के भारत में 'राजनीती 'का अर्थ था 'मर्यादा का व्यवहार अर्थात जन हित में मर्यादित कार्य करना। श्री राम का जीवन राजनीती में धैर्य ,भविष्य की समझ और जनहित की अभिलाषा का सन्देश देता रहा है। आज इन बातों को अगर सरकारें व्यवहार में ला रही हैं तो सम्बेदंनशील समाज के निर्माण की तरफ छोटे -छोटे कदम बढ़ने शुरू हो गए हैं, शुभ संकेत है देश की जनता के लिए।
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