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Showing posts from December, 2017

Who Is Responsible ? / दोषी कौन ?

बच्चों का भविष्य सुरक्षित  करने की चाह में अधिकतर माता-पिता आजकल बच्चों का वर्तमान खराब कर रहे हैं।  बच्चों को स्थानीय भाषा में बात नहीं करने दी जाती क्योंकि देसी भाषा बोलने वाले को गंवार या अनपढ़ समझने लगता है समाज।  अधिकतर माता-पिता अंग्रेजी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भाषा मान कर या फिर घर में हिंदी बोल कर बच्चों को महान होने के तगमे पकड़ा रहे हैं। परिणाम स्वरुप भारत में सैकड़ों वर्षों से बोली जाने  वाली देसी भाषाएँ या बोलियां अब बिलुप्तता की और अग्रसर हो गयी हैं।  मैं हैरान हूँ ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश हैं जो अपने यहाँ बाहरी जानबरों को आने नहीं देते या कहें कि वैन है बाहरी जीव आप उस देश में ले कर नहीं जा सकते  परन्तु भारत की देसी नस्ल की गौ को वहां की सरकार बाहें खोल कर अपना रही है क्योंकि देसी गौ के गोबर -मूत्र और दूध में जो गुण हैं वो किसी और जीव से नहीं  मिलते लेकिन अपने यहाँ भारत में देसी नस्ल को तिरस्कार की दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि भारत का समाज इन्फेरियरिटी काम्प्लेक्स से ग्रस्त है।  भारत के लोगों को लगता है जो कुछ भी उनके पुरखो...

लिखो क्योंकि अपने को खोजना है / Why To Write ?

Love Is The Only Medicine For This World आपके विचार कोइ पढ़े  मत लिखो  , न ही प्रसिद्धि के  लिए।  किसी तरह की कोई सनसनी  के लिए भी नहीं और ना ही गुप्त अजेंडे  के लिए ,ना पैसा  और ना ही पुरस्कार की लालसा दिमाग में रखो तथा किसी भाषा के अध्यापक को खुश करने   लिए , इस लिए भी मत लिखो की किसी ने कहा है लिखने के लिए।  लिखो सिर्फ इस लिए कि आपको लिखना है अपने भाव और बिचारों को शब्द देने हैं लिखना है जिंदगी  के प्रति अपने नजरिये को शव्द देने के लिए के लिए।  और गलतियों कि चिंता ना करो सभी गलतियां करते हैं। लिखो क्योंकि अपने को खोजना है 

Gujarat Election - One Sided Battle

Love Is The Only Medicine For This World हमारे लिए शब्दों का महत्व आजकल बहुत अधिक होता है अगर वे नकारात्मक हैं , अगर शव्द सकारात्मक हैं तो अधिकतर लोग उनकी तरफ ध्यान भी नहीं देते।  यही हालात हमारे जीवन में भी हैं जो भी कुछ अच्छा है वो दिखता ही नहीं है लेकिन नकारात्मकता की मोटी चादर हमारे मन और चित को पूर्ण रूपेण ढके रहती है।  गुजरात चुनाव में भी यही हो रहा है , समाज को जाति के नाम पर बांटा गया और फिर धर्म के नाम की राजनीति मुख्य मुद्दा हो गयी।  गुजरात में विकास मुख्य मुद्दा पिछले चुनावों में था लेकिन इस बार पटेल आरक्षण मुहीम को इतना अधिक प्रचार मिला की चुनाव के मुद्दे सिमट कर जाति और धर्म तक ही सीमित हो गए।  दोष नेताओं को नहीं दे सकते समाज को जनता को जैसा चाहिए वही मुद्दा मुख्य हो जाता है। गुजरात के चनावों को काफी महत्व पूर्ण मन जा रहा है क्योंकि मोदी का राज्य है और इसके विकास मॉडल के  नाम पे ही मोदी सत्ता में आये थे।  कान्ग्रेस् ने आरक्षण तथा और कई बातों को जाति से जोड़ कर चुनावों से पहले ही विकास को पागल करार दे कर गुजरात को पिछड़ा राज्य घोषित कर दिया...

Smog - The Killer Dust /स्टोन क्रेशरों की जानलेवा धूल हवा में

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है और जीना दूभर हो गया है दिल्ली वालों का लेकिन हैरानगी होती है जब वैज्ञानिक भी नेताओं की तरह बातें करने लगते हैं।  हमारे देश में खनन माफिया का कहर इतना अधिक है कि वैज्ञानिक भी जनता को बढ़ते प्रदूषण का पूरा सच बताने से डरते हैं। क्या कोर्ट क्या डॉक्टर सभी कहते हैं कि हवा में महीन धूलकण बहुत जेहरीले हैं और दिल्ली वालो के सांस उखाड़ने वाले ये धूलकण किसानो द्वारा जलाई जा रही प्रालि के कारण फ़ैल रहे हैं।  कोई पूछने वाला नहीं इनसे की जब आग से प्रालि जलाई जाती है है तब की किसान रेट-मिटटी मिलाकर हवा में मिला देते हैं या लोई और कारण है जिस के बारे में बोलने से सभी डरते हैं।  मतलब ये माफिया इतना बड़ा और ताकत वॉर है कि कोई भी जानकार इस के बारे में बात ही नहीं करता।  जी हाँ , खनन माफिया की ही बात कर रहा हूँ। स्टोन क्रेशरों द्वारा हवा में महीन जानलेवा धूल मिलाई जा रही है दिल्ली की धूल तो मीडिया दिखा रहा है लेकिन अधूरे सच के साथ।  भारत में इस समय वायु प्रदुषण के सबसे बड़े कारणों में स्टोन क्रेशर आते हैं परन्तु ये माफिया इतना ताकतवर है की कोई भी पर्यवरण ...

हम अपनी आने वाली नस्लों के लिए क्या संस्कार छोड़ कर जायेंगे ?

हमारे समाज में जो भी बुराई बढ़ी है उसका सीधा प्रभाव बच्चों पर पड़ा है,उनका संस्कार  बदल गया परिणाम स्वरुप व्यवहार बदल गया और सीधे सीधे कहें तो ये संसार बदल गया।  एक दिन यूँ ही सड़क के किनारे खड़ा था तो कुछ लोग आपस में बातें कर रहे थे - सबसे मुखर आवाज में बात करने वाले भाई साहेब दिल्ली में रहते थे और गांव में अपनी खानदानी ज़मीन ढूंढने आये हुए थे ताकि बेच कर पैसा कमा सकें।  उन भाई साहेब के बच्चे अच्छी नौकरियों पे हैं खुद भी अछि कमाई करते हैं लेकिन पुरखों की थोड़ी बहुत ज़मींन जो पैतृक गांव में थी उसे बेच कर अपने सुख में बृद्धि करने की कोशिश में थे।  दुसरे भाई साहेब होशियारपुर में रहते थे और उनका भी टारगेट दिल्ली वालों जैसा ही था , लेकिन उनका लॉजिक थोड़ा अलग था ,वे कह रहे थे मेरी दो बेटियां हैं , मेरे बाद पैतृक ज़मीन को कौन देखे गा और बड़ी बात है की गांव की ज़मीन बेच कर अपनी बेटिओं की शादी धूम धाम से करेंगे और कुछ पैसा अपने बुढ़ापे के लिए भी जोड़ कर रखेंगे।  तीसरे भाई साहेब चंडीगढ़  में रहने वाले थे वे भी पैतृक  जमीन की खोज में आये हुए थे लेकिन उनका विचार था की ज़मीन की...